Ballia : बलिया कलेक्ट्रेट में वकीलों का प्रदर्शन, एसडीएम-तहसीलदार के तबादले की मांग को लेकर ज्ञापन सौंपा
ज्ञापन में वकीलों की मुख्य मांग बैरिया बस्ती और बलिया के उपजिलाधिकारी तथा तहसीलदार का तत्काल स्थानांतरण है। वकीलों का कहना है कि इन अधिकारियों के रवै
Report : S.Asif Hussain Zaidi
बलिया। कलेक्ट्रेट बार एसोसिएशन के सदस्यों ने अपनी सात मांगों को लेकर जिलाधिकारी कार्यालय के बाहर जोरदार प्रदर्शन किया। वकीलों ने जिला प्रशासन के खिलाफ नारे लगाए और जिलाधिकारी को संबोधित सात सूत्री ज्ञापन सौंपा। इस प्रदर्शन में सैकड़ों अधिवक्ता शामिल हुए, जो राजस्व न्यायालयों में व्याप्त समस्याओं से तंग आ चुके हैं। वकीलों का कहना है कि इन मांगों पर अमल न होने पर वे आंदोलन को और तेज करेंगे।
प्रदर्शन कलेक्ट्रेट परिसर में हुआ, जहां वकीलों ने हाथों में बैनर और तख्तियां लेकर जिला प्रशासन के खिलाफ नारे लगाए। ज्ञापन सौंपने के बाद सिविल बार एसोसिएशन के सभागार में एक महत्वपूर्ण बैठक भी हुई। इस बैठक की संयुक्त अध्यक्षता सिविल बार एसोसिएशन के अध्यक्ष देवेंद्र कुमार दूबे और क्रिमिनल एंड रेवेन्यू बार एसोसिएशन के अध्यक्ष देवेंद्रनाथ मिश्र ने की। बैठक में कलेक्ट्रेट बार एसोसिएशन के 10 सितंबर से चले आ रहे आंदोलन पर चर्चा हुई। वकीलों ने आरोप लगाया कि जिलाधिकारी ने 15 सितंबर को पारित प्रस्ताव को गंभीरता से नहीं लिया, जिसकी निंदा की गई।
ज्ञापन में वकीलों की मुख्य मांग बैरिया बस्ती और बलिया के उपजिलाधिकारी तथा तहसीलदार का तत्काल स्थानांतरण है। वकीलों का कहना है कि इन अधिकारियों के रवैये से राजस्व मामलों का निपटारा प्रभावित हो रहा है। एक वकील ने बताया कि तहसीलदार के कारण कई मामले लंबित पड़े हैं, जिससे पक्षकारों को परेशानी हो रही है। इसके अलावा, न्यायालयों में अनावश्यक भीड़ न लगने देने की मांग की गई है। वकीलों ने सुझाव दिया कि केवल सुनवाई वाले मामलों से जुड़े अधिवक्ता और पक्षकार ही अदालत में मौजूद रहें, ताकि व्यवस्था सुधरे।
एक अन्य महत्वपूर्ण मांग राजस्व न्यायालयों का समय निर्धारित रखना है। वकीलों का कहना है कि शाम चार बजे के बाद कोई सुनवाई न हो, क्योंकि इससे कार्यालयीन समय की अवहेलना हो रही है। ज्ञापन में जिला राजस्व अधिवक्ता मोहर्रिर समिति के सदस्यों के लंबित पंजीकरण और नवीनीकरण की कार्रवाई शीघ्र पूरी करने तथा उन्हें मोहर लगाने की अनुमति देने की बात कही गई है। वकील बताते हैं कि इस समिति के सदस्यों को बिना कारण लंबे समय से इंतजार करना पड़ रहा है, जो उनके पेशे को प्रभावित कर रहा है।
बालेन्दु कुमार ओझा- महा मंत्री - कलेक्ट बार एसोसिएशन।
चकबंदी के जर्जर भवनों में न्यायालय का संचालन न करने की मांग भी ज्ञापन का हिस्सा है। वकीलों ने कहा कि पुराने और खराब हालत वाले भवनों में सुनवाई से न केवल असुविधा होती है, बल्कि सुरक्षा का खतरा भी रहता है। एक अधिवक्ता ने बताया कि चकबंदी अदालतों में बारिश के दिनों में पानी टपकता है, जिससे दस्तावेज खराब हो जाते हैं। इसके अलावा, अन्य मांगों में राजस्व रिकॉर्ड के डिजिटलीकरण को तेज करने, पक्षकारों की उपस्थिति के बिना मामलों को खारिज न करने और वकीलों के लिए बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने का उल्लेख है।
बैठक में तय हुआ कि सिविल बार और क्रिमिनल एंड रेवेन्यू बार एसोसिएशन कलेक्ट्रेट बार के आंदोलन का पूरा समर्थन करेंगे। वकीलों ने जिलाधिकारी से मांग की है कि इन सात मांगों को तुरंत स्वीकार किया जाए। यदि ऐसा न हुआ तो पूरे जिले में न्यायिक कार्यों का बहिष्कार किया जा सकता है।
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