Sitapur : झूठी प्रशंसा अहंकार बढ़ाती है और पतन का कारण बनती है: महंत विवेक शास्त्री
महंत विवेक शास्त्री ने भक्त ध्रुव की कथा सुनाते हुए बताया कि किस तरह कम उम्र में ही उन्होंने भक्ति के बल पर अपनी पीढ़ियों का कल्याण किया। उन्होंने समाज में घटते संस्कारों पर चिंता जताते हुए कहा कि आज की
नैमिषारण्य तीर्थ के पवनसुत अतिथि भवन में चल रही श्रीमद् भागवत कथा के तीसरे दिन कथाव्यास महंत विवेक शास्त्री ने भक्तों को जीवन की सार्थकता का पाठ पढ़ाया। उन्होंने कहा कि नैमिष जैसे पवित्र स्थान पर मनुष्य को अपना समय केवल प्रभु भक्ति, सात्विक भोजन और तीर्थ भ्रमण में लगाना चाहिए। समय को बर्बाद करने के बजाय भगवान का ध्यान करना ही जीवन की असली कमाई है। कथा के दौरान उन्होंने राजा पृथु के चरित्र के माध्यम से समझाया कि इंसान को हमेशा झूठी तारीफ से बचकर रहना चाहिए, क्योंकि यह अहंकार को जन्म देती है जिससे अंत में व्यक्ति का विनाश होता है।
महंत विवेक शास्त्री ने भक्त ध्रुव की कथा सुनाते हुए बताया कि किस तरह कम उम्र में ही उन्होंने भक्ति के बल पर अपनी पीढ़ियों का कल्याण किया। उन्होंने समाज में घटते संस्कारों पर चिंता जताते हुए कहा कि आज की युवा पीढ़ी को अपने माता-पिता की सेवा का महत्व समझना चाहिए। माँ, महात्मा और ईश्वर के उपकारों को कभी चुकाया नहीं जा सकता, इसलिए जीवन भर माता-पिता की सेवा करनी चाहिए। कथा आयोजक रौनक तिवारी ने जानकारी दी कि अगले दिन कृष्ण जन्मोत्सव का पर्व धूमधाम से मनाया जाएगा। इस मौके पर मीना मिश्रा, अनिल मिश्रा, राम मिलन तिवारी, रमाकांत मिश्रा, जवाहर लाल तिवारी, आनंद प्रकाश तिवारी, दीपक मिश्रा, अभिषेक मिश्रा, विधान तिवारी, सुधांकर तिवारी और वेद प्रकाश द्विवेदी सहित अनेक श्रद्धालु मौजूद रहे।
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