New Delhi: ईडब्ल्यूएस का मानक हर प्रदेश में अलग क्यों, सरलीकरण किया जाए - रीना एन सिंह
आरक्षण में आर्थिक रूप से कमजोर अभ्यर्थियों को प्राथमिकता देने संबंधी जनहित याचिका दायर करने वाली सुप्रीम कोर्ट की अधिवक्ता रीना एन सिंह
नई दिल्ली। आरक्षण में आर्थिक रूप से कमजोर अभ्यर्थियों को प्राथमिकता देने संबंधी जनहित याचिका दायर करने वाली सुप्रीम कोर्ट की अधिवक्ता रीना एन सिंह ने मांग की है कि जब पूरे देश में गरीब एक है तो आर्थिक रूप से पिछड़े सवर्ण जाति के लिए 10% आरक्षण ईडब्ल्यूएस भारत सरकार के द्वारा पूरे देश भर में लागू किया गया है तो इसके मानक अलग-अलग राज्यों में अलग-अलग क्यों है, उन्होंने कहा कि वास्तव में सवर्ण समाज में जो लोग आर्थिक रूप से अत्यंत कमजोर है उनके लिए सरकार के पास कोई ठोस प्रावधान है ही नहीं।
उन्होंने कहा कि ईडब्ल्यूएस का सरलीकरण अत्यंत आवश्यक है। इसमें तमाम प्रावधानों को जोड़ा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि जमीन होने के आधार पर आर्थिक स्थिति मजबूत मानना एक तरह से सवर्ण समाज के साथ अन्याय है।
इसके अलावा उन्होंने कहा कि जिस तरह से पिछड़ा और दलित वर्ग के लोगों को आरक्षण के आधार पर उम्र में छूट मिलती है इस तरह से ईडब्ल्यूएस के अभ्यर्थियों को भी प्रतियोगी परीक्षाओं में उम्र में छूट मिलनी चाहिए।
रीना एन सिंह ने कहा कि भारत देश में आर्थिक आधार पर कमजोर होने के कारण ही 85 करोड़ लोगों को फ्री में राशन दिया जा रहा है लेकिन इस देश का दुर्भाग्य है कि आरक्षण सामाजिक रूप से पिछड़े लोगों को दिया जा रहा है यही व्यवस्था लगातार देश के विकास में रोड़े अटका रही है।
उन्होंने कहा कि ईडब्ल्यूएस प्रमाण पत्र बनाने के लिए जिस तरह की शिकायतें और भ्रष्टाचार की बातें सामने आती है वह अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है। रीना एन सिंह ने कहा कि ईडब्ल्यूएस का मानक उत्तर प्रदेश राजस्थान हरियाणा जैसे प्रदेशों में अलग-अलग है यह अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है।
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