ऐतिहासिक स्थलों में से एक ब्रिटिशकालीन विक्टोरिया हाल एवं घंटाघर अब पुरातत्व विभाग की संपत्ति, प्रथम अधिसूचना जारी
विक्टोरिया हाल एवं घंटाघर के विकास के लिए जिला प्रशासन की ओर से पूर्व में ही प्रस्ताव प्राप्त हो चुका है। यह जानकारी देते हुए बताया कि विशेष सचिव संस्कृति अनुभाग उमा द्विवेदी ने जारी पत्र में बताया कि प्रदेश के प्राची...
By INA News Hardoi.
जिले के ऐतिहासिक स्थलों में से एक ब्रिटिशकालीन विक्टोरिया हाल एवं घंटाघर अब पुरातत्व विभाग की संपत्ति होंगे। इस संबंध में पुरातत्व विभाग ने प्रथम अधिसूचना जारी कर दी है। विक्टोरिया हाल एवं घंटाघर को संरक्षित किए जाने से पूर्व पुरातत्व विभाग आपत्तियों का निस्तारण भी करेगा, इसके बाद चार हेक्टेयर से अधिक क्षेत्रफल में बना विक्टोरिया हाल एवं घंटाघर संरक्षित कर लिया जाएगा।
जिला पर्यटन अधिकारी दीपांकर चौधरी ने बताया विक्टोरिया हाल एवं घंटाघर के पुरातत्व विभाग की संपत्ति होने पर पर्यटन विभाग से उसके विकास कार्य पर धनराशि व्यय की जा सकेगी। बताया, विक्टोरिया हाल एवं घंटाघर के विकास के लिए जिला प्रशासन की ओर से पूर्व में ही प्रस्ताव प्राप्त हो चुका है। यह जानकारी देते हुए बताया कि विशेष सचिव संस्कृति अनुभाग उमा द्विवेदी ने जारी पत्र में बताया कि प्रदेश के प्राचीन एवं ऐतिहासिक स्मारकों तथा पुरातत्वीय स्थानों, अवशेषों को एंशिएंट मान्यूमेंट प्रिजर्वेशन एक्ट 1904 के अंतर्गत संरक्षित किया जाता है। ब्रिटिशकालीन विक्टोरिया हाल एवं घंटाघर को भी संरक्षित स्मारक घोषित करने की प्रक्रिया शुरू की गई है, जिसके चलते प्रथम अधिसूचना जारी की गई है।
- INA न्यूज़ ने जनपद के ऐतिहासिक पौराणिक स्थलों का अपनी स्मारिका "हरदोई यात्रा" में प्रमुखता से किया वर्णन
INA न्यूज़ न्यूज़ ने पहले ही प्राचीन एवं ऐतिहासिक पौराणिक स्थलों का अपनी स्मारिका "हरदोई यात्रा" में विस्तार से वर्णन किया है। INA न्यूज़ के द्वारा हरदोई में पर्यटन की संभावनाओं व ऐतिहासिक पौराणिक स्थलों, जिनको अनदेखा किया गया था, उस पर विशेष जोर देते हुए पर्यटन विभाग को विशेष रूप से इसकी जानकारी देते हुए एक विशेषांक "हरदोई यात्रा" को प्रकाशित किया था। जिसमें हरदोई के विभिन्न क्षेत्र घंटाघर, रुइया गढ़ी, हत्याहरण, प्रह्लाद कुंद आदि पर शासन व प्रशासन का ध्यान इस ओर आकर्षित कराया, जिससे कि हरदोई का महत्वपूर्ण इतिहास जो कि आदिकाल से लेकर अग्रेंजों से लड़ाई (ब्रिटिशकाल) तक कहीं न कहीं उपेक्षा का शिकार रहा।
इस विशेषांक के जरिये जनपद हरदोई को और बेहतर विकास की ओर ले जाया सकता है। वर्षों से जिले में कई अधिकारी व जनप्रतिनिधियों ने अपने कार्यकाल में छुटपुट ध्यान इस तरफ दिया। लेकिन उनके कुर्सी से जाने के बाद स्थिति जस की तस रही, नतीजन समय के साथ-साथ हरदोई जिला इतिहास के पन्नों में दर्ज सा ही रह गया था। INA न्यूज़ के द्वारा प्रमुखता से जिले के कई ऐतिहासिक स्थलों का महत्त्व बताते हुए "हरदोई यात्रा" के विशेषांक में प्रकाशित कर इनके विकास करने की ओर जोर दिया था। पुरातत्व विभाग द्वारा इन ऐतिहासिक स्थलों के अधिगृहण होने व प्रथम अधिसूचना जारी होंने के बाद उम्मीद की जा सकती है कि जल्द ही हरदोई की इतिहास की किताब में गतिशील विकास के कई नए अध्याय जुड़ेंगे।
