गाजियाबाद में कोडीन सिरप तस्करी गिरोह पर बड़ा प्रहार, पुलिस ने सौरव त्यागी की दो करोड़ की संपत्ति जब्त की, एनडीपीएस एक्ट के तहत पहली संपत्ति जब्ती कार्रवाई।
उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद जिले में प्रतिबंधित कोडीन युक्त कफ सिरप की कालाबाजारी और तस्करी करने वाले गिरोह के खिलाफ पुलिस
उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद जिले में प्रतिबंधित कोडीन युक्त कफ सिरप की कालाबाजारी और तस्करी करने वाले गिरोह के खिलाफ पुलिस ने सख्त कार्रवाई की है। इस मामले में मुख्य आरोपी सौरव त्यागी की लगभग दो करोड़ रुपये की संपत्ति जब्त की गई है। संपत्ति में तीन दुकानें और चार कारें शामिल हैं। पुलिस ने सौरव त्यागी के आय स्रोतों की जांच की, जिसमें पाया गया कि पिछले पांच वर्षों में उसकी कुल आय 59,78,620 रुपये थी। इसके बावजूद सौरव ने खुद और अपनी पत्नी के नाम पर दो करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति अर्जित की, जो तस्करी से प्राप्त अवैध धन से खरीदी गई। पुलिस अन्य आरोपियों की संपत्तियों की भी जांच कर रही है। यह कार्रवाई एनडीपीएस एक्ट के तहत गाजियाबाद में पहली संपत्ति जब्ती है। यह पूरा मामला चार नवंबर को शुरू हुआ जब क्राइम ब्रांच और नंदग्राम पुलिस ने संयुक्त अभियान चलाकर चार ट्रकों से कोडीन युक्त सिरप बरामद किया। इन ट्रकों में 15.7 लाख से अधिक शीशियां थीं, जिनकी बाजार कीमत लगभग 3.4 करोड़ रुपये आंकी गई। गिरफ्तार किए गए आठ आरोपियों में सौरव त्यागी, शादाब, शिवकांत, संतोष भड़ाना, अंबुज कुमार, धर्मेंद्र सिंह, दीपू यादव और सुशील यादव शामिल हैं। पुलिस ने इनके कब्जे से 20 लाख रुपये नकद, एक कार, दो लैपटॉप, दस मोबाइल फोन, फर्जी सिम कार्ड, मुहरें और अन्य सामान भी बरामद किया।
डीसीपी सिटी एवं मुख्यालय धवल जायसवाल ने बताया कि यह अभियान दिल्ली-मेरठ रोड पर एक गोदाम से चलाया गया था। ट्रकों में सिरप को चूना, सीमेंट और सड़े चावल की बोरियों के नीचे छिपाया गया था। सौरव त्यागी इंदिरापुरम में आरएस फार्मा नाम से फर्जी फार्मा फर्म चला रहा था। वह दिल्ली की एक कंपनी से सिरप खरीदता था और वन्या एंटरप्राइजेज, लेबोरेट फार्मा और एबॉट फार्मा जैसी फर्जी फर्मों के नाम पर सप्लाई करता था। पूछताछ में सौरव त्यागी और संतोष भड़ाना ने कबूल किया कि वे कई राज्यों में सिरप की सप्लाई करते थे, जिसमें राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र शामिल था। वे बांग्लादेश की सीमा तक तस्करी भी करते थे। भारत में 210-212 रुपये की बोतल बांग्लादेश में 600-1000 रुपये में बिकती थी। शराब प्रतिबंध वाले इलाकों में इसका नशे के रूप में दुरुपयोग होता था। सौरव त्यागी गाजियाबाद केमिस्ट्स एंड ड्रगिस्ट एसोसिएशन का कैशियर भी था और फार्मास्यूटिकल फर्मों से कनेक्शन का फायदा उठाता था। इस मामले की जांच में पता चला कि पिछले तीन वर्षों में सौरव त्यागी और संतोष भड़ाना ने 550 से अधिक ट्रकों से सिरप की सप्लाई की थी। सप्लाई गाजियाबाद से उत्तर प्रदेश, दिल्ली, बिहार, झारखंड और बंगाल तक होती थी, जहां से बांग्लादेश पहुंचाई जाती थी। पुलिस ने 21 नवंबर को क्राइम ब्रांच इंस्पेक्टर रमेश सिंह सिंधु को चार लाख रुपये की रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार किया, जो ट्रकों को रिहा करने के लिए ली जा रही थी।
- जब्त सामग्री
बरामद सिरप में एसकुफ और फेंसेडिल ब्रांड की बोतलें थीं। कुल 1,57,350 शीशियां, जिनमें 75,150 एसकुफ और 18,600 फेंसेडिल की थीं। बाजार मूल्य 3.4 करोड़ रुपये। इसके अलावा 20 लाख नकद और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरण।
