Hardoi : हरदोई में धान खरीद पर भ्रष्टाचार के आरोप, संगठनों ने सीएम को भेजा शिकायत पत्र

पत्र में बताया गया है कि सहकारिता विभाग के अधिकारी आर सहकारिता ने अपने नियंत्रण वाली समितियों के खरीद केंद्रों को पीसीएफ और पीसीयू जैसी एजेंसियों के जिला

Nov 27, 2025 - 22:41
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Hardoi  : हरदोई में धान खरीद पर भ्रष्टाचार के आरोप, संगठनों ने सीएम को भेजा शिकायत पत्र
Hardoi : हरदोई में धान खरीद पर भ्रष्टाचार के आरोप, संगठनों ने सीएम को भेजा शिकायत पत्र

हरदोई। जिले में धान खरीद केंद्रों पर भ्रष्टाचार के आरोपों के खिलाफ अखिल भारतीय संयुक्त अधिवक्ता परिषद और स्वदेशी जागरण मंच के पदाधिकारियों ने चार सूत्री मांग पत्र जारी किया है। यह पत्र मुख्यमंत्री को भेजा गया है, जिसमें जिला प्रशासन को भी चेतावनी दी गई है। संगठनों का कहना है कि हाल ही में जिलाधिकारी को दी गई शिकायत पर कोई कार्रवाई नहीं हुई।पत्र में बताया गया है कि सहकारिता विभाग के अधिकारी आर सहकारिता ने अपने नियंत्रण वाली समितियों के खरीद केंद्रों को पीसीएफ और पीसीयू जैसी एजेंसियों के जिला प्रबंधकों के साथ मिलकर दलालों को बेच दिया है। दलाल मनमाने ढंग से काम कर रहे हैं और न्यूनतम समर्थन मूल्य पर किसानों का धान नहीं खरीद रहे। ग्रामीण केंद्रों पर तौल न होने पर किसान मंडी परिषद के सरकारी केंद्रों पर आते हैं, लेकिन वहां खाद्य एवं रसद विभाग के कर्मचारी मनोज शर्मा, धर्मेंद्र यादव, विनय और उनके साथी 200 रुपये प्रति क्विंटल की मांग करते हैं। पैसे न देने पर ट्राली 10-12 दिन खड़ी रखी जाती है। मजबूर किसान या तो रिश्वत देकर बेचते हैं या बाजार में 1400-1600 रुपये प्रति क्विंटल पर बेच देते हैं।संगठनों ने आरोप लगाया है कि ये कर्मचारी पिछले 15 वर्षों से जिले में तैनात हैं। उन्होंने भ्रष्टाचार से करोड़ों रुपये की संपत्ति बनाई है। ये डिप्टी आरएमओ को भी अपने इशारे पर चलाते हैं और एडीएम व जिलाधिकारी के आदेशों की अनदेखी कर शासन की मंशा के खिलाफ काम कर रहे हैं। भाजपा विधायक श्याम प्रकाश ने भी सोशल मीडिया पर कहा है कि धान खरीद केंद्रों पर 80 प्रतिशत किसानों का धान नहीं, बल्कि व्यापारियों का धान खरीदा जा रहा है।

पत्र में यह भी कहा गया है कि अब किसानों को मंडी आने के बाद दो-तीन दिन खड़ा रखा जाता है और फिर गांव के केंद्र पर भेज दिया जाता है। वहां पहले ही निराश हो चुके किसान अंत में दलालों को बेचकर सरकार को दोष देते हैं। कुछ दिन पहले मंडलायुक्त लखनऊ के निरीक्षण में कई अनियमितताएं पाई गईं, लेकिन प्रशासन ने सिर्फ एक केंद्र प्रभारी पर एफआईआर दर्ज कर मामला दबा दिया। असली दोषी अभी भी सक्रिय हैं।संगठनों की चार मुख्य मांगें हैं। पहली, एआर सहकारिता द्वारा सहकारी समितियों के केंद्रों को दलालों को बेचने और अवैध संचालन करने वाले कर्मचारियों की जांच होकर कार्रवाई की जाए। दूसरी, मंडी समिति के कर्मचारियों मनोज शर्मा, धर्मेंद्र यादव और उनके साथियों को तुरंत हटाया जाए तथा किसानों से धोखाधड़ी और शासन के खिलाफ काम के आरोप में एफआईआर दर्ज हो। तीसरी, इनकी संपत्ति की जांच हो। चौथी, किसानों का धान बिना बिचौलिए के आसानी से सरकारी केंद्रों पर खरीदा जाए।

पत्र में कहा गया है कि यदि मांगें पूरी न हुईं तो संगठन के कार्यकर्ता कलेक्ट्रेट पर धरना देंगे। जरूरत पड़ी तो अनशन या आमरण अनशन करेंगे। संगठनों का मानना है कि ईमानदार अधिकारी या मंडलायुक्त द्वारा जनता के बीच जांच कराई जाए तो सच्चाई सामने आ जाएगी।

स्थानीय किसानों ने बताया कि सरकारी केंद्रों पर देरी, घटतौली और रिश्वत की मांग से परेशान हैं। बाजार में कम दाम मिलने से नुकसान हो रहा है। जिला प्रशासन का कहना है कि शिकायतों पर जांच चल रही है और दोषियों पर कार्रवाई होगी।

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