Barabanki : बाराबंकी के आलोक जायसवाल ने शास्त्रीय संगीत में पीएचडी कर बढ़ाया जिले का नाम
आलोक ने बचपन से ही पढ़ाई के साथ संगीत को प्राथमिकता दी। उन्होंने अपनी मां स्वर्गीय गीता देवी को इसकी शुरुआत का श्रेय दिया। मां ने ही संगीत का बीज उनके मन में बोया। संगीत की प्रा
बाराबंकी जिले के बिशुनपुर कस्बा निवासी आलोक जायसवाल ने शास्त्रीय संगीत (गायन) में पीएचडी पूरी करके जिले और परिवार का गौरव बढ़ाया है। वे बाराबंकी के पहले ऐसे व्यक्ति बने हैं जिन्होंने इस क्षेत्र में डॉक्टरेट की डिग्री हासिल की। आलोक ने बचपन से ही पढ़ाई के साथ संगीत को प्राथमिकता दी। उन्होंने अपनी मां स्वर्गीय गीता देवी को इसकी शुरुआत का श्रेय दिया। मां ने ही संगीत का बीज उनके मन में बोया। संगीत की प्रारंभिक शिक्षा भातखंडे संगीत संस्थान से ली। लगातार अभ्यास और समर्पण से उन्होंने इस कला को ऊंचे स्तर तक पहुंचाया।
आलोक जायसवाल ने एमपीए (मास्टर ऑफ परफॉर्मिंग आर्ट्स) निपुण, नेट और आकाशवाणी/दूरदर्शन से बी. ग्रेड (शास्त्रीय और सुगम संगीत) जैसी उपलब्धियां हासिल कीं। ये सफलताएं उनके गुरुओं डॉ. विनीत पवैया, डॉ. कमलेश दुबे, अजय अवस्थी, प्रोफेसर सृष्टि माथुर, देवेंद्र पाठक, डॉ. ऊषा रानी बनर्जी, स्वर्गीय तेज सिंह टाक और स्वर्गीय कृष्णानंद राय की कृपा से मिलीं। उनका शोध विषय "अयोध्या के वैष्णव संगीत का विश्लेषणात्मक अध्ययन (19वीं शताब्दी से अब तक के संदर्भ में)" है। यह शोध डॉ. ऊषा रानी बनर्जी के निर्देशन में पूरा हुआ। मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम में उनकी गहरी आस्था होने के कारण उन्होंने इसी विषय को चुना। दृढ़ता और विश्वास से उन्होंने पीएचडी पूरी की।
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