हरदोई न्यूज़: छोटी काशी सुनासीर नाथ बाबा देवराज इंद्र के द्वारा स्थापित शिवलिंग को पूजने के लिए उमड़ता है जन सैलाब। 

By INA News Desk
Aug 14, 2024 - 17:39  · Updated: Aug 15, 2024 - 09:29
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हरदोई न्यूज़: छोटी काशी सुनासीर नाथ बाबा  देवराज इंद्र के द्वारा स्थापित शिवलिंग को पूजने के लिए उमड़ता है जन सैलाब। 
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  • शिव भक्तों की बढ़ती भीड़ को देखते हुए ट्रस्ट के द्वारा सफाई हुआ सुरक्षा के किए गए बेहतर इंतजाम 

हरदोई। जिला मुख्यालय से लगभग 48 किलोमीटर दूर मल्लावां में स्थित सुनासीर नाथ के नाम से मशहूर प्राचीन शिव मंदिर जो की मां गंगा की तलहटी में स्थित है जिसकी महिमा कुछ अलग ही है इसे छोटी काशी के नाम से भी जाना जाता है आज से लगभग 30 वर्ष पूर्व यह मंदिर भव्य जंगल के मध्य में स्थित था जहां पर जंगल होने के कारण श्रद्धालुओं का आवागमन काम ही हो पता था परंतु मंदिर की सत्यता व महिमा आम जनमानस को झकझोर कर रख दिया।

आज इस मंदिर पर भारी संख्या में श्रद्धालु वर्ष भर आगमन करते हैं और अपनी मुराद को भगवान शिव के समक्ष समर्पित करते हैं भोलेनाथ की कृपा से आए हुए भक्तों की मुराद भी पूरी होती है जिससे दिन प्रतिदिन श्रद्धालुओं की भीड़ बढ़ती जा रही है वर्ष भर देश के कोने-कोने से श्रद्धालु आते जाते रहते हैं लेकिन सावन माह मैं इस छोटी काशी बाबा सुन आशीर्वाद की महिमा कुछ अलग ही झलकती है इस माह में श्रद्धालुओं का उमड़ता जन सैलाब तथा सोमवार को लंबी कतारों में लगभग दो किलोमीटर तक लंबी लाइन का लगना बाबा के मंदिर की शोभा को और भी शोभायमान कर देती है।

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वर्तमान समय में मां गंगा की गोद में विराजमान भोलेनाथ का मंदिर अब भव्य मंदिर का रूप धारण कर चुका है तथा झाड़ी जंगल समाप्त हो गए हैं मंदिर के आसपास स्थाई दुकाने सज गई है बढ़ती भीड़ को देखते हुए मंदिर ट्रस्ट के द्वारा सफाई व सुरक्षा की बेहतर व्यवस्था की गई है सावन माह के सोमवार को बड़ी संख्या में कांवरिया जनपद कन्नौज में स्थित मां गंगा का जल (कांवर )मेहंदी घाट से लेकर के सुनासीर नाथ बाबा के दरबार में चढ़ाते हैं।

  • जाने किस देवता के द्वारा मंदिर की स्थापना  गई और छोटी काशी क्यों कहा जाता है।

सुनासीर नाथ सेवा समिति के सदस्य अतुल शुक्ला रंजन ने बताया कि हमारे पूर्वजों के अनुसार इस मंदिर में स्थापित शिवलिंग को देवराज इंद्र के द्वारा स्थापित किया गया था जो की देवराज इंद्र ने मां गंगा के सानिध्य में यहां पर शिवलिंग को स्थापित कर भगवान शिव की आराधना की थी और शिवजी को प्रसन्न किया था मान्यता है कि इस मंदिर में स्थापित शिवलिंग के समक्ष सच्चे मन से भक्त यदि भगवान भोलेनाथ को याद करता है और उनकी आराधना करता है तथा अपना मनोरथ उनके समक्ष रखता है तो निश्चित ही भक्त का मनोरथ भोलेनाथ अवश्य पूर्ण करते हैं और यह ऐतिहासिक प्राचीन देवराज इंद्र के द्वारा स्थापित मंदिर है और इसे छोटी काशी के नाम से भी जाना जाता है।

  • सुनासीर नाथ नाम कैसे पड़ा , औरंगजेब के द्वारा शिवलिंग पर चलाया गया आरा के निशान आज भी है मौजूद

सुनासीर नाथ बाबा मंदिर सेवा समिति के सदस्य अतुल शुक्ला रंजन ने बताया कि पूर्वजों के बताएं अनुसार हजारों वर्ष पूर्व यह मंदिर घने जंगल व झाड़ियों के बीच में स्थापित था उस समय आवागमन के साधन नहीं थे श्रद्धालु पैदल व बैल गाड़ियों से झाड़ियों के बीच से मंदिर तक पहुंचते थे और पूजा अर्चना किया करते थे बताया जाता है कि हजारों वर्ष पूर्व मंदिर को लूटने व मूर्ति को विखंडित करने का प्रयास औरंगज़ेब के द्वारा किया गया मंदिर में स्थापित शिवलिंग के ऊपर आरा चलाया गया जिस समय शिवलिंग पर आरा चलाया जा रहा था।

उसी समय यहां पर मधुमक्खियां एवं ततैया बर्र जैसे जीवों ने बड़ी तादात में औरंगजेब की सेना पर हमला बोल दिया इन मधुमक्खियां ततइयों के सामने औरंगज़ेब की सेना के पसीने छूट गए और वह वहां से जान बचाकर भागते हुए पास में स्थित सुकरौला गांव तक इन जीवों के द्वारा आक्रमणकारियों पर पीछा किया गया और वहां से उनको बख्श दिया गया। आज उस गांव को शुक्लापुर के नाम से जाना जाता है इसी के चलते औरंगजेब की सेना पर शुक्र करने वाले भगवान शिव के मंदिर का नाम सुनासीर पड़ा।

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वर्तमान समय में मंदिर का विकास काफी तेजी के साथ हुआ है और मंदिर की छटा देखते ही अब बनती है श्रद्धालुओं के लिए बेरी कटिंग की व्यवस्था बाहर से प्राचीन मंदिर के गेट तक स्थाई रूप से की गई है मंदिर परिसर में सोनाक्षी नाथ सेवा समिति के सदस्यों के द्वारा साफ सफाई हुआ सुरक्षा की व्यवस्था की जाती है जो की अत्यंत सराहनीय है तथा भीड़  पर नियंत्रण तथा शांति व्यवस्था बनाए रखना व सुरक्षा का कार्य मंदिर परिसर पर बनी पुलिस चौकी पर तैनात पुलिसकर्मियों के द्वारा भी बखूबी निभाया जाता है। जोकि अत्यंत सराहनीय है।

रिपोर्ट सुनील कुमार सिंह कुशवाहा

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