Hardoi News: फसल अवशेष प्रबंधन हेतु कृषि विज्ञान केन्द्र द्वारा मोबिलाइजेशन ऑफ स्टूडेंट कार्यक्रम का आयोजन
केन्द्र के अध्यक्ष/वरिष्ठ वैज्ञानिक डा0 केके सिंह ने कहा कि पराली को जलाने से हमारी मृदा की भौतिक, रासायनिक एवं जैविक दशा पर प्रभाव पड़ता है। इसलिए फसल अवशेष से कम्पोस्ट खाद् बनानी चा...
By INA News Hardoi.
हरदोई: कृषि विज्ञान केन्द्र, हरदोई द्वारा आर्य कन्या महाविद्यालय हरदोई में फसल अवशेष प्रबन्धन योजनान्तर्गत विषय ‘‘मोबिलाइजेशन आफॅ स्टूडेन्ट‘‘ कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की नोडल अधिकारी/वैज्ञानिक डा. प्रिया वशिष्ठ ने बताया कि फसल के अवशेषों को जलाने से उनके जड़, तना एवं पत्तियों में संचित लाभदायक पोषक तत्व नष्ट हो जाते है। उन्होंने कहा कि पराली जलाने से मानव स्वास्थ, पशुपालन, वातावरण एवं मृदा पर विपरीत प्रभाव पड़ता है। केन्द्र के अध्यक्ष/वरिष्ठ वैज्ञानिक डा0 केके सिंह ने कहा कि पराली को जलाने से हमारी मृदा की भौतिक, रासायनिक एवं जैविक दशा पर प्रभाव पड़ता है। इसलिए फसल अवशेष से कम्पोस्ट खाद् बनानी चाहिए।
उन्होंने खाद् बनाने के लिये पूसा डिकम्पोजर कैप्सूल के बारे में बताया एवं संरक्षित कृषि के लिये एक तिहाई फसल अवशेषों का मृदा की सतह पर रखना एक अनिवार्य आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि धान की कटाई के बाद गेहूॅ की जीरो टिलेज तकनीक से बुबाई द्वारा प्रभावी ढंग से फसल अवशेष प्रबन्धन किया जा सकता है। कार्यक्रम में लगभग 280 छात्राओं ने प्रतिभाग किया। कार्यक्रम में विभिन्न प्रतियोगिताओं जैसे-पोस्टर, प्रश्नोत्तरी एवं निबन्ध प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया।
जिसमें प्रथम पुरस्कार जया मिश्रा, बीए तृतीय वर्ष, द्धितीय पुरस्कार आयशा अंसारी, बीए तृतीय वर्ष, तृतीय पुरस्कार अनुष्का गुप्ता, बीए तृतीय वर्ष तथा रामजा सिद्धिकी एवं इस्मत फातिमा को क्रमशः सांत्वना पुरस्कार दिया गया। कार्यक्रम की मुख्य अतिथि कालेज की प्रधानचार्य डा. सुमन वर्मा ने बच्चों का उत्साहवर्धन करते हुये पराली प्रबन्धन का महत्व एवं उपयोगिता के बारे में बताया। महाविद्यालय की शिक्षिकाओं नीता आर्यन, डा0 सरिता यादव, डा0 अन्जू, डा0 श्वेता यादव, डा0 जासरा, डा0 स्मृति सिंह एवं संत कुमारी ने कार्यक्रम में प्रतिभाग किया।
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