Lucknow : विश्व मृदा दिवस पर कृषि मंत्री ने की ‘धरती माता बचाओ अभियान’ की शुरुआत

उत्तर प्रदेश के कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही द्वारा ‘विश्व मृदा दिवस’ (05 दिसम्बर) के अवसर पर प्रदेश के किसानों और वैज्ञानिकों से स्वस्थ, लचीले और टिकाऊ कृषि के निर्मा

Dec 5, 2025 - 23:32
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Lucknow : विश्व मृदा दिवस पर कृषि मंत्री ने की ‘धरती माता बचाओ अभियान’ की शुरुआत
Lucknow : विश्व मृदा दिवस पर कृषि मंत्री ने की ‘धरती माता बचाओ अभियान’ की शुरुआत

  • उत्तर प्रदेश में 4 करोड़ 7 लाख किसानों को निःशुल्क मृदा स्वास्थ्य कार्ड प्रदान किए गए
  • मृदा के गिरते स्वास्थ्य को ठीक करने के लिए एक लाख क्विंटल हरी खाद बीज वितरण का लक्ष्य

लखनऊ : उत्तर प्रदेश के कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही द्वारा ‘विश्व मृदा दिवस’ (05 दिसम्बर) के अवसर पर प्रदेश के किसानों और वैज्ञानिकों से स्वस्थ, लचीले और टिकाऊ कृषि के निर्माण के लिए एकजुट होकर कार्य करने का आह्वान किया गया। स्वस्थ जीवन के लिए स्वस्थ मृदा के महत्व पर प्रकाश डालते हुए मंत्री जी ने कहा कि यदि मिट्टी के क्षरण की रफ्तार यही रही तो 2050 तक धरती के हरियाली का परिदृश्य बहुत बदल जाएगा, इसलिए हमें पृथ्वी के प्रति अपना कर्तव्य निभाते हुए उसकी रक्षा करनी होगी। इस संदर्भ में उन्होंने सभी को ‘माता भूमिः पुत्रो´हं पृथ्विया’ का ध्यान आकर्षित किया। उन्होंने कहा कि यह पृथ्वी और मानव के बीच गहरे संबंध को दर्शाता है तथा प्रकृति के प्रति सम्मान और कर्तव्य की भावना जागृत करता है।
प्रदेश में भारत सरकार द्वारा संचालित मृदा स्वास्थ्य कार्ड योजना वर्ष 2015 से क्रियान्वित है। योजना के प्रथम चरण (2015 से 2021) में कृषिगत क्षेत्रफल में ग्रिड के आधार पर 3.77 करोड़ कृषकों को निःशुल्क मृदा स्वास्थ्य कार्ड उपलब्ध कराए गए, जबकि योजना में परिवर्तन के उपरांत वर्ष 2022 से 2025 तक चयनित ग्राम पंचायतों में रैण्डम आधार पर 30.6 लाख कृषकों को कार्ड प्रदान किए गए हैं। इस प्रकार, वर्ष 2015 से खरीफ 2025 तक कुल 4 करोड़ 7 लाख कृषकों को निःशुल्क मृदा स्वास्थ्य कार्ड उपलब्ध कराए गए हैं। इसके अलावा, प्रदेश में कुल 260 मृदा परीक्षण प्रयोगशालाएं संचालित हैं जिनमें 179 तहसील स्तरीय, 75 जनपद स्तरीय और 06 शोध केन्द्रों पर 878 संविदा और 525 राजकीय कार्मिकों द्वारा मृदा परीक्षण का कार्य किया जा रहा है। भारत सरकार के निर्देशानुसार 75 जनपदीय प्रयोगशालाओं के सापेक्ष 59 को 12 पैरामीटर पर परीक्षण करने हेतु एन०ए०बी०एल० द्वारा प्रमाण-पत्र प्राप्त हो चुके हैं, जो गुणवत्ता के प्रति विभाग की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। उन्होंने किसानों से आह्वान किया कि खेत में उतनी मात्रा में ही खाद, पानी का उपयोग किया जाए जितना आवश्यक है। साथ ही गौ-आधारित प्राकृतिक खेती को अपनाएं, जिससे आने वाली पीढ़ियों को स्वस्थ धरती सौंपी जा सके।मृदा स्वास्थ्य स्तर के तुलनात्मक परिदृश्य के अनुसार, वर्ष 2017-2019 की अपेक्षा वर्ष 2023-2025 में जीवांश कार्बन, नत्रजन एवं बोरान की उपलब्धता प्रतिशत स्तर में धनात्मक वृद्धि परिलक्षित हो रही है। हालांकि, मंत्री जी ने इस बात पर चिंता व्यक्त की कि मृदा में जिंक, आयरन एवं मैगनीज जैसे सूक्ष्म पोषक तत्वों की कमी भी परिलक्षित हो रही है। इस समस्या के समाधान हेतु, मिट्टी को फिर से सजीव करने और उसकी उपजाऊ शक्ति को कम होने से बचाने के लिए युद्धस्तर पर कार्य किया जा रहा है। प्रथम चरण में 20 हज़ार कुन्तल मिश्रित हरी खाद के बीज की किट एवं 80 हज़ार कुन्तल हरी खाद हेतु ढैंचा बीज का वितरण करने का लक्ष्य प्रस्तावित है, जिससे कुल 01 लाख कुन्तल हरी खाद बीज का वितरण होगा। साथ ही, पी०एम० प्रणाम योजना और धरती माता बचाओ अभियान का क्रियान्वयन करते हुए किसानों को जिप्सम, जैव उर्वरक, एफ०ओ०एम० एवं कार्बानिक खादों के प्रयोग हेतु जागरूक किया जा रहा है।
