केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने त्रिपुरा में राजभाषा सम्मेलन को संबोधित किया, हिंदी और स्थानीय भाषाओं को एक ही मां की दो बहनें बताया, कोई झगड़ा नहीं, प्रचार के बावजूद हिंदी थोपने का आरोप गलत, मोदी नेतृत्व में सभी भाषाएं मजबूत

केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने 20 फरवरी 2026 को त्रिपुरा की राजधानी अगरतला में पूर्वी, उत्तर-पूर्वी और उत्तरी क्षेत्रों के संयुक्त

Feb 22, 2026 - 10:45
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केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने त्रिपुरा में राजभाषा सम्मेलन को संबोधित किया, हिंदी और स्थानीय भाषाओं को एक ही मां की दो बहनें बताया, कोई झगड़ा नहीं, प्रचार के बावजूद हिंदी थोपने का आरोप गलत, मोदी नेतृत्व में सभी भाषाएं मजबूत
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने त्रिपुरा में राजभाषा सम्मेलन को संबोधित किया, हिंदी और स्थानीय भाषाओं को एक ही मां की दो बहनें बताया, कोई झगड़ा नहीं, प्रचार के बावजूद हिंदी थोपने का आरोप गलत, मोदी नेतृत्व में सभी भाषाएं मजबूत

केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने 20 फरवरी 2026 को त्रिपुरा की राजधानी अगरतला में पूर्वी, उत्तर-पूर्वी और उत्तरी क्षेत्रों के संयुक्त क्षेत्रीय राजभाषा सम्मेलन को संबोधित किया। यह सम्मेलन हपनिया के इंटरनेशनल इनडोर एग्जीबिशन सेंटर में आयोजित किया गया था। सम्मेलन का उद्देश्य राजभाषा हिंदी के उपयोग को बढ़ावा देना और क्षेत्रीय भाषाओं के साथ उसके सामंजस्य को मजबूत करना था। अमित शाह ने अपने संबोधन में हिंदी और स्थानीय भाषाओं के बीच संबंध को स्पष्ट किया और कहा कि कई सालों तक हिंदी के खिलाफ अप्रचार किया गया कि हिंदी थोपी जा रही है। अमित शाह ने कहा कि हिंदी और स्थानीय भाषाओं के बीच कभी झगड़ा हो ही नहीं सकता क्योंकि वे एक ही मां की दो बहनें हैं। उन्होंने हिंदी को सभी भाषाओं की सखी बताया और जोर दिया कि जब हिंदी को बढ़ावा मिलता है तो सभी भाषाएं अधिक मजबूत होती हैं। शाह ने उल्लेख किया कि पिछले दस वर्षों में हिंदी थोपने के झूठे प्रचार को तोड़ा गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में पूरा देश अपनी स्वभाषा को सीखने, अपनाने और उसका गौरव बढ़ाने के संकल्प के साथ मजबूती से खड़ा है।

इस कार्यक्रम में त्रिपुरा के मुख्यमंत्री माणिक साहा भी मौजूद थे। उन्होंने कहा कि हिंदी और स्थानीय भाषाओं को साथ मिलकर आगे बढ़ना चाहिए क्योंकि भाषा का मुख्य उद्देश्य लोगों को जोड़ना है, न कि बांटना। मुख्यमंत्री ने हिंदी को संचार के लिए महत्वपूर्ण बताया और कहा कि इसके प्रचार से पूरे देश को एकजुट करने में मदद मिलेगी। सम्मेलन में पूर्वी और उत्तर-पूर्वी क्षेत्रों से प्रतिनिधि शामिल हुए थे। अमित शाह के मुख्य बयान हिंदी और स्थानीय भाषाएं एक ही मां की दो बहनें हैं, जिन्होंने साथ मिलकर प्रगति की है। हिंदी सभी भाषाओं की सहेली है, इसका विकास अन्य भाषाओं को मजबूत बनाता है। पिछले दस वर्षों में हिंदी थोपने का झूठा प्रचार समाप्त हुआ है।

शाह ने संबोधन में भाषा और लिपि को विवाद का मुद्दा न बनाने की अपील की। उन्होंने कहा कि लिपि और भाषा राजनीति का विषय नहीं होनी चाहिए। त्रिपुरा में कुछ मांगों का जिक्र करते हुए उन्होंने देवनागरी लिपि को अपनाने की सलाह दी क्योंकि इससे भाषाओं का दीर्घकालिक संरक्षण और विकास आसान होगा। उन्होंने उल्लेख किया कि पूर्वोत्तर के कई राज्य इस दिशा में आगे बढ़ चुके हैं और त्रिपुरा को भी स्पष्ट निर्णय लेना चाहिए।

