Deoband : अदालत ने पुलिस विवेचक की मनमानी पर लगाई फटकार, एसएसपी से मांगा स्पष्टीकरण
अदालत ने फटकार लगाते हुए कहा कि जांच में सीसीटीवी फुटेज में क्या साक्ष्य मिले, मेडिकल रिपोर्ट में कौन सी चोटें पाई गईं, साक्षियों के बयानों में क्या तथ्य आए और किन बयानों पर विश्वा
देवबंद की एडीजे विनित वासवानी की अदालत ने पुलिस की जांच में मनमानी पर कड़ी फटकार लगाई है। अदालत ने इसे हाईकोर्ट के आदेशों की अवहेलना माना। विवेचक ने बिना ठोस तथ्य या साक्ष्य बताए धाराएं बढ़ाई-घटाईं। अदालत ने एसएसपी सहारनपुर को निर्देश दिए कि वे विवेचक और क्षेत्राधिकारी से स्पष्टीकरण लेकर अदालत में जमा करें। आदेश की प्रतियां डीजीपी उत्तर प्रदेश, एसएसपी सहारनपुर और जिला जज सहारनपुर को भेजी गई हैं।
कोतवाली देवबंद में गांव फुलास अकबरपुर निवासी अभियुक्त इखलाख, अब्दुर्रहमान, तनवीर, असद, फारूख, सुहैल, रिहान और उवैस के खिलाफ धारा 191(2), 352, 115(2), 351(3) बीएनएस का मुकदमा दर्ज हुआ था। जांच के दौरान विवेचक ने धारा 109(1) बीएनएस जोड़ी। बाद में तनवीर, सुहैल और रिहान को नाम से अलग किया गया क्योंकि उनकी नामजदगी गलत पाई गई। उवैस की मौत हो जाने से उसका नाम हटा दिया गया। धारा 109(1) और 191(2) हटाकर धारा 110 बीएनएस जोड़ी गई। आरोप पत्र में धारा 110, 352, 115(2), 351(3) बीएनएस के तहत इखलाख, अब्दुर्रहमान, असद और फारूख के खिलाफ अदालत में भेजा गया। वादी महताब अहमद ने प्रार्थना पत्र देकर मांग की कि धारा 352, 115(2), 351(3) के साथ धारा 109(1) बीएनएस भी लगाई जाए। वादी ने बताया कि विवेचक ने बिना साक्ष्य या कारण के धारा 109(1) हटा दी और धारा 110 जोड़ दी। आरोप पत्र में यह विधिवत लिखा गया लेकिन साक्ष्य का जिक्र नहीं किया। अदालत ने इसे विवेचक की बड़ी गलती बताया।
अदालत ने फटकार लगाते हुए कहा कि जांच में सीसीटीवी फुटेज में क्या साक्ष्य मिले, मेडिकल रिपोर्ट में कौन सी चोटें पाई गईं, साक्षियों के बयानों में क्या तथ्य आए और किन बयानों पर विश्वास या अविश्वास किया गया, यह विवेचना में नहीं लिखा गया। रूटीन तरीके से जांच की गई। बिना तथ्यों की समीक्षा के धाराएं हटाई-जोड़ी गईं और अभियुक्तों के नाम अलग किए गए। यह हाईकोर्ट, सुप्रीम कोर्ट और डीजीपी उत्तर प्रदेश के आदेशों का उल्लंघन है। ऐसे में अनुशासनात्मक कार्रवाई होनी चाहिए।nकार्यालय लिपिक अंकित कुमार को चेतावनी दी गई कि आदेश का पालन करते हुए साक्ष्य पत्रावली पर उपलब्ध कराएं, अन्यथा उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई होगी।
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