हरदोई: एडवांस टेक्नोलॉजी से कैंसर के क्रांतिकारी उपचार में आरजीसीआईआरसी निभा रहा अग्रणी भूमिका
हरदोई।
आरजीसीआईआरसी ने हरदोई में कैंसर के खिलाफ प्रयासों को किया तेज, उपचार के तौर-तरीकों और उन्नति पर जोर, सिरदर्द प्रबंधन में हुई उन्नति से लेकर ल्यूकेमेनिया उपचार के तौर-तरीकों पर विचार विमर्श करने के साथ-साथ कार्यक्रम में शामिल हुए विशेषज्ञों ने देश पर कैंसर के बढ़ते भार के मुद्दे पर बात रखते हुए इसकी शीघ्र पहचान और आवश्यकतानुसार थेरेपी के महत्व को रेखांकित किया। बतातें चलें हरदोई कैंसर देखभाल एवं अनुसंधान क्षेत्र के अग्रणी संस्थान राजीव गांधी कैंसर इंस्टिट्यूट एंड रिसर्च सेंटर (आरजीसीआईआरसी) ने देश पर कैंसर के बढ़ते भार के प्रति जागरूकता फैलाने के लिए इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए), हरदोई के साथ मिलकर गुरूवार को एक सतत शिक्षा कार्यक्रम (सीएमई) का आयोजन किया। डॉ. (प्रो.) ईश्वर चंद्र प्रेमसागर, चीफ ऑफ न्यूरो एंड स्पाइन ऑन्कोलॉजी, आरजीसी आईआरसी, रोहिणी और डॉ. नरेंद्र अग्रवाल, यूनिट हैड एंड सीनियर कंसलटेंट, हेमाटो-ऑन्कोलॉजी, ल्यूकेमेनिया एंड बीएमटी ने क्रमशः सर्जरी और साइबरनाइफ से सिरदर्द के प्रबंधन पर एक्सपर्ट विचार और ल्यूकेमेनिया उपचार में हुई उन्नति साझा की।
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समय के साथ सिरदर्द की प्रकृति में आ रहे बदलाव पर नजर रखने के महत्व के बारे में बताते हुए डॉ. (प्रो.) ईश्वर चंद्र प्रेमसागर, चीफ ऑफ न्यूरो एंड स्पाइन ऑन्कोलॉजी, आरजीसीआईआरसी, रोहिणी ने कहा, "ज्यादातर सिरदर्द हल्के होते हैं, लेकिन कुछ ब्रेन ट्यूमर के संकेत हो सकते हैं। इनके प्रभावी प्रबंधन में खतरे के संकेतों को पहचानना, समय से मेडिकल जांच-पड़ताल कराना और गंभीर स्थिति को अचूकता से भेदने के लिए साइबरनाइफ जैसे उन्नत उपचार का उपयोग शामिल हैं, जो कि कम से कम साइड इफेक्ट में बेहतर परिणाम देता है।" डॉ. नरेंद्र अग्रवाल, यूनिट हैड एंड सीनियर कंसलटेंट, हेमाटो-ऑन्कोलॉजी, ल्यूकेमेनिया एंड बीएमटी ने बताया, "साइटोजेनेटिक और मॉलिक्यूलर टेस्टिंग के आधार पर मरीजों को अलग-अलग खतरे की श्रेणियों में रखा जा सकता है। उदाहरण के लिए कुछ मरीज दोबारा से बीमार होने या मृत्यु की अत्यधिक खतरे की श्रेणी में हो सकते हैं, वहीं अन्य को खतरा कम हो सकता है। उपचार योजना को इन खतरों की श्रेणी के हिसाब से बदलाव किया जा सकता है।" विशेषज्ञों ने ल्यूकेमेनिया के मामलों के शीघ्र मूल्यांकन और रेफर करने की आवश्यकता पर जोर दिया। ल्यूकेमेनिया एक तरह का कैंसर होता है, जिसमें अस्थिमज्जा (बोन मेरो) अत्यधिक असाधारण सफेद रक्त कोशिकाओं का निर्माण करती है। "कम खतरे वाले ल्यूकेमेनिया के रोगियों के लिए हल्की कीमोथेरेपी जैसे कम छेदन उपचार उपयुक्त हो सकते हैं, वहीं बड़े खतरे वाले ल्यूकेमेनिया से ग्रस्त रोगी को तीव्र कीमोथेरेपी, लक्षित थेरेपी, इम्यूनोथेरैपी और यहाँ तक कि अस्थिमज्जा प्रत्यारोपण (बोन मेरो ट्रांसप्लांट) जैसे अधिक आक्रामक उपचार की आवश्यकता पड़ सकती है," डॉ. अग्रवाल ने कहा। "लगातार सिरदर्द की समस्या होने पर व्यक्तियों के लिए आवश्यक है कि वे तुरंत चिकित्सकीय सलाह लें।