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ज्ञात हो कि 16 फरवरी 1886 को महारानी विक्टोरिया के राज्याभिषेक के अवसर पर जिला मजिस्ट्रेट लेफ्टिनेंट कर्नल हार्न्सफोर्ट ने 1857 के संघर्ष में कंपनी से जुड़े स्थानीय निवासियों के साथ बैठक की और स्मृति स्वरूप घंटाघर बनाने की योजना बनाई। घंटाघर का निर्माण पूरा होने के बाद घंटाघर के ऊपर ग्रेट ब्रिटेन से मंगाई गई एक बड़ी घड़ी लगाई गई, जो 1959-60 तक ही चली।
तब तक इसकी मधुर ध्वनि और घंटियों की आवाज पांच मील दूर तक सुनी जा सकती थी, जो अपने आप में इस ऐतिहासिक घटना की कहानी बयां करती है। वर्ष 1850-1863 के बीच जिला मजिस्ट्रेट डब्ल्यू।एस। चैपर के प्रशासन के दौरान जिला बनाया गया था। 1857 के स्वतंत्रता संग्राम के कारण ईस्ट इंडिया कंपनी की सेना और हरदोई के माधौगंज, रुइया के क्षेत्रों के स्वतंत्रता सेनानियों के बीच भीषण संघर्ष हुआ था। इससे जिले के गठन का काम कुछ समय के लिए रोक दिया गया था और बाद में 1877 में विक्टोरिया चार्टर लागू होने तक यह पूरा हो सका।
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भारत में कंपनी के शासन को समाप्त करते हुए, ब्रिटिश संसद ने महारानी विक्टोरिया को कार्यभार सौंप दिया और महारानी को कैसर-ए-हिंद के ताज से सम्मानित किया गया। महारानी ने 1857 के स्वतंत्रता संग्राम के सेनानियों को आम माफी देने की घोषणा की। हरदोई का विक्टोरिया भवन टाउन हॉल के नाम से जाना जाता है। यहां पर रिक्त पड़े विशाल भवन के भूभाग में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने 1929 में विशाल जनसभा की थी। इस जनसभा में बड़ी संख्या में हरदोई और आसपास के जिलों के स्वतंत्रता संग्राम सेनानी और आजादी के मतवाले शामिल हुए थे।
बापू की इसी जनसभा के बाद अंग्रेजों के खिलाफ एक बड़ी आवाज हरदोई से भी उठी थी। इसी जनसभा में विदेशी कपड़ों की होली भी जलाई गई थी। इसी जनसभा से यहां के लोगों ने स्वदेशी कपड़ों को न पहनने की शपथ ली थी। यहां की महिलाओं ने आजादी की लड़ाई के लिए अपने आभूषणों का दान गांधी जी को कर दिया था। यह अंग्रेजों भारत छोड़ो आंदोलन घोषणा वाला स्थल है। हरदोई जिले का निर्माण 1850 से 1863 के दौरान नगर मजिस्ट्रेट डब्ल्यू एस चापर के द्वारा किया गया था। 1857 में ईस्ट इंडिया कंपनी और स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के बीच में हरदोई की रुईयागढ़ी में बड़ा युद्ध हुआ था। इसी दौरान ब्रिटिश संसद ने विक्टोरिया को कैसर-ए-हिंद का ताज देकर सम्मानित किया था।
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