Sambhal: सम्भल नाम बदलने की मांग पर सपा नेता का विरोध, कहा सरकार मुद्दों से भटका रही है।
प्रधानमंत्री कार्यालय का नाम बदलकर ‘सेवा तीर्थ’ किए जाने के बाद अब सम्भल का नाम बदलने की मांग तेज हो गई है। भाजपा मंत्री गुलाबो देवी
उवैस दानिश, सम्भल
सम्भल। प्रधानमंत्री कार्यालय का नाम बदलकर ‘सेवा तीर्थ’ किए जाने के बाद अब सम्भल का नाम बदलने की मांग तेज हो गई है। भाजपा मंत्री गुलाबो देवी सहित कुछ लोगों की ओर से नाम परिवर्तन की मांग उठने पर सियासत गर्म हो गई है। इस मुद्दे पर सपा जिला सचिव सईद अख्तर ने कड़ा विरोध जताते हुए कहा कि प्रदेश और देश की सरकारें नाम बदलने के अलावा कोई काम नहीं कर रही हैं।
सईद अख्तर ने आरोप लगाया कि सरकारें हिंदू–मुस्लिम की राजनीति के सहारे जनता को मूल मुद्दों से भटका रही हैं। उन्होंने कहा कि बेरोजगारी चरम पर है, महंगाई लगातार बढ़ रही है, स्वास्थ्य सेवाओं की हालत खराब है, शिक्षा व्यवस्था लड़खड़ा रही है, लेकिन सरकार नाम बदलने और धार्मिक राजनीति में उलझी हुई है। उन्होंने कहा कि जिस शहर का नाम सदियों से चला आ रहा है, उसे बदलना जनता के साथ खिलवाड़ है।
जब उनसे पूछा गया कि अगर सम्भल का नाम बदल दिया जाता है तो क्या कोई परेशानी होगी, तो उन्होंने साफ कहा कि बिल्कुल परेशानी होगी। हम बचपन से अपने नाम से जाने जाते हैं। इसी तरह शहर का नाम पीढ़ियों से 'सम्भल' है। इसे बदलकर लोगों को भ्रमित करना सरकार की साजिश है। यह सब मुद्दों से ध्यान भटकाने के लिए किया जा रहा है।
मायावती सरकार के दौरान 2011 में सम्भल को जिला बनाते समय इसका नाम ‘भीमनगर’ रखा गया था। अब फिर इसे ‘कल्कि तीर्थ’ नाम दिए जाने की चर्चा चल रही है। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए सईद अख्तर ने कहा कि उन्हें इसका पूर्ण विरोध है। हम कोशिश करेंगे कि सम्भल का नाम सम्भल ही रहे। सरकार को नाम बदलने के बजाय बेरोजगारी, महंगाई, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी बुनियादी समस्याओं पर ध्यान देना चाहिए। उन्होंने दावा किया कि जनता अब जागरूक हो चुकी है और वर्ष 2027 में भाजपा सरकार को सत्ता से हटाने का काम करेगी।
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