गुरुग्राम में 32 साल पहले मृत व्यक्ति की जमीन फर्जी दस्तावेजों से बेचने वाला वकील गिरफ्तार, लाखों रुपये की ठगी का खुलासा।
गुरुग्राम पुलिस ने एक चौंकाने वाली धोखाधड़ी के मामले में 40 वर्षीय वकील नवीन राणा को गिरफ्तार किया है, जो बजघेड़ा गांव का रहने वाला
गुरुग्राम पुलिस ने एक चौंकाने वाली धोखाधड़ी के मामले में 40 वर्षीय वकील नवीन राणा को गिरफ्तार किया है, जो बजघेड़ा गांव का रहने वाला है और गुरुग्राम कोर्ट में प्रैक्टिस करता था। नवीन राणा ने 1993 में मृत हो चुके ओम प्रकाश के नाम पर फर्जी दस्तावेज तैयार कर उनके बैंक खाता को अनफ्रीज कराया और उनकी जमीन बेचकर कंपनी से प्राप्त लाखों रुपये अपने निजी खाते में ट्रांसफर कर लिए। यह मामला तब सामने आया जब एक कंपनी ने शिकायत दर्ज कराई कि उन्होंने ओम प्रकाश को जमीन खरीदने के लिए पैसे दिए, लेकिन बाद में पता चला कि ओम प्रकाश 1993 में ही मर चुके थे।
मामले की शुरुआत 2018 में हुई जब एंजेल बिल्डटेक प्राइवेट लिमिटेड कंपनी ने शिकायत की कि उन्होंने ओम प्रकाश से बजघेड़ा में जमीन खरीदी और इसके लिए 46.50 लाख रुपये का भुगतान किया। कंपनी को बाद में पता चला कि असली ओम प्रकाश 1993 में मृत्यु को प्राप्त हो चुके थे। जांच में सामने आया कि ओम प्रकाश का बैंक खाता फ्रीज था, लेकिन फर्जी दस्तावेजों के आधार पर इसे 2016 में सदर बाजार ब्रांच में ट्रांसफर कराया गया और अनफ्रीज करवाया गया। पुलिस जांच में पता चला कि नवीन राणा ओम प्रकाश को जानता था और उनकी मृत्यु के बाद खुद को ओम प्रकाश बनाकर फर्जी दस्तावेज तैयार किए। उसने मृतक के नाम पर बैंक खाता खुलवाया और जमीन की रजिस्ट्री कराकर कंपनी से पैसे लिए। प्राप्त राशि को उसने अपने व्यक्तिगत खाते में ट्रांसफर कर लिया। गिरफ्तारी के बाद पूछताछ में नवीन राणा ने अपना जुर्म कबूल कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी ने फर्जी तरीके से मृत व्यक्ति को कागजों पर जीवित दिखाया और जमीन बेची।
यह मामला शिवाजी नगर पुलिस स्टेशन में दर्ज किया गया और आर्थिक अपराध शाखा को सौंपा गया। आर्थिक अपराध शाखा की टीम ने तकनीकी जांच और सबूतों के आधार पर नवीन राणा को गिरफ्तार किया। गिरफ्तारी बुधवार को हुई और आरोपी को कोर्ट में पेश किया गया। पुलिस ने आरोपी के पास से फर्जी दस्तावेज और अन्य सामग्री बरामद की है। जांच जारी है और अन्य संभावित ठगी के मामलों की भी पड़ताल की जा रही है। ओम प्रकाश की जमीन बजघेड़ा क्षेत्र में थी, जहां आरोपी खुद भी रहता है। फर्जी दस्तावेजों में आधार कार्ड, पैन कार्ड और अन्य पहचान पत्रों का इस्तेमाल किया गया। बैंक खाते को फ्रीज से मुक्त कराने के लिए भी जाली कागजात प्रस्तुत किए गए। कंपनी ने भुगतान चेक के माध्यम से किया था, जो मृतक के नाम पर बने खाते में गया और फिर आरोपी ने उसे अपने खाते में स्थानांतरित कर लिया।
इस धोखाधड़ी से कंपनी को लाखों रुपये का नुकसान हुआ और जमीन की रजिस्ट्री भी अवैध साबित हुई। पुलिस ने मामले में धोखाधड़ी, जालसाजी और आपराधिक साजिश के तहत मुकदमा दर्ज किया है। आरोपी वकील होने के कारण दस्तावेज तैयार करने में आसानी हुई। पूछताछ में उसने बताया कि वह ओम प्रकाश से परिचित था और उनकी मृत्यु के बाद इस योजना को अंजाम दिया। गुरुग्राम में संपत्ति संबंधी धोखाधड़ी के मामले बढ़ रहे हैं, जहां फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल आम हो गया है। इस मामले में मृत व्यक्ति की पहचान का दुरुपयोग कर जमीन बेचना एक नया तरीका सामने आया है। पुलिस ने अन्य पीड़ितों से भी संपर्क करने की अपील की है अगर उन्होंने ओम प्रकाश से कोई संपत्ति सौदा किया हो। जांच टीम सबूत जुटा रही है और बैंक रिकॉर्ड की भी छानबीन की जा रही है। नवीन राणा की गिरफ्तारी से क्षेत्र में संपत्ति सौदों की जांच तेज हो गई है। पुलिस ने बैंक अधिकारियों से भी पूछताछ की है कि फर्जी दस्तावेजों पर खाता कैसे अनफ्रीज हुआ। मामले में करीब 60 लाख रुपये की ठगी का अनुमान है, जिसमें जमीन बिक्री से प्राप्त राशि शामिल है। आरोपी को जेल भेज दिया गया है और जांच आगे बढ़ रही है।
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