सम्मेलन में राजभाषा विभाग के सचिव और अन्य अधिकारी मौजूद थे। कार्यक्रम का फोकस सरकारी कार्यालयों, सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों और बैंकों में हिंदी के उपयोग को बढ़ावा देना था। शाह ने कहा कि हिंदी का प्रचार क्षेत्रीय भाषाओं को कमजोर नहीं करता बल्कि उन्हें व्यापक पहुंच और समृद्धि प्रदान करता है। उन्होंने स्वतंत्रता संग्राम के दौरान गैर-हिंदी भाषी नेताओं द्वारा हिंदी को बढ़ावा देने का उदाहरण दिया। कार्यक्रम का स्थान और आयोजन सम्मेलन हपनिया इंटरनेशनल इनडोर एग्जीबिशन सेंटर, अगरतला में हुआ। यह पूर्वी, उत्तर-पूर्वी और उत्तरी क्षेत्रों का संयुक्त क्षेत्रीय राजभाषा सम्मेलन था। राजभाषा विभाग, गृह मंत्रालय द्वारा आयोजित। अमित शाह ने माता-पिता से अपील की कि वे घर पर बच्चों से मातृभाषा में बात करें। उन्होंने कहा कि मातृभाषा सीखना बच्चों के विकास के लिए आवश्यक है। शाह ने गुजरात को अपना गृह राज्य बताते हुए कहा कि हिंदी उनकी प्राथमिक भाषा नहीं है लेकिन उन्होंने हिंदी सीखी और अधिकांश आधिकारिक कार्य हिंदी में करते हैं। उन्होंने पूर्वोत्तर को राजभाषा हिंदी को मजबूत करने के लिए उपयुक्त क्षेत्र बताया जहां बंगाली, कोकबोरोक और हिंदी साथ-साथ उपयोग होती हैं।

सम्मेलन में त्रिपुरा में बंगाली, कोकबोरोक और हिंदी के समवर्ती उपयोग का उदाहरण दिया गया। शाह ने मौखिक भाषाओं के संरक्षण के लिए ठोस कदम उठाने की बात कही जिनके पास औपचारिक लिपि नहीं है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में भारतीय भाषाओं को पुनर्जीवित करने का सुनहरा दौर आया है। त्रिपुरा सीएम के बयान हिंदी का प्रचार स्थानीय भाषाओं के साथ होना चाहिए। भाषा लोगों को जोड़ने का माध्यम है। प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में भारतीय भाषाओं का विकास हो रहा है। कार्यक्रम में 3000 से अधिक प्रतिभागी शामिल हुए थे जिसमें पूर्वी भारत और उत्तर-पूर्व के प्रतिनिधि थे। शाह ने कहा कि हिंदी का उपयोग सरकारी संचार को आसान बनाता है और राष्ट्रीय एकता को मजबूत करता है। उन्होंने राजभाषा विभाग द्वारा शुरू की गई एआई आधारित अनुवाद, स्पीच रिकग्निशन और रीयल-टाइम प्रोसेसिंग जैसी तकनीकों का जिक्र किया।

शाह ने कहा कि विभाग की सॉफ्टवेयर प्लेटफॉर्म 15 भाषाओं में अनुवाद करती है और इसे सभी 22 आधिकारिक भाषाओं तक विस्तारित करने की योजना है। उन्होंने गृह मंत्रालय से राज्यों को हिंदी में जारी होने वाले संचार का उल्लेख किया। सम्मेलन में राजभाषा पुस्तकों का विमोचन भी हुआ। हिंदी प्रचार के उपाय एआई अनुप्रयोग अनुवाद और स्पीच रिकग्निशन के लिए। भाषा प्रशिक्षण संस्थान और अनुवाद सेवाएं विस्तारित। सरकारी कार्यालयों में हिंदी उपयोग बढ़ावा। अमित शाह ने कहा कि भाषा विविधता भारत की ताकत है। उन्होंने पूर्वोत्तर में हिंदी के बढ़ते उपयोग को राष्ट्रीय एकता के लिए महत्वपूर्ण बताया। शाह ने जोर दिया कि हिंदी का विकास अन्य भाषाओं को समृद्ध करता है और संचार को सरल बनाता है। कार्यक्रम में त्रिपुरा में हिंदी के साथ स्थानीय भाषाओं के सह-अस्तित्व पर चर्चा हुई।

सम्मेलन के दौरान अमित शाह ने कहा कि मोदी सरकार सभी भारतीय भाषाओं के विकास के लिए प्रतिबद्ध है और किसी भाषा को थोपने का कोई इरादा नहीं है। उन्होंने स्वतंत्रता आंदोलन में हिंदी को बढ़ावा देने वाले नेताओं का स्मरण किया। शाह ने कहा कि आज देश अपनी भाषा को अपनाकर आगे बढ़ रहा है। भाषा संरक्षण पर सलाह देवनागरी लिपि अपनाने से भाषाओं का संरक्षण आसान। मौखिक भाषाओं के लिए ठोस कदम। भाषा राजनीति से ऊपर होनी चाहिए। यह दौरा 20 फरवरी 2026 को हुआ और अभी तक कोई अतिरिक्त अपडेट नहीं आया है। कार्यक्रम में हिंदी के प्रचार के साथ क्षेत्रीय भाषाओं के संरक्षण पर जोर दिया गया। अमित शाह का संबोधन राजभाषा सम्मेलन के उद्देश्यों से जुड़ा था।

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