Sambhal: सम्भल की मुक्ति त्रिकाल सत्य है, मस्जिद हटेगी, मंदिर बनेगा, सुरेश चव्हाण का बड़ा दावा, हिंदू समन्वय समिति गठन का ऐलान।
सुरेश चव्हाण मौहल्ला कोट पूर्वी स्थित कल्कि मंदिर पहुंचे, जहां उन्होंने विधिवत दर्शन किए। दर्शन के उपरांत मंदिर परिसर में मौजूद लोगों से हरिहर मंदिर/जामा मस्जिद
रिपोर्ट- उवैस दानिश, सम्भल
शनिवार को सुरेश चव्हाण मौहल्ला कोट पूर्वी स्थित कल्कि मंदिर पहुंचे, जहां उन्होंने विधिवत दर्शन किए। दर्शन के उपरांत मंदिर परिसर में मौजूद लोगों से हरिहर मंदिर/जामा मस्जिद के मुद्दे पर विचार-विमर्श किया। इसके बाद शहर के एक गेस्ट हाउस में प्रेस वार्ता आयोजित की गई, जिसमें सुरेश चव्हाण ने अपने विचार खुलकर रखे।
प्रेस वार्ता में उन्होंने कहा कि वह यहां केवल एक मीडिया कर्मी के रूप में नहीं, बल्कि एक हिंदू के नाते आए हैं। उन्होंने दावा किया कि देशभर में चार लाख से अधिक मंदिरों को तोड़ा गया या उन पर कब्जा किया गया और उनकी मुक्ति का आंदोलन वह पिछले तीन दशकों से चला रहे हैं। इसी क्रम में वर्ष 2017 में सम्भल को लेकर भी आंदोलन किया गया था और तब भी उन्होंने कहा था कि यहां का मंदिर मुक्त होगा। सुरेश चव्हाण ने अयोध्या, काशी और मथुरा का जिक्र करते हुए कहा कि जैसे अयोध्या में राम मंदिर बना, काशी और मथुरा अंतिम चरण में हैं, वैसे ही देश के अन्य स्थानों पर भी मामले चल रहे हैं। उन्होंने कहा कि सम्भल से उनका पारिवारिक और ऐतिहासिक जुड़ाव है, क्योंकि मराठों के समय यहां उनकी छावनी रही और अहिल्याबाई होलकर द्वारा जीर्णोद्धार की प्रक्रिया में उनका परिवार शामिल रहा है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि कल्कि के आगमन स्थल पर स्थित मस्जिद हटेगी और वहां मंदिर बनेगा। इसे उन्होंने “त्रिकाल सत्य” बताते हुए कहा कि इसमें किसी भविष्यवाणी की आवश्यकता नहीं है, यह होकर रहेगा।
सुरेश चव्हाण ने सम्भल में सभी हिंदू संगठनों, संस्थाओं और व्यक्तियों को एक मंच पर लाने के लिए हिंदू समन्वय समिति के गठन का ऐलान किया। उन्होंने कहा कि इस समिति का एकमात्र एजेंडा सम्भल की मुक्ति का आंदोलन होगा। सुबह कल्कि मंदिर में इसकी बैठक हो चुकी है और हिंदू सम्मेलन में इसकी औपचारिक घोषणा की जाएगी। योगी सरकार को लेकर पूछे गए सवाल पर उन्होंने कहा कि वर्तमान सरकार हिंदुओं की आस्था और अधिकारों को पूरा करने वाली सरकार है। उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सराहना करते हुए कहा कि उनका मठ की परंपरा से जुड़ाव है और वह धर्म के लिए संघर्ष की भावना रखते हैं। साथ ही उन्होंने प्रशासन के कार्यों की भी प्रशंसा की। अंत में सुरेश चव्हाण ने सम्भल वासियों से अपील की कि उन्हें इस आंदोलन के लिए और अधिक उत्साह, आसक्ति और संघर्ष की मनोदशा के साथ आगे आना चाहिए। उन्होंने कहा, आप संघर्ष करिए, हम आपके साथ हैं।
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