सम्भल के ताइक्वांडो कोच मोहम्मद ताजवर: ताइक्वांडो के माध्यम से बच्चों को आत्मनिर्भर बना रहे ताजवर।

Sambhal: आज के दौर में खेल न केवल शारीरिक मजबूती प्रदान करते हैं बल्कि बच्चों को आत्मनिर्भर और आत्मविश्वासी बनाने में भी अहम भूमिका निभाते हैं। सम्भल

Aug 30, 2025 - 19:20
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सम्भल के ताइक्वांडो कोच मोहम्मद ताजवर: ताइक्वांडो के माध्यम से बच्चों को आत्मनिर्भर बना रहे ताजवर।
ताइक्वांडो के माध्यम से बच्चों को आत्मनिर्भर बना रहे ताजवर।

उवैस दानिश, सम्भल

Sambhal: आज के दौर में खेल न केवल शारीरिक मजबूती प्रदान करते हैं बल्कि बच्चों को आत्मनिर्भर और आत्मविश्वासी बनाने में भी अहम भूमिका निभाते हैं। सम्भल जिले के ताइक्वांडो कोच मोहम्मद ताजवर इसका जीता-जागता उदाहरण हैं। ताजवर खुद ब्लैक बेल्ट फॉर डन प्राप्त कर चुके हैं और अब तक जिला, प्रदेश, राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर 45 गोल्ड मेडल अपने नाम कर चुके हैं। इनमें से 20 गोल्ड मेडल जिला स्तर पर, 25 उत्तर प्रदेश स्तरीय प्रतियोगिताओं में, जबकि 5-5 गोल्ड मेडल राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में हासिल किए हैं।

ताजवर का ताइक्वांडो के प्रति जुनून वर्ष 2002 में शुरू हुआ। उस समय उन्होंने गुरु ज़ाकिर हुसैन और अपने सहयोगियों से मार्गदर्शन प्राप्त किया। आगे चलकर उन्होंने 2011 में अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय से बच्चों को ताइक्वांडो का प्रशिक्षण देना शुरू किया। निरंतर अभ्यास और मेहनत ने उन्हें इस खेल में नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया और बच्चों के लिए प्रेरणास्रोत बना दिया।

बच्चों के भविष्य को ध्यान में रखते हुए ताजवर ने 2024 में सम्भल में फ्लाइंग जोन इंटरनेशनल अकैडमी की स्थापना की। इस अकैडमी के जरिए वे बच्चों को न केवल ताइक्वांडो का प्रशिक्षण दे रहे हैं, बल्कि उनमें आत्मविश्वास और आत्मनिर्भरता की भावना भी पैदा कर रहे हैं। उनके मार्गदर्शन में प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे बच्चों ने अब तक विभिन्न स्तरों की प्रतियोगिताओं में 25 से अधिक गोल्ड मेडल जीते हैं। इनमें राष्ट्रीय स्तर पर भी कई उपलब्धियां दर्ज की गई हैं।

मोहम्मद ताजवर का कहना है कि ताइक्वांडो केवल एक खेल नहीं बल्कि आत्मरक्षा का सशक्त साधन है। उनका मानना है कि आज के दौर में हर बच्चे को आत्मनिर्भर होना चाहिए और इस दिशा में ताइक्वांडो एक प्रभावी माध्यम साबित हो सकता है। ताजवर बच्चों को यह संदेश देते हैं कि खेल को केवल शौक की तरह न लें बल्कि इसे जीवन का हिस्सा बनाकर आत्मविश्वास और अनुशासन की आदत डालें।

ताजवर के प्रयासों से सम्भल में खेल संस्कृति को नई पहचान मिल रही है। उनके शिष्य न केवल मेडल जीत रहे हैं बल्कि खेल की बदौलत शिक्षा और करियर के नए अवसर भी प्राप्त कर रहे हैं। निश्चित ही, ताजवर जैसे कोचों की मेहनत और समर्पण आने वाली पीढ़ी को मजबूत और आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

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