Trending News: भारत में कोविड-19 की नई लहर- सक्रिय मामले 3,961 तक पहुंचे, स्वास्थ्य मंत्रालय ने सतर्कता बढ़ाने का आह्वान किया।
भारत में कोविड-19 के सक्रिय मामलों में हाल के हफ्तों में तेजी से वृद्धि देखी जा रही है, जिसने स्वास्थ्य विशेषज्ञों और प्रशासन को एक बार फिर सतर्क कर...
भारत में कोविड-19 के सक्रिय मामलों में हाल के हफ्तों में तेजी से वृद्धि देखी जा रही है, जिसने स्वास्थ्य विशेषज्ञों और प्रशासन को एक बार फिर सतर्क कर दिया है। केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय के अनुसार, 2 जून, 2025 तक देश में सक्रिय कोविड-19 मामलों की संख्या 3,961 तक पहुंच गई है। पिछले 24 घंटों में 203 नए मामले दर्ज किए गए, और चार लोगों की मौत हुई, जिनमें दिल्ली, केरल, महाराष्ट्र, और तमिलनाडु से एक-एक मौत शामिल है। यह वृद्धि नए सब-वेरिएंट्स NB.1.8.1 और LF.7 के प्रसार, टीकों की कम होती प्रतिरक्षा, और जनता के बीच ढीली सावधानियों के कारण मानी जा रही है। हालांकि, स्वास्थ्य मंत्रालय ने जोर देकर कहा है कि स्थिति नियंत्रण में है, और गंभीरता के मामले कम हैं, जिससे घबराने की आवश्यकता नहीं है।
- कोविड-19 की स्थिति: आंकड़े और तथ्य
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के डैशबोर्ड के अनुसार, 2 जून, 2025 को सुबह 8 बजे तक भारत में कोविड-19 के सक्रिय मामले 3,961 थे, जो पिछले सप्ताह के 1,009 मामलों से काफी अधिक हैं। मई 2025 की शुरुआत में, सक्रिय मामले केवल 257 थे, जो 10 दिनों में 1300% की वृद्धि दर्शाता है। केरल में सबसे अधिक 1,435 सक्रिय मामले हैं, इसके बाद महाराष्ट्र (506), दिल्ली (483), गुजरात (338), और पश्चिम बंगाल (331) हैं। अन्य राज्यों में भी मामले बढ़ रहे हैं, जिनमें कर्नाटक (253), तमिलनाडु (189), और उत्तर प्रदेश (157) शामिल हैं।
पिछले 24 घंटों में चार मौतें दर्ज की गईं, जिनमें दिल्ली में एक 60 वर्षीय महिला (पोस्ट-लैपरोटॉमी तीव्र आंत्र रुकावट), केरल में एक 24 वर्षीय महिला (सेप्सिस, उच्च रक्तचाप, और डीसीएलडी के साथ), और महाराष्ट्र और तमिलनाडु में एक-एक व्यक्ति शामिल हैं। जनवरी 2025 से अब तक, भारत में कोविड-19 से कुल 28 मौतें दर्ज की गई हैं, जिनमें से सात महाराष्ट्र में और पांच केरल में हुईं। इसके बावजूद, 1,435 मरीज ठीक होकर अस्पतालों से डिस्चार्ज हुए हैं, जो रिकवरी दर को 98% से अधिक बनाए रखता है।
- कोविड-19 के पुनरुत्थान के कारण
विशेषज्ञों के अनुसार, कोविड-19 मामलों में इस उछाल के पीछे कई कारक हैं:
नए सब-वेरिएंट्स का उदय: भारतीय SARS-CoV-2 जीनोमिक्स कंसोर्टियम (INSACOG) ने दो नए सब-वेरिएंट्स, NB.1.8.1 और LF.7, की पहचान की है, जो विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) द्वारा वेरिएंट्स अंडर मॉनिटरिंग (VUM) के रूप में वर्गीकृत हैं। NB.1.8.1 की वैश्विक अनुक्रमों में हिस्सेदारी मई 2025 तक 10.7% तक पहुंच गई, जो मार्च 2025 में 2.5% थी। ये वेरिएंट्स अधिक संक्रामक हैं, हालांकि इनके गंभीर रोग पैदा करने के कोई ठोस सबूत नहीं हैं।
टीकों की कम होती प्रतिरक्षा: अधिकांश भारतीयों को कोविड-19 टीके की खुराक एक साल से अधिक समय पहले दी गई थी, जिससे प्रतिरक्षा में कमी आई है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह नए वेरिएंट्स के खिलाफ सुरक्षा को कमजोर करता है।
ढीली सावधानियां: मास्क पहनने और सामाजिक दूरी जैसे निवारक उपायों में कमी ने वायरस के प्रसार को बढ़ावा दिया है। बदलते मौसम और वायु गुणवत्ता ने भी श्वसन संक्रमणों को प्रभावित किया है।
वैश्विक प्रभाव: दक्षिण-पूर्व एशिया और पश्चिमी प्रशांत क्षेत्रों में कोविड-19 मामलों में वृद्धि, विशेष रूप से सिंगापुर और हांगकांग में, भारत में भी मामलों के बढ़ने का एक कारण है। WHO के अनुसार, वैश्विक टेस्ट पॉजिटिविटी दर मई 2025 में 11% तक पहुंच गई, जो जुलाई 2024 के बाद सबसे अधिक है।
राज्यों में स्थिति
