Lucknow : उत्तर प्रदेश में बागपत सहकारी चीनी मिल की क्षमता दोगुनी होगी, मुख्य सचिव की अध्यक्षता में प्रायोजन रचना एवं मूल्यांकन प्रभाग की 101वीं बैठक संपन्न

परियोजना के लिए वित्तीय व्यवस्था में 50 प्रतिशत राशि राज्य सरकार की अंश पूंजी से और बाकी 50 प्रतिशत ऋण के रूप में राज्य सरकार द्वारा दी जाएगी। बैठक में निर्देश दिए गए कि वित्तीय

Feb 6, 2026 - 22:12
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Lucknow : उत्तर प्रदेश में बागपत सहकारी चीनी मिल की क्षमता दोगुनी होगी, मुख्य सचिव की अध्यक्षता में प्रायोजन रचना एवं मूल्यांकन प्रभाग की 101वीं बैठक संपन्न
Lucknow : उत्तर प्रदेश में बागपत सहकारी चीनी मिल की क्षमता दोगुनी होगी, मुख्य सचिव की अध्यक्षता में प्रायोजन रचना एवं मूल्यांकन प्रभाग की 101वीं बैठक संपन्न

उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव एसपी गोयल की अध्यक्षता में प्रायोजन रचना एवं मूल्यांकन प्रभाग, नियोजन विभाग की 101वीं बैठक हुई। बैठक में किसान सहकारी चीनी मिल, बागपत की पेराई क्षमता को मौजूदा 2500 टीसीडी से बढ़ाकर 5000 टीसीडी करने और नवीनतम तकनीक से रिफाइंड शुगर बनाने के लिए नई चीनी मिल लगाने के संशोधित प्रस्ताव को मंजूरी दी गई। इस परियोजना की अनुमानित लागत लगभग 407 करोड़ रुपये है।

परियोजना के लिए वित्तीय व्यवस्था में 50 प्रतिशत राशि राज्य सरकार की अंश पूंजी से और बाकी 50 प्रतिशत ऋण के रूप में राज्य सरकार द्वारा दी जाएगी। बैठक में निर्देश दिए गए कि वित्तीय वर्ष 2026-27 के बजट में 100 करोड़ रुपये के ऋण के लिए प्रावधान करने का प्रस्ताव जल्दी भेजा जाए। बैठक में बताया गया कि इस क्षेत्र में गन्ने की पर्याप्त उपलब्धता है। अगले पांच सालों में हर साल करीब 8 लाख टन गन्ना पेराई के लिए मिल सकता है। मिल की पुरानी मशीनरी 30 साल से ज्यादा पुरानी है, जिससे स्टीम और बैगास की ज्यादा खपत होती है। पिछले पेराई सत्र 2024-25 में मिल ने लगभग 4.49 लाख टन गन्ने की पेराई की थी। बाकी गन्ना निजी मिलों को जा रहा है।

नई तकनीक और क्षमता वृद्धि से मिल की दक्षता बढ़ेगी। आधुनिक उपकरणों से 5000 टीसीडी क्षमता वाली पेराई औसत 22 घंटे के संचालन में हो सकेगी। इससे मिल का काम कम समय में पूरा होगा, किसानों का गन्ना समय पर पेरा जाएगा, भुगतान आसान होगा और उनकी आय स्थिर रहेगी। परियोजना में हाई प्रेशर 100 टीपीएच, 67 बार बॉयलर, 10 मेगावाट पावर टरबाइन और वेरिएबल फ्रीक्वेंसी ड्राइव मोटरों का उपयोग होगा। इससे बिजली की बचत होगी, स्टीम खपत कम होगी और बैगास ज्यादा बचेगा। रिफाइंड शुगर बनाने से चीनी की गुणवत्ता बेहतर होगी, बाजार में अच्छी कीमत मिलेगी, चीनी की हानि कम होगी और उत्पादन लागत घटेगी।

इससे क्षेत्र में रोजगार बढ़ेगा, किसानों की आय में सुधार होगा और राज्य के गन्ना क्षेत्र का विकास होगा। मिल में सल्फर वाली चीनी की जगह रिफाइंड शुगर का उत्पादन डीसीएस आधारित ऑटोमेशन से होगा। बैठक में अपर मुख्य सचिव ऊर्जा नरेन्द्र भूषण, अपर मुख्य सचिव चीनी उद्योग एवं गन्ना विकास वीना कुमारी मीना सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे।

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