बॉलीवुड के ही-मैन धर्मेंद्र की कथित मृत्यु की अफवाहें गलत: परिवार ने खारिज किया, वे स्थिर और रिकवर कर रहे हैं। 

भारतीय सिनेमा के दिग्गज अभिनेता धर्मेंद्र देओल, जिन्हें प्यार से 'ही-मैन' कहा जाता है, की मृत्यु की अफवाहें सोशल मीडिया और कुछ समाचार चैनलों पर तेजी से फैलीं, लेकिन

Nov 11, 2025 - 11:41
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बॉलीवुड के ही-मैन धर्मेंद्र की कथित मृत्यु की अफवाहें गलत: परिवार ने खारिज किया, वे स्थिर और रिकवर कर रहे हैं। 
बॉलीवुड के ही-मैन धर्मेंद्र की कथित मृत्यु की अफवाहें गलत: परिवार ने खारिज किया, वे स्थिर और रिकवर कर रहे हैं। 

मुंबई। भारतीय सिनेमा के दिग्गज अभिनेता धर्मेंद्र देओल, जिन्हें प्यार से 'ही-मैन' कहा जाता है, की मृत्यु की अफवाहें सोशल मीडिया और कुछ समाचार चैनलों पर तेजी से फैलीं, लेकिन परिवार ने इन्हें पूरी तरह खारिज कर दिया है। 89 वर्षीय धर्मेंद्र जीवित हैं और मुंबई के ब्रीच कैंडी अस्पताल में इलाज के तहत स्थिर स्थिति में हैं। उनकी पत्नी हेमा मालिनी और बेटी ईशा देओल ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि ये खबरें भ्रामक और असंवेदनशील हैं। यह घटना मीडिया की जिम्मेदारी पर सवाल खड़े करती है, जहां सनसनी फैलाने की होड़ में तथ्यों की अनदेखी हो जाती है।

धर्मेंद्र का जन्म 8 दिसंबर 1935 को पंजाब के लुधियाना जिले के एक छोटे से गांव फस्लावाला में हुआ था। उनका पूरा नाम धर्मेंद्र केवाल कृष्ण देओल था। बचपन से ही वे सादगी भरा जीवन जीते थे। उनके पिता एक सरकारी स्कूल शिक्षक थे, जो उन्हें अनुशासन और मेहनत सिखाते थे। गांव में खेलकूद और कृषि कार्यों में रुचि रखने वाले धर्मेंद्र ने कभी कल्पना नहीं की थी कि वे एक दिन सिल्वर स्क्रीन के सबसे बड़े सितारों में शुमार होंगे। 1950 के दशक में वे मुंबई आए, जहां संघर्ष के दिनों में उन्होंने छोटे-मोटे काम किए। 1954 में उन्होंने अपनी पहली शादी प्रकाश कौर से की, जिनसे उनके दो बेटे सनी देओल और बॉबी देओल हुए, जो आज खुद बड़े अभिनेता हैं।

धर्मेंद्र का फिल्मी सफर 1960 में शुरू हुआ। उनकी पहली फिल्म 'दिल भी तेरा हम भी तेरे' थी, जो ज्यादा सफल नहीं हुई, लेकिन इसमें उनकी सहज अभिनय क्षमता झलकने लगी थी। इसके बाद वे 'सोने की चिड़िया' जैसी फिल्मों में नजर आए। लेकिन असली पहचान मिली 1965 की 'हक़ीक़त' से। इस युद्ध-प्रधान फिल्म में उन्होंने एक सिपाही का किरदार निभाया, जो दर्शकों के दिलों में बस गया। 'हक़ीक़त' ने उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दी और वे रातोंरात स्टार बन गए। इस फिल्म के बाद उनकी लोकप्रियता का ग्राफ तेजी से चढ़ा। 1960 के दशक में वे 'फूल और पत्थर', 'आन मिलो सजना' और 'बंदिनी' जैसी फिल्मों में दिखे, जहां उनकी रोमांटिक और एक्शन वाली छवि बनी।

1970 का दशक धर्मेंद्र के लिए स्वर्णिम काल साबित हुआ। इस दौर में वे बॉलीवुड के सबसे व्यस्त अभिनेता बने। 'मेरा गाव मेरा देश' (1971) में उन्होंने एक किसान का किरदार निभाया, जो ग्रामीण भारत की भावनाओं को छू गया। इस फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर धमाल मचाया। फिर आया 'सत्यकाम' (1969), जहां उन्होंने एक ईमानदार इंजीनियर का रोल किया, जो सामाजिक मुद्दों पर गहरा असर डालता है। लेकिन सबसे यादगार रही 1975 की 'शोले'। रमेश सिप्पी द्वारा निर्देशित इस फिल्म में धर्मेंद्र ने वीरू का किरदार निभाया, जो आज भी भारतीय सिनेमा का आइकॉन है। 'यारा सी दोस्ती हम नहीं तोड़ेंगे' जैसे डायलॉग्स उनकी अमर विरासत बन गए। अमिताभ बच्चन के साथ उनकी जोड़ी 'एंग्री यंग मैन' और 'ही-मैन' की अनोखी मिसाल बनी। 'शोले' ने न सिर्फ रिकॉर्ड तोड़े, बल्कि भारतीय सिनेमा को एक नया आयाम दिया।

