Sambhal : मुफ्ती आलम रज़ा नूरी ने बांग्लादेश में हिंदुओं पर अत्याचार की कड़ी निंदा की, कहा धर्म के नाम पर हिंसा मानवता पर कलंक
उन्होंने कहा कि जिस देश में धर्म के नाम पर लड़ाई-झगड़े, साम्प्रदायिक तनाव, नफरत का माहौल और मॉब लिंचिंग जैसी घटनाएं शुरू हो जाती हैं, वह देश कभी तरक्की नहीं कर
Report : उवैस दानिश, सम्भल
मोहल्ला ठेर स्थित मदरसा अजमल उलूम में मुस्लिम धर्मगुरु मुफ्ती आलम रज़ा नूरी द्वारा एक पत्रकार वार्ता आयोजित की गई। वार्ता के दौरान पत्रकारों ने बांग्लादेश में हिंदुओं पर हो रहे अत्याचार, भारत में हो रहे विरोध प्रदर्शन और बांग्लादेशी खिलाड़ियों के बॉयकॉट को लेकर सवाल किया।
सवाल के जवाब में मुफ्ती आलम रज़ा नूरी ने कहा कि बांग्लादेश में हो रहे अत्याचारों के खिलाफ विरोध प्रदर्शन होना और वहां के खिलाड़ियों का बॉयकॉट किया जाना बिल्कुल सही है। उन्होंने कहा कि जिस देश में धर्म के नाम पर लड़ाई-झगड़े, साम्प्रदायिक तनाव, नफरत का माहौल और मॉब लिंचिंग जैसी घटनाएं शुरू हो जाती हैं, वह देश कभी तरक्की नहीं कर सकता। ऐसी घटनाएं देश की उन्नति के लिए घातक होती हैं। मुफ्ती नूरी ने कहा कि धर्म के साथ-साथ इंसानियत और मानवता को भी नज़र में रखना बेहद ज़रूरी है। जो घटनाएं बांग्लादेश में हो रही हैं, वे मानवता के नाम पर एक कलंक हैं और धर्म को बदनाम करने की नापाक साज़िश का हिस्सा हैं। उन्होंने कहा कि इसकी जितनी भी कड़ी निंदा की जाए, वह कम है।
उन्होंने आगे कहा कि जिस घर और जिस देश में अमन, शांति, भाईचारा और एकता होती है, वही तरक्की करता है। लेकिन जहां नफरत और हिंसा का माहौल बन जाता है, वहां विकास रुक जाता है। बांग्लादेश आज उसी राह पर चल पड़ा है, जिस राह पर कभी पाकिस्तान चला था। आज पाकिस्तान की हालत किसी से छिपी नहीं है। मुफ्ती आलम रज़ा नूरी ने कहा कि बांग्लादेश ने बीते वर्षों में काफी तरक्की की थी, लेकिन मौजूदा हालात के चलते उसकी स्थिति दिन-ब-दिन बिगड़ती जा रही है और देश-विदेश में उसकी साख गिर रही है।
उन्होंने याद दिलाया कि भारत ने 1971 में बांग्लादेश की जनता का हर तरह से साथ दिया था खाने-पीने से लेकर दवा-दारू तक, एक अच्छे पड़ोसी का फर्ज निभाया था। अंत में उन्होंने बांग्लादेश सरकार से अपील की कि वह इन घटनाओं पर सख्ती से लगाम लगाए, दोषियों पर नकेल कसे और देश में अमन, शांति व भाईचारा कायम करे।
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