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एमआरआई स्कैन जैसे आम डाइग्नोस्टिक टेस्ट लगभग प्रत्येक स्थान पर उपलब्ध हैं, जिनसे शीघ्र पहचान की जा सकती है," डॉ. (प्रो.) प्रेमसागर ने अलग-अलग तरह सिरदर्द का उल्लेख करते हुए आगे बताया।युवाओं में कैंसर के बढ़ते खतरे को देखते हुए बेहद जरूरी है कि उन्हें उपयुक्त ईलाज मिले। विशेषज्ञों ने उपलब्ध उपचार के विकल्पों और उनकी आवश्यकता के अनुसार व्यापक देखभाल उपलब्ध कराने के लिए मरीजों के मार्गदर्शन में डॉक्टरों की महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित किया। सीएमई कार्यक्रम ने हैल्थकेयर पेशवरों को कैंसर उपचार से जुड़े नवीनतम ज्ञान से सशक्त किया, ताकि वे कैंसर के खिलाफ लड़ाई में आगे रहते हुए अपने मरीजों को सर्वश्रेष्ठ देखभाल प्रदान कर सकें। कार्यक्रम में हरदोई और उसके आसपास के क्षेत्रों के अग्रणी मेडिकल प्रैक्टिशनरों ने भाग लिया।
आरजीसीआईआरसी के बारे में-
वर्ष 1996 में स्थापित हुआ राजीव गांधी कैंसर इंस्टिट्यूट एंड रिसर्च सेंटर (आरजीसीआईआरसी) कैंसर के उपचार के लिए एशिया के प्रमुख अद्वितीय केंद्रों में गिना जाता है, जहां अत्याधुनिक तकनीक का अनूठा फायदा और सुपर स्पेशलिस्टों की विशेषज्ञता उपलब्ध है। लगभग 2 लाख वर्ग फुट में फैले और नीति बाग में एक और सुविधा के साथ रोहिणी में 500+ बिस्तरों की वर्तमान क्षमता के साथ आरजीसीआईआरसी महाद्वीप के सबसे बड़े टर्टियरी कैंसर देखभाल केंद्रों में से एक है।
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साढ़े तीन लाख (3.5) से ज्यादा मरीजों के सफल इलाज के ट्रैक रिकॉर्ड के साथ संस्थान पूरे शरीर की रोबोटिक सर्जरी, साइबर नाइफ, टोमोथेरेपी, टू बीम (अगली पीढ़ी की इमेज गाइडेड रेडिएशन थेरेपी), इंट्रा-ऑपरेटिव ब्रेकीथेरेपी, पीईटी-एमआरआई फ्यूजन और अन्य जैसी सर्वश्रेष्ठ तकनीकें उपलब्ध कराता है। आरजीसीआईआरसी में थ्री स्टेज एयर फिल्ट्रेशन और गैस स्केवेंजिंग सिस्टम के साथ 14 अत्याधुनिक सुसज्जित मॉड्यूलर ऑपरेशन थिएटर और और डे-केयर सर्जरी के लिए 3 माइनर ऑपरेशन थिएटर हैं। संस्थान को लगातार भारत के सर्वश्रेष्ठ ऑन्कोलॉजी अस्पतालों में घोषित किया जाता रहा है और इसे कई पुरस्कार प्राप्त हो चुके हैं। वर्ष 2023 में आरजीसीआईआरसी को अग्रणी अमेरिकी मैग्जीन 'न्यूज वीक' द्वारा ऑन्कोलॉजी में एशिया पैसिफिक क्षेत्र के लिए शीर्ष विशेष अस्पताल घोषित किया गया था। 2024 में 'न्यूज वीक' ने इसे ऑन्कोलॉजी के लिए दुनिया का सर्वश्रेष्ठ विशेषज्ञताप्राप्त अस्पताल घोषित किया था।
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