Lucknow News: अन्तर्राष्ट्रीय रामायण कॉन्क्लेव का समापन कल 02 अप्रैल को जम्मू में...

रामायण कान्क्लेव भगवान श्रीराम के जीवन के विविध पहलुओं को जन-जन तक पहुंचाने का एक सशक्त माध्यम- जयवीर सिंह

By INA News Desk
Apr 1, 2025 - 19:47
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Lucknow News: अन्तर्राष्ट्रीय रामायण कॉन्क्लेव का समापन कल 02 अप्रैल को जम्मू में...

लखनऊ: अंतर्राष्ट्रीय रामायण एवं वैदिक शोध संस्थान, संस्कृति विभाग द्वारा भगवान श्री राम के जीवन के विविध पहलुओं को जन-जन तक पहुँचाने के उद्देश्य से कॉन्क्लेव का आयोजन किया जा रहा है। जम्मू कश्मीर के केन्द्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय, श्री रणवीर परिसर में कल 02 अप्रैल को समापन कार्यक्रम आयोजित किया गया है, जिसमें भारतीय संस्कृति और अध्यात्म के विभिन्न पहलुओं पर प्रकाश डाला जाएगा। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में श्रीमद् जगद्गुरू शंकराचार्य अमृतानंद देव तीर्थ जी उपस्थित रहेंगे।

यह जानकारी आज यहां प्रदेश के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री श्री जयवीर सिंह ने दी। उन्होंने बताया कि कार्यक्रम की शुरुआत संत-विद्वत समागम से होगी, जिसमें विभिन्न धार्मिक और दार्शनिक विचारक ‘विश्व कल्याणकारी सततवाही रामतत्व’ विषय पर विचार-मंथन करेंगेे। इस समागम में श्रीमद् जगद्गुरू शंकराचार्य अमृतानंद देव तीर्थ जी के साथ आचार्य मिथिलेशनंदिनीशरण जी महाराज (महंत सिद्धपीठ श्री हनुमन्निवास, अयोध्या धाम धर्माचार्य, आध्यात्मिक-दार्शनिक विचारक), स्वामी हृदयानन्द गिरी (ह्रदयदीप, आश्रय जम्मू), और महामंडलेश्वर स्वामी रामेश्वर दास महाराज (राम मंदिर मंडी जम्मू) भी सम्मिलित होंगे।

पर्यटन मंत्री ने बताया कि इसके पश्चात् रामायण पर आधारित प्रश्नोत्तरी और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा, जिसमें जम्मू के प्रसिद्ध कलाकार चमन लहरी जी भजनों के माध्यम से  माहौल भक्तिमय बनाएंगे। साथ ही रजनीश और उनका दल ‘डोगरी रामलीला’ का मंचन करेंगे। कार्यक्रम के सांध्य काल में कवियों का समागम आयोजित किया जाएगा, जिसमें प्रसिद्ध कवि सर्वेश अस्थाना (लखनऊ), मोहित शौर्य (गाजियाबाद), सोनरूपा विशाल (बदांयू), विनोद गुप्ता ‘निर्मल’ (जम्मू), और सौम्य श्रीवास्तव (जम्मू) अपनी रचनाओं का पाठ करेंगे। 

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जयवीर सिंह ने बताया कि कॉन्क्लेव की शुरुआत 26 फरवरी को महाशिवरात्रि के दिन प्रयागराज के श्रृंगवेरपुर से हुई थी। भारत के दक्षिणी छोर से लेकर उत्तरी कोने तक और नेपाल व श्रीलंका समेत हर तरफ राम नाम की गूंज रही। इसमें राम वन गमन पथ सहित कुल 10 प्रमुख स्थानों पर विचार-गोष्ठियाँ, व्याख्यान और सांस्कृतिक आयोजन किए गए। प्रयागराज, चित्रकूट, रामटेक, नागपुर, हम्पी, कर्नाटक, रामेश्वरम, श्रीलंका के बाद अब इस कार्यक्रम का समापन जम्मू में भव्य रूप से किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि इस कार्यक्रम ने न केवल रामायण के धार्मिक, सांस्कृतिक और शैक्षिक पक्षों को उजागर किया, बल्कि भगवान श्री राम के आदर्शों के प्रचार-प्रसार में वैश्विक भूमिका भी निभाई। यह कॉन्क्लेव समाज में एकता, भाईचारे और समरसता का संदेश लेकर आया है।

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