Prayagraj : प्रयागराज में नाट्य प्रतियोगिता- ‘कैकेयी वरदान प्रसंग’ का भावपूर्ण मंचन, दर्शक भावुक

नाटक में कैकेयी के पूर्व प्राप्त वरदानों के आधार पर भरत को राजा बनाने और राम को चौदह वर्ष के वनवास पर भेजने का हठ दिखाया गया। राजा दशरथ व्यथित हो उठे और कैकेयी

Jan 21, 2026 - 22:58
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Prayagraj : प्रयागराज में नाट्य प्रतियोगिता- ‘कैकेयी वरदान प्रसंग’ का भावपूर्ण मंचन, दर्शक भावुक
Prayagraj : प्रयागराज में नाट्य प्रतियोगिता- ‘कैकेयी वरदान प्रसंग’ का भावपूर्ण मंचन, दर्शक भावुक

उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में उत्तर मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र द्वारा आयोजित नाट्य प्रतियोगिता में रामायण के प्रसिद्ध प्रसंग ‘कैकेयी वरदान’ का मार्मिक मंचन किया गया। मुक्ताकाशी मंच पर प्रस्तुत इस नाटक का निर्देशन कुंवर करन सिंह ने किया।

नाटक में कैकेयी के पूर्व प्राप्त वरदानों के आधार पर भरत को राजा बनाने और राम को चौदह वर्ष के वनवास पर भेजने का हठ दिखाया गया। राजा दशरथ व्यथित हो उठे और कैकेयी के कक्ष में दोनों के बीच लंबे हृदयविदारक संवाद हुए। दशरथ ने राम और भरत को समान प्रिय बताकर समझाने की कोशिश की लेकिन कैकेयी अडिग रहीं। राम के वनवास की चिंता में दशरथ मूर्छित हो गए और यह समाचार पूरे महल और अयोध्या में फैल गया जिससे वातावरण करुणा से भर गया।

प्रस्तुति में जितेंद्र सिंह ने राम, शिवेंद्र वैश्य ने लक्ष्मण, जान्हवी पांडेय ने सीता, हर्ष पांडेय ने दशरथ, हर्षिता तिवारी ने कैकेयी, अस्मिता तिवारी ने कौशल्या और अपराजिता तिवारी ने सुमित्रा का किरदार निभाया। सभी कलाकारों के सशक्त अभिनय से दर्शक भावविभोर हो गए।

कार्यक्रम की दूसरी कड़ी सांस्कृतिक संध्या में साईं ब्रदर्स ने “चलो मन गंगा यमुना तीर”, “रे मन हरि सुमिरन कर”, “सीता राम सीता कहिए”, “प्रयाग नगरी बसे संगम के तीरे” और “मोरे सर से टली बला, कबीर भला हुआ” जैसे भजन गाए। साधना शर्मा ने देवी गीत “झूला झूले निमिया के उरिया”, “अरे रामा बूंद-बूंद पड़ेला फुहार” और “ठाड़ी मैं जमुना के तीर, मछरिया बिंदिया लै गई” प्रस्तुत किए। जवाबी बिरहा ने ग्रामीण जीवन की जीवंत छवि दिखाई। संचालन अमित मिश्रा ने किया। इस अवसर पर केंद्र निदेशक सुदेश शर्मा, कार्यक्रम सलाहकार कल्पना सहाय, प्रवीण शेखर, आलोक नायर सहित कई लोग मौजूद रहे।

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