बजट 2026 में कैंसर दवाओं से लेकर कई जरूरी चीजें सस्ती, पढ़ें पूरी रिपोर्ट, सीमा शुल्क छूट से मरीजों और उपभोक्ताओं को बड़ी राहत

बजट में स्वास्थ्य क्षेत्र को प्राथमिकता देते हुए कैंसर और दुर्लभ बीमारियों की दवाओं पर सीमा शुल्क में छूट दी गई है। 17 कैंसर दवाओं पर बेसिक कस्टम्स ड्यूटी पूरी तरह से माफ कर

Feb 1, 2026 - 14:05
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बजट 2026 में कैंसर दवाओं से लेकर कई जरूरी चीजें सस्ती, पढ़ें पूरी रिपोर्ट, सीमा शुल्क छूट से मरीजों और उपभोक्ताओं को बड़ी राहत
बजट 2026 में कैंसर दवाओं से लेकर कई जरूरी चीजें सस्ती, पढ़ें पूरी रिपोर्ट, सीमा शुल्क छूट से मरीजों और उपभोक्ताओं को बड़ी राहत

केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 1 फरवरी 2026 को संसद में वित्त वर्ष 2026-27 का केंद्रीय बजट पेश किया, जिसमें कई क्षेत्रों में कर राहत और कुछ वस्तुओं पर कर बढ़ोतरी के प्रस्ताव शामिल हैं। यह उनका लगातार नौवां बजट है। बजट में आयकर स्लैब में कोई बदलाव नहीं किया गया है, लेकिन कर अनुपालन को सरल बनाने, स्वास्थ्य क्षेत्र को राहत देने और घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देने पर जोर दिया गया है। कैपिटल एक्सपेंडिचर को बढ़ाकर 12.2 लाख करोड़ रुपये किया गया है, जबकि फिस्कल डेफिसिट 4.3 प्रतिशत पर लक्षित है। बजट में सीमा शुल्क में बदलाव से कई आवश्यक वस्तुएं सस्ती हुई हैं, जबकि कुछ वित्तीय लेनदेन और सिन गुड्स महंगे हो गए हैं। नया इनकम टैक्स एक्ट 1 अप्रैल 2026 से प्रभावी होगा।

बजट में स्वास्थ्य क्षेत्र को प्राथमिकता देते हुए कैंसर और दुर्लभ बीमारियों की दवाओं पर सीमा शुल्क में छूट दी गई है। 17 कैंसर दवाओं पर बेसिक कस्टम्स ड्यूटी पूरी तरह से माफ कर दी गई है। इसके अलावा 7 दुर्लभ बीमारियों के लिए इस्तेमाल होने वाली दवाओं, दवाइयों और विशेष चिकित्सकीय भोजन पर व्यक्तिगत आयात के लिए ड्यूटी छूट बढ़ाई गई है। इससे मरीजों की लागत में कमी आएगी। इलेक्ट्रॉनिक्स और ग्रीन एनर्जी क्षेत्र में भी राहत दी गई है। माइक्रोवेव ओवन के निर्माण में इस्तेमाल होने वाले निर्दिष्ट पार्ट्स पर बेसिक कस्टम्स ड्यूटी माफ कर दी गई है।

लिथियम-आयन सेल निर्माण के लिए कैपिटल गुड्स पर ड्यूटी छूट दी गई है, जिससे इलेक्ट्रिक व्हीकल बैटरी और संबंधित उपकरण सस्ते होंगे। सोलर पैनल और संबंधित उपकरण भी सस्ते हो सकते हैं क्योंकि क्रिटिकल मिनरल प्रोसेसिंग के लिए कैपिटल गुड्स पर ड्यूटी छूट है। व्यक्तिगत उपयोग के लिए आयातित सभी देय वस्तुओं पर टैरिफ रेट 20 प्रतिशत से घटाकर 10 प्रतिशत कर दिया गया है, जिससे लग्जरी वॉच, इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स और अन्य पर्सनल इंपोर्ट्स सस्ते होंगे। खेल उपकरण भी सस्ते होंगे क्योंकि स्पोर्ट्स इक्विपमेंट पर राहत दी गई है। चमड़े के उत्पाद, जूते और संबंधित सामग्री पर ड्यूटी-फ्री आयात की अनुमति दी गई है, जिससे निर्यात और घरेलू बाजार में कीमतें कम होंगी। सीफूड निर्यातकों के लिए इनपुट्स पर ड्यूटी-फ्री आयात की सीमा बढ़ाई गई है। विमान निर्माण और रखरखाव के लिए पार्ट्स पर ड्यूटी छूट दी गई है।

