मौत के मुंह से सुरक्षित बाहर निकले 232 यात्री, पायलट की सूझबूझ और इमरजेंसी इवैक्यूएशन से बची सैकड़ों जानें

विमान से सुरक्षित बाहर निकलने की इस जद्दोजहद के दौरान कुछ यात्री चोटिल भी हुए हैं। रिपोर्ट के अनुसार, कुल 6 यात्री ऐसे हैं जिन्हें इमरजेंसी स्लाइड के माध्यम से उतरते समय अलग-अलग तरह की चोटें आई हैं। इनमें से कुछ यात्रि

Apr 26, 2026 - 11:58
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मौत के मुंह से सुरक्षित बाहर निकले 232 यात्री, पायलट की सूझबूझ और इमरजेंसी इवैक्यूएशन से बची सैकड़ों जानें
मौत के मुंह से सुरक्षित बाहर निकले 232 यात्री, पायलट की सूझबूझ और इमरजेंसी इवैक्यूएशन से बची सैकड़ों जानें
  • आईजीआई एयरपोर्ट पर बड़ा विमान हादसा टला: टेक-ऑफ के दौरान स्विस एयर के विमान के इंजन में लगी आग
  • रनवे नंबर 28 पर खौफनाक मंजर: इंजन से उठी आग की लपटों के बाद मची अफरा-तफरी, घायल यात्री मेदांता अस्पताल में भर्ती

दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर शनिवार की देर रात एक बड़ी विमान दुर्घटना होते-होते रह गई। यह घटना उस समय हुई जब स्विस इंटरनेशनल एयर लाइन्स की उड़ान संख्या LX147 ज्यूरिख के लिए उड़ान भरने की तैयारी कर रही थी। प्रत्यक्षदर्शियों और तकनीकी रिपोर्टों के अनुसार, जब एयरबस A330 (रजिस्ट्रेशन HB-JHK) रनवे पर तेजी से दौड़ रहा था, तभी अचानक विमान के इंजन नंबर 1 में भयानक तकनीकी खराबी आई और वहां से आग की लपटें उठने लगीं। विमान के भीतर मौजूद 232 यात्रियों और चालक दल के सदस्यों के लिए यह किसी भयावह सपने से कम नहीं था। पायलट ने इंजन में आग के संकेतों को भांपते हुए तुरंत 'फुल इमरजेंसी' घोषित की और टेक-ऑफ की प्रक्रिया को बीच में ही रोक दिया। इस त्वरित प्रतिक्रिया ने एक बड़े विस्फोट की आशंका को टाल दिया, जिससे विमान में सवार सभी लोगों की जान बच गई।

तकनीकी आंकड़ों के अनुसार, जिस समय इंजन में आग लगी और पायलट ने ब्रेक लगाया, उस समय विमान की गति लगभग 104 समुद्री मील (Knots) तक पहुंच चुकी थी। यह गति विमान के उड़ान भरने के बेहद करीब होती है, जिससे स्थिति और भी संवेदनशील हो गई थी। पायलट ने बिना समय गंवाए 'रिजेक्टेड टेक-ऑफ' (RTO) प्रोटोकॉल को लागू किया और भारी विमान को रनवे पर ही स्थिर कर दिया। जैसे ही विमान रुका, सुरक्षा मानकों का पालन करते हुए इमरजेंसी स्लाइड (Inflatable Slides) खोल दी गईं। यात्रियों को बिना सामान के तुरंत विमान से बाहर निकलने के निर्देश दिए गए। रात के सन्नाटे में एयरपोर्ट के रनवे पर नारंगी रंग की आग की लपटों और बचाव दल की सायरन की आवाजों ने पूरे इलाके में दहशत का माहौल पैदा कर दिया था। विमान से सुरक्षित बाहर निकलने की इस जद्दोजहद के दौरान कुछ यात्री चोटिल भी हुए हैं। रिपोर्ट के अनुसार, कुल 6 यात्री ऐसे हैं जिन्हें इमरजेंसी स्लाइड के माध्यम से उतरते समय अलग-अलग तरह की चोटें आई हैं। इनमें से कुछ यात्रियों के हाथ-पैर में फ्रैक्चर और गंभीर खरोंचें आई हैं, जिन्हें तुरंत एयरपोर्ट की मेडिकल टीम ने प्राथमिक उपचार दिया। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए, इन सभी घायलों को गुरुग्राम स्थित मेदांता अस्पताल में स्थानांतरित कर दिया गया है, जहां उनकी स्थिति अब स्थिर बताई जा रही है। सुरक्षा अधिकारियों ने पुष्टि की है कि बाकी सभी 226 यात्री और चालक दल के सदस्य पूरी तरह सुरक्षित हैं और उन्हें टर्मिनल भवन में ले जाया गया है, जहां उनकी काउंसलिंग और खान-पान की व्यवस्था की गई।

रनवे 28 पर परिचालन ठप

इस हादसे के बाद आईजीआई एयरपोर्ट के रनवे संख्या 28 को अनिश्चित काल के लिए बंद कर दिया गया है। क्षतिग्रस्त विमान अभी भी रनवे पर मौजूद है और जब तक तकनीकी विशेषज्ञों की टीम उसकी जांच पूरी नहीं कर लेती और उसे वहां से हटाया नहीं जाता, तब तक इस रनवे से किसी भी विमान का आवागमन संभव नहीं होगा। रनवे बंद होने के कारण दिल्ली आने और जाने वाली कई अन्य अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के समय में भी बदलाव किया गया है।

स्विस एयर ने इस घटना पर आधिकारिक बयान जारी करते हुए यात्रियों की सुरक्षा के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई है। एयरलाइन ने प्रभावित यात्रियों की सहायता के लिए एक विशेष टास्क फोर्स तैनात की है, जो होटल आवास, भोजन और दूसरी वैकल्पिक उड़ानों के जरिए यात्रियों को उनके गंतव्य तक पहुंचाने का काम कर रही है। एयरलाइन की तकनीकी विशेषज्ञों की एक टीम स्विट्जरलैंड से भी दिल्ली के लिए रवाना हो चुकी है, जो इंजन में लगी आग के मूल कारणों की गहनता से जांच करेगी। प्राथमिक जांच में इसे एक गंभीर इंजन विफलता माना जा रहा है, लेकिन आग लगने का सटीक कारण ब्लैक बॉक्स और फ्लाइट डेटा रिकॉर्डर के विश्लेषण के बाद ही स्पष्ट हो पाएगा। एयरपोर्ट प्रशासन और नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) ने इस घटना की उच्च स्तरीय जांच के आदेश दिए हैं। एयरपोर्ट फायर सर्विसेज (AFS) ने समय रहते रनवे पर पहुंचकर आग को बुझा दिया और विमान के ईंधन टैंक तक लपटों को पहुंचने से रोक लिया। यात्रियों ने बताया कि विमान के भीतर अचानक धुआं भरने लगा था और केबिन क्रू के निर्देश मिलते ही वे बिना कुछ सोचे-समझे स्लाइड्स की ओर भागे। यह घटना एक बार फिर विमानन सुरक्षा के कड़े मानकों और पायलटों के प्रशिक्षण की महत्ता को दर्शाती है, जिनकी तत्परता ने 232 जिंदगियों को खाक होने से बचा लिया। वर्तमान में एयरपोर्ट के अन्य रनवे से उड़ानों का संचालन जारी है, लेकिन यात्रियों को उड़ान की ताजा स्थिति जांचने की सलाह दी गई है।

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