Mussoorie: पद्मश्री ह्यूग गैंटज़र को राजकीय सम्मान और गार्ड ऑफ ऑनर के साथ दी अंतिम विदाई।
प्रसिद्ध अंग्रेज़ी ट्रैवल राइटर, पर्यावरण संरक्षक और पद्मश्री सम्मानित ह्यूग गैंटज़र के निधन से मसूरी सहित देश-विदेश के साहित्य जगत
रिपोर्टर सुनील सोनकर
मसूरी: प्रसिद्ध अंग्रेज़ी ट्रैवल राइटर, पर्यावरण संरक्षक और पद्मश्री सम्मानित ह्यूग गैंटज़र के निधन से मसूरी सहित देश-विदेश के साहित्य जगत में शोक की लहर दौड़ गई। 94 वर्ष की आयु में उन्होंने किंक्रेग लाइब्रेरी रोड स्थित अपने निवास पर अंतिम सांस ली। बुधवार को उनका अंतिम संस्कार मसूरी के कैमल्स बैक रोड कब्रिस्तान में राजकीय सम्मान और गार्ड ऑफ ऑनर के साथ किया गया।
इस अवसर पर प्रशासन, पुलिस, नौसेना अधिकारी, साहित्यकार, पर्यावरणविद्, सामाजिक संगठनों और राजनीतिक प्रतिनिधियों की बड़ी मौजूदगी रही। सभी ने उस व्यक्ति को अंतिम विदाई दी, जिसने मसूरी को वैश्विक पहचान दिलाई।
वरिष्ठ लेखक गणेश शैली ने इसे मसूरी और भारत के लिए अपूरणीय क्षति बताया, वहीं रस्किन बॉन्ड से मिली प्रेरणा को ह्यूग गैंटज़र के लेखन का टर्निंग पॉइंट बताया गया। ह्यूग गैंटज़र और उनकी पत्नी कोलीन गैंटज़रकृजिनका निधन नवंबर 2024 में हुआकृको इसी वर्ष गणतंत्र दिवस पर पद्मश्री से सम्मानित किया गया था। यह ऐतिहासिक जोड़ी अब केवल स्मृतियों में रह गई है। करीब 20 वर्ष भारतीय नौसेना में कमांडर के रूप में सेवा देने के बाद ह्यूग गैंटज़र ने मसूरी को अपना घर बनाया। पांच दशकों में उन्होंने 30 से अधिक पुस्तकें, हजारों लेख और 52 डॉक्यूमेंट्री के ज़रिए भारत की विरासत को दुनिया से रूबरू कराया। पर्यावरण संरक्षण में उनकी भूमिका ऐतिहासिक रही। मसूरी में खनन के खिलाफ उन्होंने प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी को पत्र लिखकर आंदोलन छेड़ा, जिसके बाद यहां माइनिंग पर रोक लगी। वे सुप्रीम कोर्ट की मॉनिटरिंग कमेटी के सदस्य भी रहे। स्थानीय लोगों के लिए ह्यूग गैंटज़र सिर्फ लेखक नहीं, बल्कि परिवार जैसे थेकृत्योहारों की मिठाइयाँ, आत्मीय रिश्ते और शहर के प्रति उनका प्रेम उन्हें हमेशा यादगार बनाए रखेगा। मसूरी ने आज एक लेखक नहीं, बल्कि अपनी पहचान का एक अहम हिस्सा खो दिया।
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