धर्मेंद्र की खासियत थी उनकी बहुमुखी प्रतिभा। वे एक्शन हीरो थे, तो रोमांस के बादशाह भी। 'सीता और गीता' (1972) में हेमा मालिनी के साथ उनकी केमिस्ट्री ने दर्शकों को दीवाना बना दिया। इस फिल्म में डबल रोल करने वाली हेमा के साथ उनका रोमांस स्क्रीन पर जादू सा लगता था। इसी दौर में वे 'चुपके चुपके' (1975) में हास्य अभिनेता बने, जहां उनकी टाइमिंग ने सबको हंसाया। 'धर्म वीर' (1977) में उन्होंने फैंटेसी एक्शन किया, जो परिवारिक मनोरंजन का प्रतीक बनी। 1980 के दशक में 'कोहराम' और 'सम्राट' जैसी फिल्मों ने उनकी एक्शन छवि को मजबूत किया। कुल मिलाकर उन्होंने 300 से ज्यादा फिल्मों में काम किया, जिनमें से कई सुपरहिट रहीं। 1987 में तो उन्होंने एक साल में सात हिट फिल्में दीं, जो हिंदी सिनेमा का रिकॉर्ड है।

धर्मेंद्र का निजी जीवन भी उतना ही रोचक रहा। 1979 में उन्होंने हेमा मालिनी से दूसरा विवाह किया, जो बॉलीवुड का चर्चित प्रेम प्रसंग था। हेमा के साथ उनकी दो बेटियां ईशा और आहना हुईं। परिवार के प्रति उनका समर्पण हमेशा चर्चा में रहा। वे अपने बच्चों को सख्ती से पालते थे, लेकिन प्यार से। सनी और बॉबी को उन्होंने खुद फिल्मों में लॉन्च किया। राजनीति में भी कदम रखा, 2004 में ग्वालियर से लोकसभा सांसद बने। लेकिन सिनेमा ही उनकी असली पहचान रहा। वे पद्म भूषण से सम्मानित हुए और दादासाहेब फाल्के पुरस्कार के प्रबल दावेदार रहे।

हाल के वर्षों में स्वास्थ्य समस्याओं ने उन्हें परेशान किया। 2015 से वे पीठ दर्द और मांसपेशियों की कमजोरी से जूझ रहे थे। 2025 में बाएं आंख के कॉर्निया ट्रांसप्लांट कराया। 31 अक्टूबर को सांस लेने में तकलीफ के कारण अस्पताल गए, लेकिन जल्द छुट्टी मिल गई। 10 नवंबर को फिर भर्ती हुए, जहां रूटीन चेकअप के नाम पर उन्हें ऑब्जर्वेशन में रखा गया। कुछ रिपोर्ट्स में वेंटिलेटर सपोर्ट का जिक्र आया, लेकिन परिवार ने इसे खारिज किया। 11 नवंबर की सुबह अफवाहें फैलीं, जब रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने एक ट्वीट में शोक व्यक्त किया, जो बाद में गलती निकला। कुछ चैनलों ने बिना सत्यापन के ब्रेकिंग न्यूज चला दी।

हेमा मालिनी ने सोशल मीडिया पर लिखा, "यह असहनीय है। जिम्मेदार चैनल कैसे एक ऐसे व्यक्ति की मृत्यु की झूठी खबर फैला सकते हैं, जो इलाज का सकारात्मक जवाब दे रहा है और ठीक हो रहा है? यह बेहद असम्मानजनक और गैर-जिम्मेदाराना है। कृपया परिवार की गोपनीयता का सम्मान करें।" ईशा देओल ने इंस्टाग्राम पर कहा, "मीडिया ओवरड्राइव में है और झूठी खबरें फैला रहा है। मेरे पिता स्थिर हैं और रिकवर कर रहे हैं।" सनी देओल की टीम ने भी बयान जारी कर कहा कि वे प्रार्थनाओं के लिए आभारी हैं, लेकिन अफवाहें गलत हैं।

इस घटना पर बॉलीवुड ने एकजुटता दिखाई। शाहरुख खान, सलमान खान, गोविंदा, अमीषा पटेल जैसे सितारे अस्पताल पहुंचे। उदित नारायण ने कहा, "वे हर रोल में छा जाते थे।" जावेद अख्तर ने ट्वीट किया, "धर्म जी के साथ एक युग का अंत।" लेकिन हेमा के बयान के बाद सभी ने राहत की सांस ली। प्रशंसक सोशल मीडिया पर #GetWellSoonDharmendra ट्रेंड करा रहे हैं।

यह अफवाह भारतीय मीडिया की विश्वसनीयता पर सवाल उठाती है। सोशल मीडिया के दौर में फेक न्यूज तेजी से फैलती है, जो परिवारों को आहत करती है। धर्मेंद्र जैसे कलाकार सादगी और शालीनता की मिसाल हैं। वे कभी दिखावे से दूर रहे। उनकी कविताएं और सोशल मीडिया पोस्ट भावुक होते हैं। उम्मीद है वे जल्द स्वस्थ होकर 'इक्कीस' जैसी फिल्मों में लौटेंगे, जो 25 दिसंबर को रिलीज होनी है। उनके 90वें जन्मदिन पर फैंस की दुआएं उनके साथ हैं।

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