Sambhal : ‘कल्कि सम्भल’ फिल्म पर ममलूकुर्रहमान बर्क का तीखा हमला बोले, सौहार्द बिगाड़ने की साज़िश, कोर्ट में करेंगे कार्रवाई
ममलूकुर्रहमान बर्क ने कहा कि देश को पीछे धकेला जा रहा है और नौजवानों को नफरत की आग में झोंककर उनका मुस्तकबिल बर्बाद किया जा रहा है। तालीम और आर्थिक हालात
Report : उवैस दानिश, सम्भल
सम्भल में बन रही फिल्म ‘कल्कि सम्भल’ के पोस्टर रिलीज़ होते ही मचे विवाद पर सपा नेता ममलूकुर्रहमान बर्क ने कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने फिल्म को सामाजिक सौहार्द बिगाड़ने की कोशिश बताते हुए कहा कि जब मामला अदालत में विचाराधीन है, तब इस तरह की फिल्म बनाना हालात को खराब करने की साज़िश है।
ममलूकुर्रहमान बर्क ने कहा कि देश को पीछे धकेला जा रहा है और नौजवानों को नफरत की आग में झोंककर उनका मुस्तकबिल बर्बाद किया जा रहा है। तालीम और आर्थिक हालात कमजोर किए जा रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि आज हालात ऐसे हैं कि बच्चों के भविष्य को लेकर खुद उनके माता-पिता सरकार के खिलाफ आवाज़ उठा रहे हैं। फिल्म ‘कल्कि सम्भल’ को लेकर उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि 1978 और 2024 की घटनाओं पर आधारित बताई जा रही यह फिल्म सौहार्द को नुकसान पहुंचाने का काम करेगी। “जो वाकया हो चुका है और अदालत में है, उसका फैसला कोर्ट करेगा या फिल्म?” यह सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा कि इस तरह की फिल्में हिंदू-मुसलमानों को लड़वाने का जरिया बन सकती हैं। बर्क ने ऐलान किया कि फिल्म निर्माताओं के खिलाफ अदालत का दरवाज़ा खटखटाया जाएगा।
1978 के दंगों को लेकर बर्क ने कहा कि उस समय डॉ. बर्क सम्भल में मौजूद ही नहीं थे, फिर भी उनका नाम जोड़ा जा रहा है। उन्होंने दावा किया कि 1978 की घटना की शुरुआत मुसलमानों ने नहीं की थी, बल्कि जामा मस्जिद में एक गैर-मुस्लिम द्वारा जबरन प्रवेश की कोशिश के दौरान इमाम साहब पर धारदार हथियार से हमला किया गया, जिसमें वे शहीद हो गए। उनकी कब्र आज भी जामा मस्जिद परिसर में मौजूद है। जियाउर्रहमान के संदर्भ में उन्होंने कहा कि वे उस दिन सम्भल में नहीं थे, बल्कि केरल में मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड की बैठक में शामिल थे इस बात का उल्लेख सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव भी कर चुके हैं।
बर्क ने सवाल किया कि ऐसी फिल्म बनाने की इजाज़त कौन दे रहा है और कहा कि जो भी इसकी अनुमति दे रहा है, वह अमन का दुश्मन है। डायरेक्टर द्वारा 1978 में हिंदुओं के उत्पीड़न के दावे पर प्रतिक्रिया देते हुए ममलूकुर्रहमान बर्क ने कहा, “प्रताड़ित किसने किया, कहाँ किया, इसका गवाह कौन है? सोशल मीडिया पर तो किसी की भी तस्वीर-आवाज़ बदलकर कुछ भी दिखा दिया जाता है। फिल्म बनाकर मनचाही कहानी गढ़ देने से हकीकत नहीं बदल जाती।” फिल्म को लेकर बढ़ते विवाद के बीच बर्क के इस बयान से सम्भल की सियासत और गरमा गई है, वहीं प्रशासन और अदालत की भूमिका पर भी सबकी नज़रें टिक गई हैं।
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बाइट - ममलूकुर्रहमान बर्क, सांसद पिता
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