Hardoi News: डीएम के आदेशों की अवहेलना कर मनरेगा कार्यों में धांधली की जांच रिपोर्ट प्रस्तुत नहीं, 30 दिन की समयावधि गुजरने के बाद भी...
जिलाधिकारी मंगला प्रसाद सिंह के आदेशानुसार ग्राम पंचायत कमरौली विकास खंड सुरसा में मनरेगा कार्यों की जांच में भ्रष्टाचार का खुलासा हुआ है। मौके पर ....
हरदोई। जिलाधिकारी मंगला प्रसाद सिंह के आदेशानुसार ग्राम पंचायत कमरौली विकास खंड सुरसा में मनरेगा कार्यों की जांच में भ्रष्टाचार का खुलासा हुआ है। मौके पर आई टीम द्वारा की गई जांच में विकास कार्यों में अनियमितता पाई गई। बिना कार्य कराए ही मनरेगा का भुगतान कर दिया गया और सभी कार्य गुणवत्ताविहीन पाए गए। प्रधान और कर्मचारियों की मिलीभगत से आवश्यकता से अधिक भुगतान किया गया।
ज्ञात हो कि गौरव कुमार दीक्षित पुत्र नरेश कुमार दीक्षित, निवासी ग्राम कमरौली, विकास खण्ड सुरसा, जनपद हरदोई ने शिकायती पत्र देते हुए बताया कि 03 अक्टूबर द्वारा आरती द्विवेदी, प्रधान सचिव ग्राम पंचायत कमरौली मरसा विकास खण्ड सुरसा के विरुद्ध ग्राम पंचायत सरकारी भूमि जंगल, ढाक पर अवैध तरीके से मनरेगा योजनार्न्तगत निर्माणाधीन कैटल शेड की कोई वित्तीय एवं प्रशासनिक स्वीकृति न लिए जाने, गुणवत्ता विहीन कार्य कराने, कच्चे व पक्के कार्यों के आगणन में अप्रत्याशित रुप से बढ़ोत्तरी करने, मनरेगा योजनार्न्तगत अपने पिता कौशल किशोर, भाई की पत्नी खुशबू के नाम मनरेगा जाबकार्ड जारी कर अवैध रुप से धन की निकासी करने आदि शिकायती बिन्दुओं की जांच कराये जाने की शिकायत प्रस्तुत की गई है।
उक्त शिकायती पत्र के बाद डीएम ने कार्रवाई करते हुए आदेश पत्र जारी करते हुए कहा था कि किसी शिकायत या रिपोर्ट की प्राप्ति पर या अन्यथा जिला पंचायतराज अधिकारी को अथवा किसी जिला स्तरीय अधिकारी को यह पता लगाने की दृष्टि से कि क्या उस विषय में औपचारिक जांच के लिए कोई प्रथम दृष्टया मामला है, प्रारिम्भक जांच करने के लिए आदेश दे सकता है। उन्होंने निर्देश दिए थे कि उक्त शासनादेश के प्रावधानों के अर्न्तगत शिकायती पत्र में इंगित बिन्दुओं की जांच कर अपनी सुस्पष्ट जांच आख्या निष्कर्ष सहित 30 दिवस के अन्दर प्रस्तुत करें लेकिन अभी तक इस जांच को लेकर कोई भी रिपोर्ट संबंधित अधिकारियों ने प्रस्तुत नहीं की है। डीएम द्वारा इस मामले को लेकर दिए गए निर्देशों की जांच कर रिपोर्ट न प्रस्तुत करने पर होने वाली कार्रवाई को लेकर शायद उनके मातहतों में कोई भय नहीं रहा।
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मनरेगा कार्यों में हुई धांधली के जांच के मुख्य बिंदु...
