पीएम मोदी की तीन देशों की ऐतिहासिक यात्रा: साइप्रस, कनाडा और क्रोएशिया दौरा, G-7 शिखर सम्मेलन में करेंगे शिरकत।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी रविवार को साइप्रस, कनाडा और क्रोएशिया की पांच दिवसीय विदेश यात्रा पर रवाना हो गए। यह यात्रा न केवल भारत...
नई दिल्ली : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी रविवार को साइप्रस, कनाडा और क्रोएशिया की पांच दिवसीय विदेश यात्रा पर रवाना हो गए। यह यात्रा न केवल भारत की कूटनीतिक पहल को मजबूती प्रदान करेगी, बल्कि वैश्विक मंच पर भारत की स्थिति को और सशक्त करेगी। इस दौरान पीएम मोदी कनाडा के कनानास्किस में 16-17 जून को आयोजित होने वाले G-7 शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेंगे, जो उनकी छठी लगातार भागीदारी होगी। यह यात्रा भारत के ऑपरेशन सिंदूर के बाद उनकी पहली विदेश यात्रा है, जिसके तहत अप्रैल 2025 में जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के जवाब में पाकिस्तान में आतंकी ठिकानों पर सटीक हमले किए गए थे। यह दौरा भारत के वैश्विक कद, आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई और यूरोपीय संघ (ईयू) के साथ संबंधों को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
- यात्रा का विस्तृत विवरण
प्रधानमंत्री मोदी की यह तीन देशों की यात्रा 15 से 19 जून तक चलेगी। विदेश मंत्रालय (एमईए) के अनुसार, पीएम मोदी सबसे पहले साइप्रस जाएंगे, फिर कनाडा में G-7 शिखर सम्मेलन में शामिल होंगे, और अंत में क्रोएशिया का दौरा करेंगे। प्रत्येक देश में उनकी यात्रा का विशेष महत्व है, जो भारत की विदेश नीति और वैश्विक रणनीति को दर्शाता है।
- साइप्रस: 23 साल बाद भारतीय पीएम की यात्रा
पीएम मोदी 15-16 जून को साइप्रस की आधिकारिक यात्रा पर होंगे, जो 23 साल बाद किसी भारतीय प्रधानमंत्री की पहली यात्रा होगी। इससे पहले, 2002 में तत्कालीन पीएम अटल बिहारी वाजपेयी ने साइप्रस का दौरा किया था। साइप्रस के राष्ट्रपति निकोस क्रिस्टोडौलिदेस के निमंत्रण पर हो रही इस यात्रा में पीएम मोदी निकोसिया में उनके साथ द्विपक्षीय वार्ता करेंगे और लिमासोल में व्यापारिक नेताओं को संबोधित करेंगे।
साइप्रस भारत के लिए रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है, खासकर भारत-मध्य पूर्व-यूरोप आर्थिक गलियारा (आईएमईसी) के संदर्भ में, जिसे 2023 में नई दिल्ली में G-20 शिखर सम्मेलन के दौरान लॉन्च किया गया था। साइप्रस की भौगोलिक स्थिति और समुद्री कनेक्टिविटी इसे आईएमईसी का संभावित केंद्र बनाती है। इसके अलावा, साइप्रस ने कश्मीर मुद्दे, पाकिस्तान से होने वाले सीमा पार आतंकवाद और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत की स्थायी सीट की दावेदारी पर लगातार समर्थन किया है। भारत ने भी साइप्रस के क्षेत्रीय विवाद को संयुक्त राष्ट्र प्रस्तावों और अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुसार हल करने का समर्थन किया है। यह यात्रा 2026 में साइप्रस के यूरोपीय संघ परिषद की अध्यक्षता ग्रहण करने से पहले भारत-ईयू सहयोग को गहरा करने का अवसर प्रदान करेगी।
- कनाडा: G-7 शिखर सम्मेलन और भारत-कनाडा संबंधों में नई शुरुआत
यात्रा के दूसरे चरण में, पीएम मोदी 16-17 जून को कनाडा के कनानास्किस में G-7 शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेंगे। यह उनकी छठी लगातार भागीदारी है, जो भारत के बढ़ते वैश्विक कद को दर्शाती है। कनाडा के नए प्रधानमंत्री मार्क कार्नी के निमंत्रण पर हो रही इस यात्रा में पीएम मोदी G-7 देशों (कनाडा, फ्रांस, जर्मनी, इटली, जापान, अमेरिका, ब्रिटेन) और अन्य आमंत्रित देशों के नेताओं के साथ वैश्विक मुद्दों पर चर्चा करेंगे। चर्चा के प्रमुख विषयों में ऊर्जा सुरक्षा, प्रौद्योगिकी, नवाचार, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) और क्वांटम प्रौद्योगिकी शामिल होंगे।