यह रैकेट उत्तर प्रदेश में बड़े पैमाने पर फैला हुआ था। सोनभद्र पुलिस ने दो ट्रकों से सिरप जब्त कर सप्लाई चेन को ट्रेस किया, जो गाजियाबाद के गोदामों तक पहुंची। वाराणसी में 93,750 बोतलें जब्त की गईं, जिनकी कीमत 1.96 करोड़ रुपये थी। गोदाम के केयरटेकर आजाद जायसवाल को हिरासत में लिया गया। बिल आरएस फार्मा गाजियाबाद से सिंह मेडिको चंदौली के नाम पर जारी था। दिसंबर में एन्फोर्समेंट डायरेक्टोरेट ने मामले में शामिल होकर 25 स्थानों पर छापे मारे, जिसमें लखनऊ, रांची और अहमदाबाद शामिल थे। यह 100 करोड़ रुपये का रैकेट था, जो उत्तर प्रदेश को कोडीन कॉरिडोर बना रहा था। छह मुख्य संचालकों और 68 अन्यों को गिरफ्तार किया गया। मुख्य सरगना शुभम जायसवाल परिवार के साथ दुबई भाग गया। उत्तर प्रदेश सरकार ने मामले की जांच के लिए एसआईटी गठित की। एसआईटी ने 3.5 लाख बोतलें जब्त कीं, जिनकी कीमत 4.5 करोड़ रुपये थी। 32 लोग गिरफ्तार हुए। पांच मुख्य सुपर-स्टॉकिस्ट्स में भोला जायसवाल (वाराणसी), विभोर राणा (सहारनपुर) और सौरभ त्यागी (गाजियाबाद) गिरफ्तार हैं। दो अन्य पर कार्रवाई चल रही है।
वाराणसी में एक और गोदाम से 30,000 बोतलें जब्त की गईं, कीमत 60 लाख रुपये। यह गोदाम शुभम जायसवाल के सहयोगी मनोज कुमार का था। एक पिकअप वैन भी बरामद हुई, जो आजाद जायसवाल के नाम पर रजिस्टर्ड थी। सभी मामले आपस में जुड़े हैं।
- गिरफ्तार आरोपियों की सूची
सौरव त्यागी (37), शादाब (29), शिवकांत (32), संतोष भड़ाना (32), अंबुज (26), धर्मेंद्र (49), दीपू यादव (24), सुशील यादव (35)। मुख्य संचालक सौरव और संतोष।
यह रैकेट फर्जी बिलों, प्रॉक्सी फर्मों और सीमा पार व्यापार पर आधारित था। 12 मुख्य साजिशकर्ता नामित हैं, जिसमें विभोर राणा, सौरभ त्यागी, विशाल राणा, पप्पन यादव, शादाब, मनोहर जायसवाल, अभिषेक शर्मा, विशाल उपाध्याय, भोला प्रसाद, शुभम जायसवाल, आकाश पाठक और विनोद अग्रवाल शामिल। वे नशे वाली कफ सिरप की अवैध वितरण और बिक्री में शामिल थे। लखनऊ में एक बर्खास्त कांस्टेबल की संपत्ति पर ईडी ने छापा मारा। उसका नाम अमित कुमार सिंह उर्फ अमित टाटा की पूछताछ में आया। वह लखनऊ जेल में बंद है। घर में यूरोपीय शैली के इंटीरियर, सर्पिल सीढ़ियां और लक्जरी सामान मिले। एसआईटी ने कोलकाता से प्रतीक मिश्रा और विकास सोनकर को गिरफ्तार किया। प्रतीक निशांत फार्मा का मालिक है और विकास विश्वनाथ फार्मा का। इनकी गिरफ्तारी से कुल गिरफ्तारियां पांच हो गईं। सोनभद्र एसआईटी ने सुशील यादव, सौरभ त्यागी, संतोष भड़ाना, शादाब और शिवकांत को वारंट बी पर लाकर पूछताछ की।
- रैकेट का मोडस ऑपरेंडी
फर्जी फर्मों के नाम पर सिरप खरीद, ट्रकों में छिपाकर सप्लाई। बांग्लादेश और नेपाल तक तस्करी। कोडीन का नशे के रूप में दुरुपयोग। दिसंबर में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने गिरफ्तारी पर रोक की याचिकाएं खारिज कीं। कोर्ट ने एफआईआर को चुनौती देने वाली रिट याचिकाओं को खारिज कर दिया। जांच में वाराणसी, गाजियाबाद और आसपास के इलाकों में रैकेट की व्यापकता पाई गई। 52 जिलों में 332 फर्मों पर छापे मारे गए और 31 जिलों में 133 फर्मों के खिलाफ एफआईआर दर्ज। 28 जिलों में 128 एफआईआर दर्ज। मुख्य सरगना शुभम जायसवाल फरार है। सौरव त्यागी की संपत्ति जब्ती के लिए कोर्ट से आदेश लिया गया। इसमें दुकानें, फ्लैट और गाड़ियां शामिल। अब तक 13 आरोपी गिरफ्तार। अन्य आरोपियों की संपत्तियां चिह्नित की जा रही हैं। यह मामला उत्तर प्रदेश में हाल के वर्षों का सबसे बड़ा घोटाला है। जांच जारी है और आगे गिरफ्तारियां होने की संभावना है।
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