- गुणवत्ता विहीन निर्माण:- ग्राम सभा में हुए इंटरलॉकिंग कार्यों में स्थानीय नहर की बालू का उपयोग किया गया और बिना पत्थर डाले ही निर्माण कार्य पूरा कर दिया गया। इस कारण निर्माण कार्य की गुणवत्ता अत्यंत निम्न स्तर की पाई गई।
- फर्जी फॉर्म के माध्यम से भुगतान:- ग्राम सभा में किए गए कार्यों का भुगतान प्रधान द्वारा स्वयं की फर्जी फर्मों के माध्यम से कराया गया। जांच के दौरान यह पाया गया कि इन फर्मों का न तो कोई वास्तविक अस्तित्व है और न ही मौके पर कोई दुकान या कार्यालय संचालित है। मनरेगा जॉब कार्ड धारक मनोज लाल के नाम पर फर्जी फर्म 'श्री बांके बिहारी ट्रेडर्स' का गठन कर लगभग 1 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया। जांच में यह फर्म पूर्णतः फर्जी पाई गई, जिसका उद्देश्य केवल सरकारी धन का गबन था। इसके अतिरिक्त, ग्राम प्रधान प्रतिनिधि हर्षित द्विवेदी के नाम पर भी 'मां वैष्णो एंटरप्राइजेज'
नामक फर्जी फर्म संचालित है, जिसका भी कोई वास्तविक अस्तित्व नहीं पाया गया। - बिना कार्य के भुगतान:- ग्राम पंचायत में बिना कार्य कराए ही मनरेगा का भुगतान किया गया। जांच में यह भी पाया गया कि निम्नलिखित कार्यों के लिए बिना कार्य कराए ही भुगतान किया गया- 1- शंकर (पुत्र राधाकृष्ण) के खेत में मेढ़बंदी एवं समतलीकरण। 2- शंभू (पुत्र महिपाल) के खेत में मेढ़बंदी एवं समतलीकरण। 3- राजाराम (पुत्र जित्ता) के खेत में मेढ़बंदी एवं समतलीकरण। 4- सुबेदार (पुत्र सिरदार) के खेत में मेढ़बंदी एवं समतलीकरण।
- वृक्षारोपण धनराशि का गबन और निजी उपयोग :- ग्राम सभा में वृक्षारोपण कार्य के लिए आवंटित धनराशि का ग्राम प्रधान प्रतिनिधि द्वारा गबन किया गया। जांच में यह भी पाया गया कि वृक्षारोपण हेतु आवंटित भूमि का उपयोग ग्राम प्रधान द्वारा निजी कृषि कार्यों के लिए किया जा रहा है, जो योजना के नियमों का स्पष्ट उल्लंघन है और सार्वजनिक संपत्ति के दुरुपयोग को दर्शाता है।
- कैटल शेड निर्माण में अनियमितता:- मनरेगा योजना के अंतर्गत कैटल शेड निर्माण कार्य ग्राम प्रधान द्वारा ठेकेदारी के माध्यम से कराया गया, जो योजना के प्रावधानों का उल्लंघन है। लाभार्थी को आवंटित धनराशि में से केवल आधी राशि की सामग्री प्रदान की गई, जबकि शेष धनराशि का गबन ग्राम प्रधान द्वारा कर लिया गया।
- अंत्येष्टि स्थल में धन का गबन :- ग्राम सभा में अंत्येष्टि स्थल के निर्माण कार्य के लिए 24 लाख 50 हजार रुपये की धनराशि विभाग द्वारा ग्राम पंचायत के खाते में हस्तांतरित की गई, लेकिन प्रधान ने उस धनराशी का गबन करके लगभग 15 लाख रुपये का मनरेगा योजना का कार्य नियम विरुद्ध कराया है।
अंत्येष्टि स्थल की जांच के बाद ग्राम प्रधान द्वारा इंटरलॉकिंग कार्य कराया गया, जो सीधे गबन को दर्शाता है। जबकि अंत्येष्टि स्थल का समस्त निर्माण कार्य और भुगतान मार्च 2024 में पूर्ण हो चुका था। यह कृत्य घोर वित्तीय अनियमितता और भ्रष्टाचार को दर्शाता है।
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