Deoband : मदरसा जामिया इल्हामिया लिल बिनात में हुआ बुखारी शरीफ का खत्म
उन्होंने छात्रों को नसीहत करते हुए कहा कि अब आपकी जिम्मेदारी है कि मदरसे में रहकर जो कुछ सीखा उसे अपनी जिंदगी में उतारें और इस्लाम की सही तालीम लोगों तक पहुंचाएं। उ
दारुल उलूम के उस्ताद मौलाना मुनीरुद्दीन ने छात्राओं को पढ़ाया बुखारी का अंतिम पाठ
देवबंद। लड़कियों को दीनी तालीम देने वाले मदरसा जामिया इल्हामिया लिल बिनात में बृहस्पतिवार को हदीस की सबसे बड़ी किताब बुखारी शरीफ का समापन हुआ। इसमें दारुल उलूम के उस्ताद मौलाना मुनीरुद्दीन उस्मानी ने छात्राओं को बुखारी शरीफ का अंतिम पाठ पढ़ाया। मोहल्ला पठानपुरा स्थित मदरसे में हुए कार्यक्रम में दारुल उलूम के उस्ताद मौलाना मुनीरुद्दीन उस्मानी ने अंतिम वर्ष की छात्राओं को बुखारी शरीफ का अंतिम पाठ पढ़ाया।
उन्होंने छात्रों को नसीहत करते हुए कहा कि अब आपकी जिम्मेदारी है कि मदरसे में रहकर जो कुछ सीखा उसे अपनी जिंदगी में उतारें और इस्लाम की सही तालीम लोगों तक पहुंचाएं। उन्होंने कहा कि खुशनसीब होते हैं वो लोग जिन्हें दीन इस्लाम की तालीम हासिल करने का मौका मिला। इल्म हासिल करने का असल फायदा तभी है जब उस पर अमल किया जाए। मौलाना मुनीरुद्दीन ने कहा कि बेटियां आलिमा बनकर पूरी नस्लों को सुधार सकती हैं, क्योंकि बच्चों की पहली उस्ताद उनकी मां होती है। अंत में छात्राओं को प्रमाण पत्र दिए गए। इस मौके पर मौलाना रिजवान, इल्मा जीशान,फायजा, फजीलत, मंशा, शिफा, सानिया, जैनब अरशी और फरहाना आदि मौजूद रहे।
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