Siddharthnagar News: सिद्धार्थनगर में प्रथम काला नमक (बुद्धा राइस) GIC सम्मेलन, भगवान बुद्ध के प्रसाद को बढ़ावा देने की पहल
जिलाधिकारी डॉ. राजा गणपति आर ने कहा कि काला नमक चावल की खेती का क्षेत्रफल 2 हजार हेक्टेयर से बढ़कर 18 हजार हेक्टेयर हो गया है। उन्होंने सभी 11 जनपदों से इस....
By INA News Siddharthnagar.
सिद्धार्थनगर : जिला मुख्यालय के सनई स्थित टीजीआर होटल में प्रथम काला नमक (बुद्धा राइस) GIC सम्मेलन का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि सिद्धार्थ विश्वविद्यालय कपिलवस्तु की कुलपति प्रो. कविता शाह ने दीप प्रज्ज्वलन कर किया। इस अवसर पर उप कृषि निदेशक अरविंद कुमार विश्वकर्मा और जिला कृषि अधिकारी मु. मुजम्मिल ने प्रो. कविता शाह का पुष्प गुच्छ देकर स्वागत किया। सम्मेलन में बस्ती, गोरखपुर और देवी पाटन मंडल के 11 जनपदों के उप कृषि निदेशक, उपायुक्त उद्योग और अन्य अधिकारियों ने भाग लिया। इनमें सिद्धार्थनगर, बस्ती, संतकबीरनगर, गोरखपुर, देवरिया, महराजगंज, कुशीनगर, गोंडा, बलरामपुर, बहराइच और श्रावस्ती के प्रतिनिधि शामिल थे।
मुख्य अतिथि प्रो. कविता शाह ने अपने संबोधन में कहा कि काला नमक चावल भगवान बुद्ध का प्रसाद है, जिसका उपयोग खीर, चावल और अन्य व्यंजन बनाने में किया जाता है। उन्होंने बताया कि इस चावल की खेती का क्षेत्रफल बढ़ गया है और आज कई किसान इसे उगा रहे हैं। विभिन्न नई प्रजातियों के साथ सिद्धार्थनगर का वातावरण काला नमक चावल की खेती के लिए अनुकूल है। उन्होंने सिद्धार्थ विश्वविद्यालय से विशेषज्ञों को आमंत्रित करने के लिए जिलाधिकारी को धन्यवाद दिया और उम्मीद जताई कि यह सम्मेलन अपने उद्देश्यों में सफल होगा।
जिलाधिकारी डॉ. राजा गणपति आर ने कहा कि काला नमक चावल की खेती का क्षेत्रफल 2 हजार हेक्टेयर से बढ़कर 18 हजार हेक्टेयर हो गया है। उन्होंने सभी 11 जनपदों से इस क्षेत्रफल को और बढ़ाने में सहयोग करने की अपील की। उन्होंने बताया कि काला नमक चावल को बजहा सागर क्षेत्र में गौतम बुद्ध ने किसानों को प्रसाद के रूप में दिया था। यह चावल शुगर-फ्री है और इसमें कई पोषक गुण मौजूद हैं। गुणवत्ता बनाए रखने के लिए कृषि विभाग के सहयोग से इसे क्लस्टर में बांटा गया है, जहां किसानों को प्रशिक्षण दिया जाएगा। विकास खंड स्तर पर भी प्रशिक्षण आयोजित होंगे। उन्होंने छोटे और बड़े डीलों में धान की पैदावार बढ़ाने के लिए किसानों को प्रोत्साहित करने की बात कही।
जिलाधिकारी ने यह भी घोषणा की कि 15-20 नवंबर के बीच द्वितीय क्रेता-विक्रेता सम्मेलन आयोजित किया जाएगा, जिसमें सभी 11 जनपदों के लोग अपने उत्पाद ला सकते हैं। उन्होंने कहा कि काला नमक चावल की खुशबू अद्वितीय है और इसे पूरे भारत में एक प्लेटफॉर्म के माध्यम से पहुंचाया जा सकता है।
प्रभारी मुख्य विकास अधिकारी/पीडी नागेंद्र मोहन राम त्रिपाठी ने कहा कि वह स्वयं एक कृषक परिवार से हैं और कृषि की चुनौतियों को समझते हैं। पिछले एक साल में जिलाधिकारी के निर्देश पर कई गोष्ठियां आयोजित की गई हैं। उन्होंने बताया कि काला नमक चावल की मांग न केवल भारत में बल्कि विदेशों में भी है। इसकी गुणवत्ता बनाए रखने के लिए अच्छे बीजों का उपयोग और रासायनिक उर्वरकों से परहेज करना जरूरी है।
जिला कृषि अधिकारी मु. मुजम्मिल ने बताया कि यह सम्मेलन जिलाधिकारी की पहल पर आयोजित किया गया। पिछले वर्ष 22 और 23 दिसंबर 2024 को क्रेता-विक्रेता सम्मेलन का आयोजन किया गया था। उन्होंने पीपीटी के माध्यम से काला नमक चावल की विशेषताओं और महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला।
सम्मेलन में सिद्धार्थ विश्वविद्यालय के बायोटेक्नोलॉजी विशेषज्ञ मनोज कुमार, काला नमक चावल बोर्ड के कोषाध्यक्ष विकास उपाध्याय, सचिव अभिषेक सिंह, कृषि वैज्ञानिक मार्कंडेय सिंह (कृषि विज्ञान केंद्र, सोहना), अंतरराष्ट्रीय चावल अनुसंधान संस्थान वाराणसी की सौरभी गडोनी, सेवानिवृत्त कृषि वैज्ञानिक एसके मिश्र, जिला विकास प्रबंधक नाबार्ड हिमांशु त्रिपाठी, प्रगतिशील किसान सुशीला मिश्रा, काउंसलिंग फॉर डेवलपमेंट हैदराबाद की डॉ. सौम्या और वरिष्ठ वैज्ञानिक एपीडा देवानंद त्रिपाठी ने भी अपने विचार साझा किए।
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