Lucknow: उद्यान मंत्री दिनेश प्रताप सिंह ने एक दिवसीय मौनपालन प्रशिक्षण कार्यक्रम का किया शुभारंभ, प्रगतिशील मधुमक्खी पालकों को प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित। 

प्रदेश में शहद उत्पादन को प्रोत्साहित करने, शहद की गुणवत्ता में सुधार लाने तथा मौनपालकों को आधुनिक तकनीकों से जोड़ने के उद्देश्य से आज उद्यान

Jan 7, 2026 - 20:47
53 Views
Lucknow: उद्यान मंत्री दिनेश प्रताप सिंह ने एक दिवसीय मौनपालन प्रशिक्षण कार्यक्रम का किया शुभारंभ, प्रगतिशील मधुमक्खी पालकों को प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित। 
उद्यान मंत्री दिनेश प्रताप सिंह ने एक दिवसीय मौनपालन प्रशिक्षण कार्यक्रम का किया शुभारंभ, प्रगतिशील मधुमक्खी पालकों को प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित। 

लखनऊ: प्रदेश में शहद उत्पादन को प्रोत्साहित करने, शहद की गुणवत्ता में सुधार लाने तथा मौनपालकों को आधुनिक तकनीकों से जोड़ने के उद्देश्य से आज उद्यान निदेशालय के प्रेक्षागृह, लखनऊ में “एक दिवसीय मौनपालन प्रशिक्षण कार्यक्रम” का आयोजन किया गया।

कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि, प्रदेश के उद्यान, कृषि विपणन, कृषि विदेश व्यापार एवं कृषि निर्यात राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) दिनेश प्रताप सिंह द्वारा दीप प्रज्वलन कर किया गया। अपने संबोधन में उद्यान मंत्री ने कहा कि मधुमक्खी पालन केवल शहद उत्पादन का माध्यम नहीं है, बल्कि यह किसानों की आय में वृद्धि, पर्यावरण संरक्षण तथा फसलों के परागण के माध्यम से कृषि उत्पादकता बढ़ाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश शहद उत्पादन के क्षेत्र में देश के अग्रणी राज्यों में शामिल है, लेकिन अभी तक प्रदेश के शहद को वह पहचान नहीं मिल पाई है, जिसकी वह वास्तविकता में क्षमता रखता है। मंत्री ने कहा कि प्रदेश से बाहर जाने वाला शहद विभिन्न नामों से विक्रय किया जाता है, जिससे उत्तर प्रदेश के शहद की विशिष्ट पहचान नहीं बन पाती। इस स्थिति को बदलने के लिए उन्होंने उत्तर प्रदेश के शहद को “काशी शहद” के नाम से ब्रांडिंग करने का आह्वान किया, ताकि प्रदेश के शहद को राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय बाजार में नई पहचान मिल सके और किसानों को बेहतर मूल्य प्राप्त हो।

उद्यान मंत्री ने कहा कि मूल्य संवर्द्धन और ब्रांड निर्माण से ही किसानों की आय में वास्तविक वृद्धि संभव है। उन्होंने बताया कि अंतर्राष्ट्रीय बाजार में गुणवत्ता, पैकेजिंग और ब्रांडिंग का विशेष महत्व है, जिस दिशा में प्रदेश सरकार सुनियोजित ढंग से कार्य कर रही है।

कार्यक्रम की अध्यक्षता अपर मुख्य सचिव, उद्यान एवं खाद्य प्रसंस्करण विभाग बी.एल. मीणा ने की। उन्होंने विभागीय योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन पर जोर देते हुए कहा कि मौनपालन को एक संगठित, वैज्ञानिक और लाभकारी व्यवसाय के रूप में विकसित करने के लिए प्रशिक्षण, तकनीकी सहयोग और विपणन तंत्र को मजबूत किया जा रहा है।

इससे पूर्व उद्यान विभाग के निदेशक भानु प्रकाश राम ने कार्यक्रम का संक्षिप्त परिचय देते हुए प्रदेश में उद्यान विकास, मौनपालन की वर्तमान स्थिति तथा भविष्य की संभावनाओं पर प्रकाश डाला।

प्रशिक्षण सत्र के मुख्य वक्ता के रूप में केन्द्रीय मधुमक्खी अनुसंधान एवं प्रशिक्षण संस्थान (सीबीआरटीआई), पुणे, महाराष्ट्र से आए विशेषज्ञ सरविन सिंह तरार ने मौनपालकों को वैज्ञानिक पद्धति से मधुमक्खी पालन, मधुमक्खियों के रखरखाव, रोग प्रबंधन, उच्च गुणवत्ता वाले शहद उत्पादन, प्रसंस्करण एवं विपणन से संबंधित विस्तृत तकनीकी जानकारी प्रदान की।

इस अवसर पर मौनपालन के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वाले प्रदेश के 06 प्रगतिशील मौनपालकों को माननीय मंत्री द्वारा प्रशस्ति पत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया। सम्मानित मौनपालकों में राजू सिंह (गोरखपुर), संजीव कुमार तोमर (गाजियाबाद), निमित सिंह (बाराबंकी), सुनील कुमार अहलावत (मेरठ), ओम प्रकाश मौर्य (हरदोई) तथा बृजेश कुमार वर्मा (लखनऊ) शामिल रहे। सम्मान समारोह के उपरांत इन प्रगतिशील मौनपालकों ने अपने अनुभव साझा कर अन्य मौनपालकों को प्रेरित किया।

इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में प्रदेश के विभिन्न जनपदों से आए लगभग 200 मौनपालकों के साथ-साथ जनपदीय उद्यान अधिकारियों ने भी उत्साहपूर्वक सहभागिता की। कार्यक्रम में हाफेड के चेयरमैन नवलेश प्रताप सिंह, वित्त नियंत्रक अनिल कुमार सिंह, संयुक्त निदेशक डॉ. सर्वेश कुमार, संयुक्त निदेशक डॉ. राजीव कुमार वर्मा सहित अन्य विभागीय अधिकारी उपस्थित रहे।

Also Read- Lucknow: गांव में स्ट्रॉबेरी, ड्रैगनफ्रूट और रागी से तीन लाख तक कमा रहीं इटावा की मंत्रवती शाक्य।

What's Your Reaction?

like

dislike

love

funny

angry

sad

wow