Sambhal : चंदौसी में गणेश चौथ महोत्सव के दौरान कौमी एकता का संदेश
चादरपोशी की यह परंपरा कई दशकों से लगातार निभाई जा रही है। बताया जाता है कि हाजी निजामुद्दीन साहब की पत्नी अकीला बेगम ने मेला संस्थापक डॉ. गिरिराज किशो
Report : उवैस दानिश, सम्भल
मिनी वृंदावन नगरी चंदौसी में चल रहे 65वें मेला गणेश चौथ महोत्सव के तहत शुक्रवार को श्री गणेश मेला परिषद (रजि०) चंदौसी द्वारा परंपरागत चादरपोशी कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस अवसर पर मेला कमेटी के सभी पदाधिकारी और सदस्य गणेश मंदिर से कौमी एकता की चादर लेकर भव्य जुलूस के रूप में रवाना हुए। जुलूस मेला ग्राउंड होते हुए खान बाबा की मजार पर पहुंचा, जहां विधिवत चादर चढ़ाई गई और अमन-चैन की दुआ मांगी गई।
- वर्षों पुरानी परंपरा
चादरपोशी की यह परंपरा कई दशकों से लगातार निभाई जा रही है। बताया जाता है कि हाजी निजामुद्दीन साहब की पत्नी अकीला बेगम ने मेला संस्थापक डॉ. गिरिराज किशोर गुप्ता के पौत्र के स्वास्थ्य लाभ के लिए खान बाबा की मजार पर मन्नत मांगी थी।
मन्नत पूरी होने के बाद अकीला बेगम ने यहां आकर चादरपोशी की थी। उसी समय से यह परंपरा शुरू हुई और आज तक प्रत्येक वर्ष गणेश चौथ मेले के अवसर पर मेला समिति द्वारा निभाई जा रही है।
- मेला समिति का बयान
मेला समिति के पदाधिकारियों ने बताया कि इस कार्यक्रम का उद्देश्य कौमी एकता, सांप्रदायिक सौहार्द और आपसी भाईचारे को मजबूत करना है। उन्होंने कहा कि जिस तरह अलग-अलग धर्मों के लोग मिलकर इस चादरपोशी में शामिल होते हैं, यह चंदौसी की गंगा-जमुनी तहजीब का प्रतीक है।
गौरतलब है कि चंदौसी का गणेश चौथ मेला न केवल धार्मिक महत्व रखता है, बल्कि यह सामाजिक सौहार्द का भी एक बड़ा उदाहरण है। मेले के दौरान पूरे क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था चाक-चौबंद रही। पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों की मौजूदगी में कार्यक्रम शांतिपूर्वक संपन्न हुआ। नगरवासियों का कहना है कि इस परंपरा से जहां एक ओर सांप्रदायिक सद्भावना को बल मिलता है, वहीं मेला गणेश चौथ महोत्सव की गरिमा भी और बढ़ जाती है।
कार्यक्रम में भारी संख्या में नगरवासी, श्रद्धालु और मेला आगंतुक शामिल हुए। जुलूस के दौरान “हिंदू-मुस्लिम एकता जिंदाबाद” और “गणपति बप्पा मोरया” के जयघोष से वातावरण गूंज उठा। पूरे आयोजन में सौहार्द और भाईचारे का अद्भुत नजारा देखने को मिला।
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