Deoband : निजी जगह पर धार्मिक इबादत या कार्यक्रम से संबंधित हाईकोर्ट का फैसला स्वागत योग्य- मदनी
मौलाना मदनी ने कहा कि यह फैसला भारत के संविधान के अनुच्छेद 25 के तहत मिली धार्मिक आजादी की पुष्टि करता है। मौलाना महमूद मदनी ने बुधवार को जारी बयान में कहा कि हाल के दिनों
जमीयत अध्यक्ष बोले: फैसले के बाद गैर सांविधानिक कार्रवाई और इबादत में रुकावट नहीं डालेगी यूपी पुलिस
देवबंद। जमीयत उलमा-ए-हिंद के अध्यक्ष मौलाना महमूद असद मदनी ने निजी जमीन पर धार्मिक इबादत या कार्यक्रम से संबंधित इलाहाबाद हाईकोर्ट के हालिया फैसले का स्वागत किया है। मौलाना मदनी ने कहा कि यह फैसला भारत के संविधान के अनुच्छेद 25 के तहत मिली धार्मिक आजादी की पुष्टि करता है।
मौलाना महमूद मदनी ने बुधवार को जारी बयान में कहा कि हाल के दिनों में देश के अलग-अलग हिस्सों विशेष रुप से उत्तर प्रदेश में केवल नमाज पढ़ने या दूसरे धार्मिक आयोजनों पर एफआईआर दर्ज की गईं, गिरफ्तारियां की गईं और धार्मिक इबादत को अकारण ही कानून-व्यवस्था का मुद्दा बनाकर प्रस्तुत किया गया। उन्होंने कहा कि देर आए दुरुस्त आए की तरह इलाहाबाद हाईकोर्ट का यह फैसला अब बहुत स्पष्ट सांविधानिक दिशा-निर्देश प्रदान करता है और ऐसी सभी कार्रवाइयों के खिलाफ एक कठोर सांविधानिक चेतावनी है कि मौलिक अधिकारों को प्रशासन के विवेक के अंतर्गत सीमित नहीं किया जा सकता।
साथ ही संविधान नागरिकों को इबादत (पूजा-पाठ) का अधिकार देता है, जिसे राज्य अपनी मर्जी से न छीन सकता और न हो रोक सकता है। मौलाना महमूद मदनी ने कहा कि पवित्र रमजान का महीना करीब है और इस महीने में विशेष रुप से तरावीह और अन्य इबादतों का आयोजन किया जाता है। इस निर्णय के बाद उम्मीद है कि पिछले रमजान की तरह उत्तर प्रदेश पुलिस इस तरह की गैर सांविधानिक कार्रवाइयों से बचेगी और लोगों की इबादत में रुकावट नहीं डालेगी। उन्होंने सभी जिम्मेदार लोगों से हाईकोर्ट की कॉपी अपने पास सुरक्षित रखने का आह्वान किया। इसके साथ ही मौलाना महमूद मदनी ने चेतावनी अगर न्यायालय के फैसलों के बावजूद नागरिकों की धार्मिक आजादी, विशेषकर इबादत पर रोक लगाई गई तो सांविधानिक और कानूनी रास्ता अपनाने से भविष्य में भी जरा भी हिचकिचाया नहीं जाएगा।
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