मंत्री जी ने कहा कि उपजाऊ मिट्टी जीवन और जल दोनों का आधार है, लेकिन आई०आई०टी० दिल्ली के 2024 के एक अध्ययन के अनुसार देश की 30 प्रतिशत भूभाग में मिट्टी की उर्वरक शक्ति घट रही है, जो भविष्य की खाद्यान्न सुरक्षा के लिए एक गंभीर संकट है। उन्होंने किसानों से टिकाऊ भूमि प्रबंधन (मेड़, बांध), कम्पोस्ट का बेहतर प्रयोग, प्राकृतिक खेती, मल्चिंग एवं माइको स्प्रिंकलर तकनीकी को अपनाने तथा रासायनिक उर्वरकों के पर्णीय छिड़काव का अधिक से अधिक प्रयोग करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि यह सिर्फ पर्यावरण का नहीं बल्कि आने वाली पीढ़ियों के पोषण का सवाल है।
मा. राज्य कषि मंत्री बलदेव सिंह औलख जी ने कार्यशाला में कृषकों से मृदा में जीवांश कार्बन बढ़ाने हेत काबर्निक खादों के प्रयोग करने एवं हरी खाद का प्रयोग करने को कहा।
कार्यशाला में बांदा, झॉसी कृषि विश्वविद्यालयों द्वारा मृदा स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता हेतु मॉडलों का निर्माण किया तथा मृदा के विभिन्न पहलुओं पर ध्यान आकर्षित करने हेतु कृषकों को जागरूक करने का प्रयास किया। कार्यशाला में मृदा परीक्षण के सजीव प्रदर्शन भी कराया गया। जिसको लेकर कृषकों एवं अधिकारियों में काफी उत्साह रहा। क्षेत्रीय मृदा परीक्षण प्रयोगशाला, लखनऊ मण्डल लखनऊ गंगा सेल कृषि भवन लखनऊ द्वारा विभागीय स्टॉल लगाकार कृषकों को जागरूक किया गया।
मृदा स्वास्थ्य एवं प्रबन्धन विषय पर प्रतियोगिता आयोजित की गयी, जिसमें अमन दुमका, रानी लक्ष्मी बाई, केन्द्रीय कृषि विश्वविद्यालय, झॉसी कृष्णा नन्द यादव, बॉदा कृषि एवं प्रद्योगिकी विश्वविद्यालय, बांदा अमन थापा, पी०एम०केन्द्रीय विद्यालय, ए०एम०सी0, बिजनौर लखनऊ, गोविन्द प्रसाद रौनियार को पुरस्कृत किया गया। साथ ही डा० अभिषेक कुमार, अनुत प्रोहित डा० आशुतोष गुप्ता, आसिफ रियाज, निखिल यादव को भी उत्कृष्ट मॉडल एवं स्टॉल लगाने के लिए सम्मानित किया गया।
कार्यक्रम में प्रमुख सचिव कृषि रवींद्र द्वारा लगातार छोटी हो रही कृषि जोतों, मृदा एवं जल प्रदूषण के साथ-साथ खराब हो रहे मृदा के स्वास्थ्य विषय पर कृषकों को जागरूक करते हुए सचेत किया कि कृषकों द्वारा किसी भी दशा में फसल अवशेष नहीं जलाने चाहिए तथा मृदा में सन्तुलित उर्वरकों का प्रयोग करके एक तरफ मृदा स्वास्थ्य अच्छा रहेगा। वहीं उत्पादन भी अच्छा प्राप्त करने की अपील किसानों से की। कार्यशाला में वैज्ञानिकों द्वारा बताई गयी महत्वपूर्ण जानकारियों को घर जाकर 5 से 6 लोगों को भी जागरूक करने की अपील की। आगे कार्यकम में कैप्टन विकास गुप्ता ने धरती माता बचाओ अभियान के अन्तर्गत मृदा संरक्षित किये जाने की अपील किसानों से की।
इस अवसर पर वरिष्ठ मृदा वैज्ञानिक डा० के० एन० तिवारी, जवाहर लाल नेहरू अवार्डी, डॉ० एस० के० झा0, वरिष्ठ सलाहकार नमामि गंगे, डॉ० सी०पी० श्रीवास्तव, कृषि निदेशक उत्तर प्रदेश डॉ० पंकज त्रिपाठी. समस्त अपर कृषि निदेशक, संयुक्त कृषि निदेशक, कृषि भवन लखनऊ संयुक्त कषि निदेशक, लखनऊ मण्डल लखनऊ एवं समस्त अन्य अधिकारियों एवं कर्मचारियों के साथ-साथ कृषि विश्वविद्यालयों, बॉदा, झॉसी, प्रयागराज, पी०एम०केन्द्रीय विद्यालय सी०आर०पी०एफ० बिजनौर लखनऊ, पी०एम०केन्द्रीय विद्यालय, ए०एम०सी०, बिजनौर लखनऊ के छात्रों द्वारा मृदा स्वास्थ्य दिवस के अवसर पर मृदा स्वास्थ्य से सम्बन्धित विभिन्न विषयों पर विशिष्ट प्रस्तुतियां दी गई। वही प्रदेश भर से आये लगभग 338 जागरूक एवं प्रगतिशील कृषकों, 182 तहसीलों से आये तकनीकी सहायकों द्वारा कार्यशाला में प्रतिभाग किया गया।

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