सूरत में मृत्यु प्रमाण पत्र न होने से श्मशान घाट से वापस अस्पताल लाया गया महिला का शव, परिजनों और कर्मचारियों में हुई हैरानी
श्मशान घाट पर पहुंचने के बाद संचालकों ने अंतिम संस्कार के लिए आवश्यक दस्तावेज मांगे, जिसमें मृत्यु प्रमाण पत्र शामिल था। परिजनों के पास मृत्यु प्रमाण पत्र नहीं था, क्योंकि अस्पताल
गुजरात के सूरत शहर में एक असामान्य घटना सामने आई, जहां एक महिला की मौत के बाद उसका शव अंतिम संस्कार के लिए श्मशान घाट ले जाया गया, लेकिन वहां से बिना दाह संस्कार के ही शव को वापस अस्पताल लाना पड़ा। यह मामला पांडेसरा इलाके के शिव नगर में रहने वाली 57 वर्षीय सुनीता देवी बृजनंदन तांती से जुड़ा है। महिला की मौत न्यू सिविल अस्पताल में हुई थी, जिसके बाद परिजनों ने शव को घर ले जाकर अंतिम संस्कार की तैयारियां शुरू कीं। शव को अंतिम संस्कार के वस्त्र पहनाए गए और फूल माला चढ़ाई गई। इसके बाद परिजन अर्थी पर शव लेकर श्मशान घाट पहुंचे।
श्मशान घाट पर पहुंचने के बाद संचालकों ने अंतिम संस्कार के लिए आवश्यक दस्तावेज मांगे, जिसमें मृत्यु प्रमाण पत्र शामिल था। परिजनों के पास मृत्यु प्रमाण पत्र नहीं था, क्योंकि अस्पताल से शव लेते समय यह जारी नहीं किया गया था। श्मशान घाट के कर्मचारियों ने स्पष्ट कहा कि बिना मृत्यु प्रमाण पत्र और अन्य जरूरी कागजात के दाह संस्कार नहीं किया जा सकता। इस स्थिति में परिजनों को कोई विकल्प नहीं बचा और उन्हें अर्थी पर ही शव लेकर वापस लौटना पड़ा। पुलिस को भी सूचना दी गई, जिसने मौके पर पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया। पुलिस ने परिजनों को समझाया कि मृत्यु प्रमाण पत्र के अभाव में अंतिम संस्कार संभव नहीं है। प्रशासन की सलाह पर परिजन शव को फिर से सूरत के न्यू सिविल अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां महिला की मौत हुई थी। अस्पताल पहुंचते समय शव पर अंतिम संस्कार के वस्त्र और फूल माला लगी हुई थी, जिसे देखकर अस्पताल का स्टाफ, डॉक्टर और नर्सिंग कर्मचारी चौंक गए। यह अस्पताल के इतिहास में पहला ऐसा मामला था, जब कोई शव श्मशान घाट से वापस जांच और दस्तावेज पूरे करने के लिए लाया गया।
अस्पताल में महिला डॉक्टर ने शव की दोबारा जांच की और औपचारिक रूप से मृत घोषित किया। इसके बाद मृत्यु प्रमाण पत्र और अन्य आवश्यक कागजात तैयार किए गए। दस्तावेज मिलने के बाद परिजन शव को लेकर वापस श्मशान घाट गए और अंतिम संस्कार की प्रक्रिया पूरी की। इस पूरी घटना ने परिजनों के अलावा श्मशान घाट के कर्मचारियों और अस्पताल स्टाफ को भी हैरान कर दिया। परिजनों को इस प्रक्रिया में काफी समय लग गया, जिससे अंतिम संस्कार में देरी हुई। यह घटना दस्तावेजों की महत्वपूर्णता को दर्शाती है, क्योंकि बिना मृत्यु प्रमाण पत्र के अंतिम संस्कार नहीं हो सकता। अस्पतालों में मौत के मामलों में मृत्यु प्रमाण पत्र जारी करना अनिवार्य होता है, लेकिन इस मामले में यह प्रक्रिया पूरी नहीं हुई थी। श्मशान घाट पर नियमों का पालन सख्ती से किया जाता है, ताकि कोई गलत प्रक्रिया न हो। परिजनों ने शव को घर से सीधे श्मशान घाट ले जाने की जल्दबाजी में दस्तावेज की कमी को नजरअंदाज कर दिया।
अस्पताल में शव की वापसी के समय मौजूद कर्मचारियों ने बताया कि शव पर लगे फूल और वस्त्र देखकर सभी आश्चर्यचकित हो गए। डॉक्टरों ने प्रक्रिया पूरी करने के बाद प्रमाण पत्र जारी किया। इस घटना से स्थानीय क्षेत्र में चर्चा हुई कि कैसे एक शव श्मशान से वापस अस्पताल आया। परिजनों को इस असुविधा का सामना करना पड़ा, लेकिन अंत में सभी औपचारिकताएं पूरी हो गईं। श्मशान घाट के संचालकों ने नियमों का पालन करते हुए सही निर्णय लिया, जिससे कोई अनियमितता नहीं हुई। पुलिस की भूमिका भी परिजनों को सही दिशा दिखाने में रही। अस्पताल प्रशासन ने दस्तावेज जल्द जारी कर मामले को सुलझाया। यह मामला दर्शाता है कि मौत और अंतिम संस्कार से जुड़ी प्रक्रियाओं में दस्तावेजों का होना कितना जरूरी है।
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