Deoband News: ईद-उल-फितर: एक आइना हमारे लिए।
रमज़ान सिर्फ़ भूख और प्यास सहने का नाम नहीं, बल्कि यह एक ऐसा मुकद्दस दौर है, जो इंसान की जुबान, अख़लाक़ और आमाल को संवारने ....
देवबंद: मशहूर आलिम-ए-दीन मौलाना क़ारी इसहाक़ गोरा ने कहा कि ईद-उल-फितर सिर्फ़ जश्न और ख़ुशी का नाम नहीं, बल्कि यह उस संघर्ष और आत्म-संयम का परिणाम है, जो हमने पूरे रमज़ान अपने नफ़्स की तरबियत में लगाया। यह दिन हमें यह सोचने पर मजबूर करता है कि क्या हमने इस मुबारक महीने का सही हक़ अदा किया?
रमज़ान सिर्फ़ भूख और प्यास सहने का नाम नहीं, बल्कि यह एक ऐसा मुकद्दस दौर है, जो इंसान की जुबान, अख़लाक़ और आमाल को संवारने का सुनहरा मौक़ा देता है। इस दौरान हमने जो सबक़ सीखा, क्या वह हमारे अंदर स्थायी बदलाव ला सका? अगर रमज़ान के बाद भी हमारी ज़िंदगी पहले जैसी ही रही हमारी बातें, हमारे अमल, हमारी इबादतें और हमारे रोज़मर्रा के मामलात वैसी ही रहे तो हमें सोचना चाहिए कि क्या हमारा रोज़ा महज़ एक रस्म बनकर रह गया?
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ईद दरअसल एक आइना है, जिसमें हमें अपना असली अक्स देखना चाहिए। क्या हम पहले से बेहतर इंसान बने? क्या हमारे दिल में तक़वा बढ़ा? क्या हमारी ज़ुबान अब ग़ीबत और झूठ से पाक हो गई? क्या हमारे अख़लाक़ में नर्मी और हमारे दिल में दूसरों के लिए मोहब्बत आई?
अगर हाँ, तो अल्हम्दुलिल्लाह! हमारी मेहनत रंग लाई। लेकिन अगर नहीं, तो हमें अपनी कमियों को दूर करने का संकल्प लेना चाहिए। क्योंकि असल ईद वही है, जब हम न सिर्फ़ अपने जिस्म को बल्कि अपनी रूह को भी पाक और रोशन कर लें।
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