यह यात्रा भारत-कनाडा संबंधों के लिए भी महत्वपूर्ण है, जो पिछले डेढ़ साल से खालिस्तानी अलगाववादी हरदीप सिंह निज्जर की हत्या के मुद्दे पर तनावपूर्ण रहे हैं। 2023 में तत्कालीन कनाडाई पीएम जस्टिन ट्रूडो ने निज्जर की हत्या में भारतीय एजेंटों की संभावित संलिप्तता का आरोप लगाया था, जिसे भारत ने “बेतुका” करार दिया था। मार्क कार्नी के नेतृत्व में कनाडा अब द्विपक्षीय संबंधों को रीसेट करने की दिशा में कदम उठा रहा है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा, “भारत और कनाडा जीवंत लोकतंत्र हैं, जो साझा लोकतांत्रिक मूल्यों और कानून के शासन के प्रति प्रतिबद्धता से बंधे हैं। G-7 शिखर सम्मेलन के दौरान दोनों नेताओं की मुलाकात संबंधों को पुनर्जनन के लिए एक महत्वपूर्ण अवसर प्रदान करेगी।”
- क्रोएशिया: भारतीय पीएम की पहली यात्रा
यात्रा के अंतिम चरण में, पीएम मोदी 18 जून को क्रोएशिया का दौरा करेंगे, जो किसी भारतीय प्रधानमंत्री की पहली आधिकारिक यात्रा होगी। क्रोएशिया के प्रधानमंत्री आंद्रेज प्लेंकोविच के निमंत्रण पर होने वाली इस यात्रा में पीएम मोदी उनके साथ द्विपक्षीय वार्ता करेंगे और राष्ट्रपति जोरान मिलानोविच से भी मुलाकात करेंगे। यह यात्रा भारत-क्रोएशिया संबंधों में एक नए अध्याय की शुरुआत करेगी।
क्रोएशिया, अपनी समुद्री सुविधाओं और एड्रियाटिक सागर पर बंदरगाहों के साथ, आईएमईसी के लिए एक आकर्षक भागीदार है। भारत और क्रोएशिया के बीच सांस्कृतिक और ऐतिहासिक संबंध सदियों पुराने हैं, और यह यात्रा व्यापार, निवेश, रक्षा और प्रौद्योगिकी सहित विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग को बढ़ावा देगी। 2021 में विदेश मंत्री एस. जयशंकर की क्रोएशिया यात्रा और 2023 में क्रोएशियाई विदेश मंत्री ग्रिलिक रैडमैन की भारत यात्रा ने दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग समझौते की नींव रखी थी।
- यात्रा का रणनीतिक महत्व
पीएम मोदी की यह यात्रा भारत की वैश्विक कूटनीति और रणनीतिक प्राथमिकताओं को दर्शाती है। साइप्रस और क्रोएशिया की यात्राएं भारत की यूरोप और भूमध्यसागरीय क्षेत्र में बढ़ती रुचि को दर्शाती हैं। दोनों देश यूरोपीय संघ के सदस्य हैं, और साइप्रस 2026 में ईयू परिषद की अध्यक्षता ग्रहण करेगा। यह यात्रा भारत-ईयू संबंधों को मजबूत करने और आईएमईसी जैसे परियोजनाओं में सहयोग बढ़ाने का अवसर प्रदान करेगी।
कनाडा में G-7 शिखर सम्मेलन भारत को वैश्विक मंच पर अपनी आवाज बुलंद करने का मौका देगा। पीएम मोदी ने अपने प्रस्थान बयान में कहा, “यह तीन देशों की यात्रा हमारे भागीदार देशों का सीमा पार आतंकवाद के खिलाफ भारत के संघर्ष में अटल समर्थन के लिए आभार व्यक्त करने और आतंकवाद से निपटने के लिए वैश्विक समझ को मजबूत करने का अवसर है।” यह बयान ऑपरेशन सिंदूर के बाद भारत की आतंकवाद के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति को रेखांकित करता है।
- भारत-कनाडा संबंधों में सुधार की संभावना
कनाडा यात्रा का एक प्रमुख पहलू पीएम मोदी और मार्क कार्नी की मुलाकात होगी, जो भारत-कनाडा संबंधों को सामान्य करने की दिशा में एक कदम हो सकती है। दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक और लोगों के बीच संबंध मजबूत हैं, और यह मुलाकात आपसी सम्मान और साझा हितों के आधार पर संबंधों को पुनर्जनन के लिए एक मंच प्रदान करेगी।
सोशल मीडिया पर इस यात्रा को लेकर उत्साह देखा गया। ‘एक्स’ पर @PMOIndia ने लिखा, “पीएम @narendramodi तीन देशों की यात्रा के लिए रवाना हुए।” कई यूजर्स ने इसे भारत की कूटनीतिक ताकत और पीएम मोदी की वैश्विक नेतृत्व क्षमता का प्रतीक बताया। @Bitt2DA ने लिखा, “मोदी जी चीते की चाल, बाज की नजर और अपनी कूटनीति से कांग्रेस द्वारा खराब किए गए रिश्तों को सुधारने जा रहे हैं।”
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