Hathras : हाथरस के इतिहास और संस्कृति को समेटेगा नया गजेटियर, जुलाई तक प्रकाशन का लक्ष्य, अधिकारियों संग बैठक में बनी रणनीति
उन्होंने कहा कि हाथरस की भूमि हमेशा से बलिदानियों, समाजसेवियों, धार्मिक विद्वानों और अपनी अनूठी सांस्कृतिक परंपराओं के लिए जानी जाती रही है। हाथरस जहां एक तरफ औद्योगिक नगरी के रूप में प्रसिद्ध है, वहीं दूसरी तरफ स्वांग के जनक पंडित नथाराम गौड़, रसिया विधा
हाथरस के विकास भवन सभागार में मुख्य विकास अधिकारी पीएन दीक्षित की अध्यक्षता में जिले का गजेटियर तैयार करने को लेकर एक अहम बैठक हुई। इस बैठक में अलग-अलग सरकारी विभागों के अधिकारियों और सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। बैठक के दौरान मुख्य विकास अधिकारी ने बताया कि हाथरस के समृद्ध इतिहास, सांस्कृतिक विरासत और प्रमुख धरोहरों को एक साथ संकलित करके जुलाई महीने तक गजेटियर प्रकाशित करने का लक्ष्य रखा गया है। उन्होंने जिले के नागरिकों से भी अपील की है कि यदि किसी के पास हाथरस के इतिहास से जुड़ी पुरानी तस्वीरें, दुर्लभ जानकारियां, पांडुलिपियां या अन्य जरूरी दस्तावेज हों, तो वे उन्हें प्रशासन के साथ साझा कर इस काम में अपना सहयोग दें।
उन्होंने कहा कि हाथरस की भूमि हमेशा से बलिदानियों, समाजसेवियों, धार्मिक विद्वानों और अपनी अनूठी सांस्कृतिक परंपराओं के लिए जानी जाती रही है। हाथरस जहां एक तरफ औद्योगिक नगरी के रूप में प्रसिद्ध है, वहीं दूसरी तरफ स्वांग के जनक पंडित नथाराम गौड़, रसिया विधा से जुड़े खिच्चोमल आटे वाले और अन्य लोक कलाओं के लिए भी इसकी एक खास पहचान है। बैठक में इस बात पर भी चर्चा हुई कि दाऊजी मंदिर समेत जिले की कई ऐतिहासिक इमारतें पुरातत्व के नजरिए से बेहद महत्वपूर्ण हैं। इस नए गजेटियर में हाथरस के इतिहास, साहित्य, उद्योग, पर्यटन और सामाजिक ताने-बाने से जुड़ी पूरी जानकारी आम लोगों के लिए उपलब्ध कराई जाएगी। इस मौके पर प्रभागीय वनाधिकारी राकेश कुमार यादव, परियोजना निदेशक राजकुमार कुरील, जिला विकास अधिकारी पीएन यादव, जिला उद्योग केंद्र प्रबंधक अजिलेश कुमार, उपायुक्त श्रम विभाग सत्येंद्र मिश्रा, गजेटियर प्रभारी राजवीर और डीपीआरओ सहित कई अधिकारी मौजूद रहे। साथ ही फैम जिलाध्यक्ष सुरेश अग्रवाल, सर्राफा कमेटी अध्यक्ष मोहनलाल अग्रवाल, महामंत्राी शैलेंद्र वार्ष्णेय और उपभोक्ता संरक्षण फोरम के प्रतिनिधि भी शामिल हुए।
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