विदेश यात्रा, शिक्षा और चिकित्सा खर्च सस्ते हुए, टीसीएस दर घटाकर 2% की गई जबकि ट्रेडिंग और कुछ लेनदेन महंगे

बजट में विदेशी यात्रा और संबंधित खर्चों पर राहत दी गई है। ओवरसीज टूर पैकेज पर टीसीएस दर 5-20 प्रतिशत से घटाकर 2 प्रतिशत कर दी गई है, बिना किसी राशि सीमा के। लिबरलाइज्ड रेमिटेंस स्कीम के तहत शिक्षा और चिकित्सा उद्देश्यों के लिए टीसीएस दर 5 प्रतिशत से घटाकर 2 प्रतिशत कर दी गई है। इससे विदेश में पढ़ाई और इलाज कराने वाले छात्रों और मरीजों को फायदा होगा। अल्कोहलिक लिकर, स्क्रैप और कुछ मिनरल्स पर टीसीएस दर 5 प्रतिशत से घटाकर 2 प्रतिशत की गई है। हालांकि कुछ क्षेत्रों में लागत बढ़ेगी। फ्यूचर्स ट्रेडिंग पर सिक्योरिटीज ट्रांजेक्शन टैक्स तीन गुना बढ़ाकर 0.02 प्रतिशत से 0.05 प्रतिशत कर दिया गया है, जिससे ट्रेडिंग महंगी हो जाएगी। बायबैक टैक्सेशन में बदलाव से कुछ कॉर्पोरेट कैश डिस्ट्रीब्यूशन महंगे होंगे। सिगरेट, तंबाकू उत्पाद और पान मसाला जैसे सिन गुड्स पर कर बोझ बढ़ेगा। लग्जरी और आयातित कुछ फिनिश्ड प्रोडक्ट्स पर ड्यूटी संरचना से कीमतें बढ़ सकती हैं।

आयकर स्लैब में कोई बदलाव नहीं लेकिन अनुपालन सरल, नया एक्ट अप्रैल से, छोटे करदाताओं को राहत और सीनियर सिटीजन को सुविधा

आयकर स्लैब में कोई बदलाव नहीं किया गया है। नया इनकम टैक्स एक्ट 2025 1 अप्रैल 2026 से प्रभावी होगा, जो 1961 के एक्ट की जगह लेगा। कर नियमों और फॉर्म को सरल बनाया जाएगा। छोटे करदाताओं के लिए ऑटोमेटेड प्रक्रिया से निल या लोअर डिडक्शन सर्टिफिकेट मिलेगा। सीनियर सिटीजन फॉर्म 15G/15H को एनएसडीएल और सीडीएसएल के माध्यम से सीधे जमा कर सकेंगे। मोटर एक्सीडेंट क्लेम्स ट्रिब्यूनल द्वारा दिए गए ब्याज पर इनकम टैक्स छूट दी गई है और टीडीएस समाप्त किया गया है।

रिवाइज्ड रिटर्न फाइलिंग की डेडलाइन 31 दिसंबर से बढ़ाकर 31 मार्च कर दी गई है, नाममात्र फीस के साथ। अपडेटेड रिटर्न रीअसेसमेंट के बाद भी फाइल किए जा सकेंगे, 10 प्रतिशत अतिरिक्त दर पर। टीडीएस दरों को रेशनलाइज किया गया है। आईटी सर्विसेज के लिए सेफ हार्बर मार्जिन 15.5 प्रतिशत फिक्स्ड किया गया है, थ्रेशोल्ड 300 करोड़ से बढ़ाकर 2000 करोड़ किया गया है और अप्रूवल ऑटोमेटिक होगा।

बजट में घरेलू विनिर्माण, एमएसएमई, कृषि, निर्यात और इंफ्रास्ट्रक्चर पर फोकस है। कुल बजट आकार 53.5 लाख करोड़ रुपये है। इन बदलावों से आवश्यक वस्तुओं और सेवाओं पर बोझ कम होगा, जबकि कुछ वित्तीय गतिविधियों पर लागत बढ़ेगी।

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