Lucknow: भारतीय भाषा दिवस पर ग्रामीण क्षेत्र में गोष्ठी एवं कौशल प्रमाण पत्र वितरण आयोजित, मातृभाषा आधारित कौशल विकास को मिली नई दिशा।
लखनऊ के सरोजिनी नगर क्षेत्र के ग्राम खांडेदेव, बंथरा में भारतीय भाषा दिवस के अवसर पर जन शिक्षण संस्थान, लखनऊ (कौशल विकास एवं उद्यमशीलता
लखनऊ के सरोजिनी नगर क्षेत्र के ग्राम खांडेदेव, बंथरा में भारतीय भाषा दिवस के अवसर पर जन शिक्षण संस्थान, लखनऊ (कौशल विकास एवं उद्यमशीलता मंत्रालय, भारत सरकार), शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास (अवध प्रांत) तथा अवध चिकनकारी प्रोड्यूसर्स कंपनी लिमिटेड सोज़म डोजी के संयुक्त तत्वावधान में एक भव्य गोष्ठी एवं कौशल प्रमाण पत्र वितरण कार्यक्रम का सफल आयोजन किया गया। कार्यक्रम में ग्रामीण युवाओं, महिलाओं और स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने उत्साहपूर्वक प्रतिभाग किया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए जन शिक्षण संस्थान के निदेशक एवं संयोजक, आत्मनिर्भर भारत (शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास) अनिल श्रीवास्तव ने कहा कि भारतीय भाषाएँ हमारी पहचान, अभिव्यक्ति और आत्मनिर्भरता की मूल शक्ति हैं। उन्होंने मातृभाषा में कौशल प्रशिक्षण को आत्मनिर्भर भारत अभियान का प्रमुख आधार बताते हुए कहा कि स्थानीय भाषा में प्रशिक्षण से ग्रामीण युवाओं और महिलाओं की सीखने की क्षमता बढ़ती है और वे रोजगार के अवसरों से अधिक सुगमता से जुड़ पाते हैं।
कार्यक्रम के मुख्य वक्ता इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय (इग्नू) क्षेत्रीय केंद्र लखनऊ के निदेशक एवं संयोजक, पर्यावरण शिक्षा डॉ. कीर्ति विक्रम सिंह रहे। उन्होंने अपने उद्बोधन में कहा कि “भाषा संप्रेषण लोगों से जुड़ने का सबसे प्रभावी माध्यम है।” उन्होंने बताया कि भारतीय भाषाएँ केवल संवाद का तरीका नहीं, बल्कि हमारी सांस्कृतिक विरासत, ज्ञान परंपरा और सामाजिक विकास की रीढ़ हैं। ग्रामीण युवाओं के कौशल संवर्धन और स्थानीय आजीविका को मजबूत करने में भाषा-आधारित प्रशिक्षण को उन्होंने अपरिहार्य बताया।
कार्यक्रम में जन शिक्षण संस्थान द्वारा सीखो और कमाओ थीम पर आधारित ‘एक जनपद एक उत्पाद–चिकनकारी कौशल प्रशिक्षण’ की सफल प्रशिक्षार्थियों—ग्रामीण महिलाओं और किशोरियों—को प्रमाण पत्र वितरित किए गए। मास्टर ट्रेनर तनवीर फातिमा और विमलेश कुमारी ने महिलाओं को प्रशिक्षण से जुड़कर आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रेरित किया और बताया कि चिकनकारी प्रशिक्षण से महिलाएँ अपने घर पर ही आजीविका का स्थायी स्रोत विकसित कर सकती हैं।
कार्यक्रम संचालन जन शिक्षण संस्थान के कार्यक्रम अधिकारी पन्नालाल द्वारा किया गया। इस अवसर पर संस्थान के प्रशिक्षक, स्वयंसेवक एवं स्थानीय गणमान्य नागरिक बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। ग्रामीण प्रतिभागियों ने भारतीय भाषा दिवस के महत्व पर अपने विचार भी साझा किए।
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