Lucknow : शीतलहर और कोहरे से आलू की पछेती फसल में झुलसा रोग का खतरा बढ़ा
विशेषज्ञ ने किसानों को सलाह दी है कि खेत में पानी जमा न होने दें। अच्छी जल निकासी की व्यवस्था रखें। शीतलहर के समय सुबह और शाम को सिंचाई न करें। धूप निकल
लखनऊ सहित पूरे उत्तर प्रदेश में चल रही शीतलहर, घना कोहरा और अधिक नमी से आलू की फसल पर झुलसा रोग का खतरा मंडरा रहा है। अगर समय पर ध्यान न दिया गया तो किसानों को बड़ा आर्थिक नुकसान हो सकता है। औद्यानिक प्रयोग एवं प्रशिक्षण केंद्र मलिहाबाद के कीट विशेषज्ञ सचिन आर्य ने बताया कि ठंड और नमी की वजह से आलू की पत्तियों पर पहले छोटे भूरे धब्बे दिखते हैं। ये धब्बे धीरे-धीरे काले हो जाते हैं और आगे चलकर पछेती झुलसा रोग बन जाते हैं। इससे पत्तियां सूखने लगती हैं और कंदों का विकास रुक जाता है।
विशेषज्ञ ने किसानों को सलाह दी है कि खेत में पानी जमा न होने दें। अच्छी जल निकासी की व्यवस्था रखें। शीतलहर के समय सुबह और शाम को सिंचाई न करें। धूप निकलने पर हल्की सिंचाई करें। रोग के शुरुआती लक्षण दिखते ही मैंकोजेब 75 प्रतिशत डब्ल्यूपी दवा 2.5 ग्राम प्रति लीटर पानी में घोलकर छिड़काव करें। अगर रोग ज्यादा फैल जाए तो मेटालेक्सिल और मैंकोजेब मिश्रित दवा 2 ग्राम प्रति लीटर पानी में बनाकर 7 से 10 दिन के अंतराल पर छिड़काव करें। छिड़काव साफ स्प्रे पंप से करें और पत्तियों के ऊपर-नीचे दोनों तरफ अच्छी तरह दवा लगाएं।
ठंड से फसल बचाने के लिए रात में खेत की मेड़ों पर हल्का धुआं करना भी फायदेमंद है। कीट विशेषज्ञ ने किसानों से मौसम का पूर्वानुमान देखने और समय पर उचित दवा व कृषि सलाह अपनाने की अपील की है। इससे झुलसा रोग और शीतलहर के प्रभाव से आलू की फसल सुरक्षित रह सकती है।
Also Click : Ayodhya : राम मंदिर अभेद्य किले की तरह बनेगा, 4 किलोमीटर बाउंड्री वॉल और वॉच टावर से होगी मजबूत सुरक्षा
What's Your Reaction?