केरल, जो पहली बार 2020 में कोविड-19 का केंद्र था, एक बार फिर सबसे अधिक प्रभावित राज्य है, जिसमें 1,435 सक्रिय मामले हैं। महाराष्ट्र और दिल्ली भी पीछे नहीं हैं, जहां क्रमशः 506 और 483 मामले हैं। बेंगलुरु में अपशिष्ट जल निगरानी से पता चला है कि पिछले दो हफ्तों में वायरल लोड में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। कर्नाटक में 1 जून को 87 नए मामले दर्ज किए गए, जिससे सक्रिय मामलों की संख्या 311 हो गई। पश्चिम बंगाल में पिछले सात दिनों में 319 नए मामले सामने आए हैं। दिल्ली में 19 मरीज अस्पताल में भर्ती हैं, और पहली कोविड-संबंधित मृत्यु एक 60 वर्षीय महिला की दर्ज की गई।
- स्वास्थ्य मंत्रालय और प्रशासन की प्रतिक्रिया
स्वास्थ्य मंत्रालय ने स्थिति की गंभीरता को स्वीकार करते हुए कहा है कि मामलों की संख्या कम है और अधिकांश मरीजों में हल्के लक्षण हैं, जिससे अस्पताल में भर्ती की आवश्यकता नहीं पड़ी है। मंत्रालय ने राज्यों को निगरानी बढ़ाने, टेस्टिंग और कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग को मजबूत करने, और टीकाकरण अभियान को तेज करने का निर्देश दिया है। नेशनल सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल (NCDC), इमरजेंसी मेडिकल रिलीफ, और भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (ICMR) के विशेषज्ञों के साथ समीक्षा बैठकें आयोजित की गई हैं।
मंत्रालय ने जनता से मास्क पहनने, सामाजिक दूरी बनाए रखने, और भीड़-भाड़ वाले स्थानों से बचने की अपील की है। विशेष रूप से, सह-रुग्णता (कोमॉर्बिडिटी) वाले लोगों, जैसे कि मधुमेह, किडनी रोग, या प्रतिरक्षा की कमी वाले मरीजों, को अतिरिक्त सावधानी बरतने की सलाह दी गई है। दिल्ली के मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने पुष्टि की कि राजधानी में 19 मरीज अस्पताल में भर्ती हैं, और ऑक्सीजन, दवाएं, और बिस्तरों की व्यवस्था पूरी तरह तैयार है।
- विशेषज्ञों की राय
इंद्रप्रस्थ अपोलो अस्पताल के वरिष्ठ सलाहकार डॉ. सुरंजीत चटर्जी ने कहा, “22 वर्षीय मरीज की मृत्यु, जिसके फेफड़े पहले से क्षतिग्रस्त थे, से पता चलता है कि सह-रुग्णता वाले लोगों को सतर्क रहने की जरूरत है।” उन्होंने जोर देकर कहा कि घबराने की जरूरत नहीं है, क्योंकि अधिकांश मामले हल्के हैं। WHO ने भी पुष्टि की है कि NB.1.8.1 और LF.7 जैसे नए वेरिएंट्स पिछले वेरिएंट्स की तुलना में अधिक गंभीर बीमारी का कारण नहीं बन रहे हैं।
- रोकथाम के उपाय
कोविड-19 के प्रसार को रोकने के लिए निम्नलिखित उपाय अपनाए जा सकते हैं:
मास्क और सामाजिक दूरी: सार्वजनिक स्थानों पर मास्क पहनना और सामाजिक दूरी बनाए रखना अनिवार्य है।
टीकाकरण और बूस्टर डोज: जिन लोगों ने अभी तक बूस्टर डोज नहीं ली है, उन्हें तुरंत लेनी चाहिए।
निगरानी और टेस्टिंग: अपशिष्ट जल निगरानी और जीनोम अनुक्रमण को बढ़ावा देना चाहिए ताकि नए वेरिएंट्स का जल्दी पता लगाया जा सके।
जागरूकता अभियान: सरकार और स्वास्थ्य संगठनों को जनता को लक्षणों, रोकथाम, और टीकाकरण के महत्व के बारे में शिक्षित करना चाहिए।
यात्रा सावधानियां: अंतरराष्ट्रीय यात्रियों के लिए पोलियो और कोविड-19 टीकाकरण की आवश्यकता पर जोर देना चाहिए।
यह उछाल भारत में कोविड-19 की लंबी लड़ाई को दर्शाता है, जो 30 जनवरी, 2020 को केरल में पहला मामला दर्ज होने के बाद से जारी है। भारत में अब तक 45,041,748 पुष्ट मामले और 533,623 मौतें दर्ज की गई हैं, जो इसे विश्व में दूसरा सबसे अधिक प्रभावित देश बनाता है। यह स्थिति स्वास्थ्य प्रणाली पर दबाव को उजागर करती है, विशेष रूप से राष्ट्रीय रोग नियंत्रण केंद्र (NCDC) और एकीकृत रोग निगरानी कार्यक्रम (IDSP) में धन और जनशक्ति की कमी के कारण।
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सोशल मीडिया पर इस उछाल ने चिंता और जागरूकता दोनों को बढ़ाया है। एक्स पर कई पोस्ट्स में लोगों ने मास्क पहनने और टीकाकरण की आवश्यकता पर जोर दिया है, जबकि कुछ ने सरकार से सख्त उपायों की मांग की है।
भारत में कोविड-19 के सक्रिय मामलों की संख्या 3,961 तक पहुंचना एक चेतावनी है कि महामारी अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुई है। नए सब-वेरिएंट्स, कम होती प्रतिरक्षा, और ढीली सावधानियों ने इस उछाल को बढ़ावा दिया है। हालांकि, स्वास्थ्य मंत्रालय और विशेषज्ञों ने आश्वासन दिया है कि स्थिति नियंत्रण में है, और घबराने की जरूरत नहीं है।
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